नए दोस्त से बड़ी डील:UAE को आयरन डोम डिफेंस शील्ड देगा इजराइल, इसी की वजह से हमास के हमले रोक पाता है तेल अवीव
इजराइल ने साफ कर दिया है कि वो अपनी स्पेशल और हाईटेक डिफेंस शील्ड आयरन डोम UAE को देने के लिए तैयार है। अगर ऐसा होता है तो UAE पहला अरब देश होगा जिसके पास इजराइल का यह बेहद खास हथियार पहुंचेगा। आयरन डोम की पिछले साल काफी चर्चा हुई थी। तब फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास ने हजारों रॉकेट इजराइल की तरफ दागे थे। लेकिन, आयरन डोम ने इन सभी रॉकेट्स को हवा में ही मार गिराया था। इस सिस्टम की एक्यूरेसी 90% से भी ज्यादा मानी जाती है।
इस वक्त इस ऐलान के मायने समझिए
इजराइल के राष्ट्रपति रविवार UAE दौरे पर थे। इसी दौरान यमन के हूती विद्रोहियों की तरफ से एक रॉकेट अबुधाबी की तरफ दागा गया। इसे UAE के मिसाइल इंटरसेप्टर ने मार गिराया। एक महीने में अबुधाबी पर किया गया यह तीसरा रॉकेट हमला था। पहले हमले में तीन लोग मारे गए थे। इनमें दो भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक था।
बहरहाल, रविवार को हुए रॉकेट हमले के बाद UAE के जर्नलिस्ट्स ने इजराइली अफसरों से यह सवाल किया कि क्या इजराइल अपना बेहद खास आयरन डोम डिफेंस सिस्टम UAE को दे सकता है। इसका जवाब दिया गया- हां। हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन हासिल है। इजराइल और UAE के लिए ईरान दुश्मन नंबर 1 है।
‘टाइम्स ऑफ इजराइल’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल और UAE सरकार के बीच पिछले महीने से ही आयरन डोम डील पर बात चल रही थी और यह करीब-करीब फाइनल हो चुकी है। किसी भी वक्त इसका ऐलान हो सकता है। फिलहाल, अबुधाबी के पास साउथ कोरिया का मिसाइल डिफेंस सिस्टम है, लेकिन यह उतना कारगर नहीं जितना आयरन डोम। अगर UAE यह सिस्टम हासिल कर लेता है तो वो ईरान का मुकाबला करने के लिहाज से भी बहुत ताकतवर हो जाएगा।
नई दोस्ती का नया करार
दोनों देशों के बीच डिप्लोमैटिक रिलेशन पिछले साल ही बने हैं। इसके लिए अमेरिका के तब के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बहुत अहम भूमिका निभाई थी। अब तक पांच अरब देश इजराइल को मान्यता दे चुके हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब भी गुपचुप तरीके से इजराइल के संपर्क में है और वो भी अपनी हिफाजत के लिए जल्द ही आयरन डोम खरीद सकता है।
कैसे आया आयरन डोम का विचार
2006 में इजराइल-लेबनान युद्ध के दौरान 4000 रॉकेट उत्तरी इजराइल पर दागे गए थे। वहीं, 2000 और 2007 में गाजा की ओर से भी दक्षिणी इजराइल पर भी 4000 रॉकेट हमले किए गए थे। इन हमलों से बचने के लिए इजराइल को ऐसी तकनीक का विचार आया, जिसमें रॉकेट हमले की पहचानकर उसे विफल किया जा सके।
ऐसे करता है काम
- सबसे पहले आयरन डोम सिस्टम, रॉकेट की पहचान करता है।
- इसके बाद रेंज और निशाने पर लिए गए क्षेत्र की दिशा की जांच करता है।
- इसके बाद वॉर्निंग सायरन बजाया जाता है। सायरन के बाद स्थानीय लोगों के पास सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए 30 से 90 सेकंड का समय होता है।
- इसके बाद नुकसान का अंदाजा लगाते हुए आयरन डोम ऑपरेटर्स काउंटर मिसाइल लॉन्च करता है और रॉकेट को हवा में नष्ट कर देता है।

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