बाबरी मस्जिद विवाद: जाने 28 वें दिन की सुनवाई में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट में आज अयोध्या बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि वुवाद मामले में 28 वें दिन की सुनवाई हुई। सुनवाई की शुरुआत में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने गोपाल सिंह विशारद की ओर से दायर केस में 22 अगस्त 1950 को एडवोकेट कमिश्नर बशीर अहमद की ओर से पेश रिपोर्ट का हवाला दिया। धवन ने कहा कि इस रिपोर्ट में विवादित ढांचे पर मौजूद कई शिलालेख का जिक्र था। इन शिलालेखों के मुताबिक बाबर के निर्देश पर उनके कमांडर मीर बाकी ने ही बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था।
राजीव धवन ने आरोप लगाया कि इन शिलालेखों पर हिंदू पक्ष आपत्ति जता रहा है, लेकिन उनकी आपत्ति निराधार है। राजीव धवन ने अपनी जिरह में तीन शिलालेखों का हवाला देकर कहा कि इनमें कहा गया है कि बाबर के कमांडर मीर बाकी ने वहां बाबरी मस्जिद बनाई थी, इन शिलालेखों पर हिंदू पक्ष ने आपत्तियां उठाई जरुर हैं, लेकिन ये सही नही, क्योंकि इन शिलालेखों का जिक्र विदेशी यात्रियों के वर्णन और गजेटियरों में है।
हिन्दू पक्ष भी जब यात्रियों के वर्णन और गजेटियर पर बात करते हैं तो इन चीजों को कैसे नकार सकते हैं। धवन ने कहा कि हाईकोर्ट ने मामूली आधारों पर इन शिलालेखों को नकार दिया है, जो कि ठीक नहीं है। हाईकोर्ट का कहना है कि इनमें अंतर है, लेकिन बहुत मामूली है इस आधार पर इसे खारिज नही किया जा सकता। जफरयाब जिलानी ने कहा कि 1855 से पहले के किसी दावे पर भरोसा नहीं किया जा सकता
जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि कई पुरानी मस्जिदों में संस्कृत में भी कुछ लिखा हुआ मिला है। वो कैसे? धवन ने जवाब दिया कि क्योंकि बनाने वाले मजदूर कारीगर हिन्दू होते थे तो वे अपने तरीके से इमारत बनाते थे। बनाने का काम शुरू करने से पहले वो विश्वकर्मा और अन्य तरह की पूजा भी करते थे और काम पूरा होने के बाद यादगार के तौर पर कुछ लेख भी अंकित करते थे।
सुन्नी पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि 1992 में मस्जिद में गिराए जाने का मकसद हकीकत को मिटाया जाना था ,इसके बाद कोर्ट में दावे किए जा रहे हैं। धवन ने कहा कि सबकुछ बेवजह ध्वस्त किए जाने के इरादे से स्पष्ट होता है कि कोर्ट में दावे को सही साबित करने के लिए ऐसा किया गया. धवन ने कहा कि 1985 में सूट दाखिल किया। 1989 से वीएचपी राम शिला लेकर पूरे देश मे घूमने लगी।
राजीव धवन ने कहा कि वीएचपी ने पूरे देश का माहौल खराब किया और 1992 में विवादित ढांचे को गिरा दिया गया। वीएचपी ने पूरे देश में अपना आंदोलन चलाया। राजीव धवन ने कहा कि जन्मभूमि को न्यायिक व्यक्ति मानने के पीछे का मकसद यह है कि भूमि को कही शिफ्ट नही किया जा सकता है।
राजीव धवन ने कहा कि भगवान विष्णु स्वम्भू है और इसके सबूत मौजूद है, भगवन राम के स्वम्भू होने पर यह दलील दी जा रही है कि रात में भगवान राम किसी के ख्वाब में आये और उसको बताया कि उनका सही जन्मस्थान किस जगह पर है, क्या इसपर विश्वास किया जा सकता है। आज की सुनवाई पूरी हुई।
मुस्लिम पक्ष की तरफ सोमवार को 29 वें दिन भी बहस जारी रहेगी। सोमवार को संविधान पीठ की सुनवाई दोपहर 12 बजे से होगी। लेकिन सोमवार को बहस 5 बजे तक जारी रहेगी अभी तक बहस सुबह 10.30 से 4 बजे तक होती है।

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