आप को डर किस से है? अल्लाहु अकबर से, मदरसे से या फिर आतंक से?

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बलबीर पुंज ने किसी घटना का उदाहरण देते हुए लिखा है कि आतंकी अल्लाहु अकबर बोल रहे थे... इसलिए मदरसे की शिक्षा प्रणाली पर पुनर्विचार होना चाहिए। सर...अल्लाहु अकबर बोलने के लिए मदरसे में पढ़ना ज़रूरी थोड़े ही है.... बिलकुल वैसे ही जैसे जय श्रीराम कहने के लिए आरएसएस का सदस्य होना ज़रूरी नहीं। पहले तो ये स्पष्ट होना चाहिये कि आप को डर किस से है? अल्लाहुअकबर से, मदर्से से या फिर आतंक से? कोई नाथूराम ‘राम’ का नाम लेकर गांधी को मारे या कोई अब्दुल्लाह ‘अल्लाह’ का नाम लेकर अल्लाह के बंदे को मारे.... दोनों ही घटनायें आतंकी और निंदनीय है। रही बात शिक्षा प्रणाली पर पुनर्विचार की तो मदर्से की ही क्यों? देश की वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर भी पुनर्विचार होना चाहिये जहाँ से पढ़कर समाज में आने वाले छात्र हर प्रकार के अपराध में संलग्न हैं जैसा कि NCRB की रिपोर्ट कहती है। पुनर्विचार सिर्फ मदर्से की शिक्षा प्रणाली पर ही क्यों बलबीर जी..? आइए अपनी विचारधारा और वैचारिक पृष्ठभूमि से ही पुनर्विचार की शुरुआत करते हैं....
Masihuzzama Ansari

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