बाबरी मस्जिद विवाद: रामचरितमानस में भी भगवान राम के जन्मस्थान के बारे में सही जगह नहीं बताई गई - धवन

राजीव धवन ने पीठ के सामने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कल पूछा था कि वो अपनी बहस पूरी कर लेंगे। राजीव धवन ने कहा कि मेरे साथ दूसरे मुस्लिम पक्ष के वकील अगले हफ्ते तक यानी 27 सितंबर तक बहस पूरी कर लेंगे। जिसपर मामले CJI जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा इसका मतलब आप अपनी बहस इस महीने तक पूरी कर लेंगे। CJI जस्टिस रंजन गोगोई ने हिन्दू पक्ष से पूछा आप कितना समय लेंगे मुस्लिम पक्ष की दलील पर अपना पक्ष रखने के लिए। जिसपर रामलला विराजमान की तरफ से सी एस वैधनाथन ने कहा कि दो दिन। फिर मुस्लिम पक्ष की तरफ राजीव धवन ने कहा की हिन्दू पक्ष के बहस के बाद वो 2 दिनों में अपने सूट पर यानी याचिका पर बहस करेंगे।

इसके बाद CJI जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा हमें उम्मीद है कि हम अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी कर लेंगे। CJI ने कहा कि सभी पक्षों को इसमें एफर्ट करना होगा ताकि सुनवाई समय पर पूरी हो। CJI ने कहा कि उसके बाद हमें चार हफ़्तों का समय मिलेगा फैसला लिखने के लिए। CJI ने कहा कि अगर इस मामले में सुनवाई को तय समय पर पूरा करने के लिए कोर्ट को एक घंटे ज्यादा बैठना पड़े या शनिवार को तो भी हम बैठेंगे।

CJI जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा मध्यस्थता कमिटी का हमें पत्र मिला है।अगर पक्ष आपसी बातचीत कर मसले का समझौता करना चाहते है तो मध्यस्थता कर सकते है। CJI ने कहा कि गोपनीयता मध्यस्थता को लेकर बनी रहेगी। मध्यस्थता को लेकर अगर नतीजा निकलता है तो उसे कोर्ट के समक्ष रखें। इसके बाद मुस्लिम पक्ष की तरफ से राजीव धवन ने बहस शुरू की।

धावन ने कहा कि रामचरित्रमानस में भी भगावन राम के जन्मस्थान के बारे सही जगह नही बातए गई है बस यही कहा गया है कि भगवान राम अयोध्या में पैदा हुए थे। धवन ने कहा कि प्राचीन काल में भारत में मंदिरों पर हमला किसी धर्म से नफरत की वजह से नही गया बल्कि संपत्ति लूटने के लिए किया गया।सुनवाई के दौरान सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने कई ऐतिहासिक किताबों का ज़िक्र किया। धवन ने कहा कि 1855 हिन्दू और मुस्लिम दोनों विवादित जगह पर पूजा करते है मुस्लिम अंदर नामज़ पढ़ते थे और हिन्दू बाहर नामज़ पढ़ते थे।

धवन ने कहा कि हिन्दू पक्ष की तरफ से कहा गया कि विलियम फिंच ने अयोध्या में विवादित जगह पर किसी मस्जिद के बारे में नही लिखा है लेकिन एक विदेशी यात्री विलियम फॉर्स्टर ने विवादित स्थल पर मस्जिद की बात कही है। धवन ने कहा कि यह भी साफ नही है कि मंदिर को  बाबर ने तोड़ा या औरंगजेब ने तोड़ा, धावन ने एक गज़ेटियर का हवाला देते हुए कहा कि गज़ेटियर में भी चबूतरे में कोई जानकारी नही दी गई है।

सुन्नी वाक़्फ़ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने कहा कि 1949 से पहले विवादित ढांचे के अंदर मूर्ति नही थी, और अंदर पूजा भी नही होती थी, वहां पर पूजा के लिए कोई जगह नही थी, नही ही कोई वहां दर्शन के लिए जाते थे, 84-85 में गर्भ गृह में बाहर से ही मूर्ति का दर्शन शुरू हुआ।

जस्टिस  DY चन्द्रचूड़ ने पूछा कि मस्जिद के गर्भगृह से राम चबूतरे के बीच की दूरी कितनी है?, राजीव धवन ने कहा कि उसकी दूरी 50 यार्ड है, जस्टिस बोबडे ने कहा उसकी दूरी 40 फिट है।

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने कहा कि लोग ज़मीन पर एक कमरे के लिए लड़ रहे है, 1885 में पूरी ज़मीन मुस्लिम को दी गई और बाहर पूजा के लिए हिन्दू को गई । जस्टिस DY चन्द्रचूड़ के कहा कि 1855 से पहले यह मस्जिद के रूप में भी प्रयोग किया जाता था।1856 के बाद रेलिंग को रखा गया था। जब रेलिंग बनाई गई उसी समय पर राम चबूतर रेलिंग के पास क्यों रखा गया शायद ऐसा इन लिए हुए ताकि हिन्दू जब वहां पूजा करे तो उनको लगे कि वह गर्भगृह में पूजा कर रहे है ? धवन ने कहा कि यह कैसा अटकलबाजी है, 170 साल पुरानी बात है, धवन ने कहा कि मुझको नही मालूम कि वह रेलिंग के पास क्यों जाते थे, शायद इस लिए जाते थे ताकि पूरे ढांचे को कब्ज़े में ले सके।

राजीव धवन ने कहा कि 19वीं सदी के गज़ेटियर और भारत आने वाले यात्रियों के अलवाह और कोई सबूत नही है कि वहां पर सिर्फ जन्मस्थान था, धवन ने कहा कि जीलानी की दलील बिल्कुल सही है कि 1885 से पहले से यात्रियों का कोई महत्व नही है

राजीव धवन ने कहा कि वह पूजा करने की बात करके पूरी ज़मीन मांग रहे है, लोग एक एक इंच के लिए लड़ रहे है, गवाहों ने जिससे उससे उसने किसी से सुना या बताया और उसको भी किसी और ने बताया पूरी गवाही एक झूठ के आधार पर चल रही है जो एक के बाद एक व्यक्ति से बार बार से बोली गई राजीव धवन ने हिन्दू पक्षकारों की गवाही पर सावला उठाते हुए कहा कि जब गवाहों को विवादित जगह की 10 तस्वीर दिखाई गई तो उस जगह को नही पहचान पाए की तस्वीर कहा की है। धवन ने कहा कि जब गवाहों को तस्वीर दिख कर पूछा गया कि अल्लाह कहा लिखा है तो उन्होंने ने कहा कि उर्दू शब्द को नही पढ़पाते है कि क्या लिखा हुआ है,

धवन ने कहा कि जब स्ट्रक्सचर में अल्लाह लिखा हो तो वह कैसे मंदिर हो सकता है, तस्वीर में कई जगह पर अल्लाह लिखा दिखा था।। कल। भी धवन अपनी जिरह जारी रखेंगे।

बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. इस संवैधानिक पीठ में जीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस.ए.बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए . नजीर भी शामिल है. यह पूरा विवाद 2.77 एकड़ की जमीन के मालिकाना हक को लेकर है.

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