घरों में पानी, आंखों में आंसू और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में परिवार—लखनऊ के फैजुल्लागंज में बाढ़ ने हजारों लोगों की जिंदगी अस्त-व्यस्त कर दी
लखनऊ (जिरगाम खान) फैजुल्लागंज में सैलाब ने सिर्फ गलियों और मकानों को नहीं डुबोया, बल्कि हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को भी उजाड़ दिया है। कहीं घरों में पानी है, कहीं आंखों में आंसू और कहीं अपने ही आशियाने को छोड़कर महफूज़ जगह की तलाश में निकलते परिवार।
गोद में बच्चे, कंधों पर गठरियां और पीछे छूटते घरों को आखिरी बार निहारती आंखें, इस बाढ़ की सबसे दर्दनाक तस्वीर हैं। बच्चों के हाथों से खिलौने और किताबें छूट गईं, औरतों की चिंता परिवार और घर के सामान को लेकर है, जबकि बुजुर्ग अपनी पूरी जिंदगी की कमाई को पानी में डूबता देख रहे हैं।

रात के सन्नाटे में पानी की सनसनाहट, बच्चों के रोने की आवाज और मदद के लिए भटकते बेजुबान जानवरों की चीखें इस त्रासदी को और भयावह बना देती हैं।
यहां पानी सिर्फ मकानों में नहीं भरा है, वह लोगों की यादों और उम्मीदों में भी उतर गया है।
सैलाब एक दिन उतर जाएगा। घर साफ हो जाएंगे, जिंदगी फिर पटरी पर लौटेगी। मगर जिन आंखों ने अपने घर को पानी में डूबते देखा है, उनके भीतर का डर शायद इतनी जल्दी नहीं उतरेगा।
फैजुल्लागंज की यह बाढ़ सिर्फ पानी की कहानी नहीं, बल्कि इंसान की बेबसी, पलायन और उम्मीद की कहानी है।
