मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम केस: सुप्रीम कोर्ट ने CBI के पूर्व अंतरिम निदेशक नगेश्वर राव को अवमानना का दोषी माना

मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम रेप मामले के सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई क्व पूर्व निदेशक नागेश्वर राव के माफीनामे को अस्वीकार करते हुए कोर्ट की अवमानना का दोहाई माना है। सुप्रीम कोर्ट ने नागेश्वर राव पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगया और आज कोर्ट की करवाई खत्म होने तक कोर्ट में ही रहने का आदेश सुनाया है। मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई ने नागेश्वर राव से पूछा कि आपको कुछ कहना है, हम आपको 30 दिन की जेल की सज़ा सुनाने वाले हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम मामले की सीबीआई जांच में सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना जनश टीम में शामिल किसी भी अधिकारी का ट्रांसफर नही किया जाएगा । इसके बाद भी नागेश्वर राव ने जांच टीम के चीफ सीबीआई अधिकारी आए के शर्मा का 17 जनवरी कप CRPF में ट्रांसफर कर दिया था। इसके बाद सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव ने बिना शर्त के सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी थी। उन्होंने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफीनामा दाखिल कर दिया था। आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के समय अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा था कि राव ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है, लेकिन उन्होंने यह जानबूझ कर नही किया और सब अनजाने में हो गई थी। इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि अवमानना के आरोपी के बचाव सरकार के पैसे से क्यों किया जा रहा है। चीफ जस्टिस ने सख्त नाराज़गी जताते हुए कहा कि राव को पुराने आदेश के बारे में पता था और उन्होंने लीगल विभाग से राव मांगी थी और लीगल एडवाइजर ने कहा था कि आए के शर्मा का ट्रांसफर करने से पहले सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर इजाज़त मांगी जा सकती है लेकिन ऐसा नही किया गया। इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि राव ने गलती स्वीकारी है उन्होंने माफी मांगी है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि संतुष्ट हुए बगैर और कोर्ट से पूछे बगैर अधिकारी के रिवील आदेश पर साइन करने अवमानना नही है तो क्या है ? चीफ जस्टिस ने कहा कि राव ने आए के शर्मा को जांच से हटाने के बाद सुप्रीम कोर्ट को बताना तक ज़रूरी नही समझा और उनका रवैया रहा है मुझको जो करना था कर दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि वो नागेश्वर राव की माफी को नहीं स्वीकार कर रहे। और उन्हें अवमानना का दोषी करार देने वाले हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक को अवमानना का दोषी माना और उनपर 1 लकः का जुर्माना लगाया और सुप्रीम कोर्ट की आज की कार्यवाही खत्म होने तक कोर्ट रूम में ही बैठने को कहा।

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