पूर्णिया: अंधेरे में हैं जिन्दगी रौशन करने वाले पुस्तकालय की किताबें

By Saurav Shekhar

पूर्णिया शहर के बीचोबीच थाना चौक पर स्थित राज्य पुस्तकालय बदहाली के दौर से गुज़र रहा है। कहते हैं कि किताबें ज़िन्दगी को रौशन करती हैं लेकिन पूर्णिया स्थित लाइब्रेरी में बीते कई वर्षों से बिजली का एक बल्ब तक नहीं जला।

प्रतिनियोजित कर्मियों के भरोसे पुस्तकालय

पुस्तकालय के सारे स्थायी कर्मचारियों को सेवानिवृत्त हुए कई साल बीत गए हैं। वर्ष 2018 से पुस्तकालय में एक भी स्थायी कर्मी नहीं हैं। इसके बाद से अब तक पुस्तकालय में किसी नये स्थायी कर्मचारी की भर्ती नहीं हुई। पुस्तकालय के सभी आधिकारिक कामकाजों के लिए ज़िला शिक्षा विभाग द्वारा चार लोग प्रतिनियोजन पर काम कर रहे हैं। पुस्तकालय में काम कर रहे एक कर्मी हमें बताते हैं कि लाइब्रेरी की सुरक्षा दृष्टि से नाइट गार्ड तक उपलब्घ नहीं है।

यह एक विडम्बना है कि रेणु के अंचल पूर्णिया स्थित राज्य पुस्तकालय का सवा दो लाख रुपये का बिजली बिल बकाया है। इसके चलते यहां का बिजली कनेक्शन काट दिया गया है। यही कारण है कि शाम ढलने के साथ ही दुनिया रोशन करने वाली किताबें अंधेरे से घिर जाती हैं।


पुस्तकालय में काम कर रहे रहमान हमें बताते हैं कि फंड का आवंटन न होने के चलते हम अखबार और पत्रिकाएं अपने स्थायी पाठकों को भी उपलब्ध नहीं करवा पाते। रहमान आगे कहते हैं कि अगर अखबार आता भी है तो उसका भुगतान हम निजी तौर पर करते हैं। पुस्कालय में सरकार की तरफ से पत्र पत्रिकाओं के खरीद के लिए कोई पैसा नहीं आता है।

किताबों को चट कर रहे दीमक 

लाइब्रेरी में बुक शेल्फ न होने के कारण कई किताबें ज़मीन पर रखी बर्बाद हो रही हैं। इसके अलावा लाइब्रेरी में तमाम बड़े साहित्यकारों की कई महत्वपूर्ण किताबें  रखरखाव और व्यवस्था के अभाव में दीमकों का खाना बन रही हैं। इसके लिए आगे भी कोई खास इंतजाम नहीं नज़र आता है। पुस्तकालय के कर्मी बताते हैं कि उन्होंने संबंधित विभाग को कई बार आवेदन किया परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई।

पूर्णिया राज्य पुस्तकालय की स्थापना वर्ष 1952 में हुई थी। जिसका संचालन सिन्हा पुस्तकालय, पटना द्वारा किया जाता है। पुस्तकालय कर्मी रहमान कहते हैं कि सिन्हा लाइब्रेरी को ही कमेटी गठित कर फंड को आवंटित करने का ज़िम्मा मिला था लेकिन न तो कभी कमेटी के सभी सदस्य बैठक कर पाए और न ही फंड आवंटित हुआ है।

साल 2018 में बिहार सरकार के एक आदेश के बाद पुस्तकालय को मिला पैसा वापस ले लिया गया था। वह कहते हैं कि हमें सिन्हा लाइब्रेरी की तरफ से यह आश्वासन दिया गया है कि दिसम्बर 2020 के आखिर तक फंड आवंटित कर दिया जाएगा।

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