मणिपुर में शांति बहाली पर दिल्ली में बैठक हुई:केंद्र से मिले मैतेई-कुकी समुदाय के प्रतिनिधि; राज्य में 23 महीने से हिंसा जारी

केंद्र सरकार ने शनिवार को दिल्ली में मैतेई और कुकी समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक का मकसद दोनों समुदायों के बीच विश्वास बहाली और स्थायी शांति स्थापना था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सामुदायिक मेल-मिलाप की रणनीति पर चर्चा हुई।

 

मैतेई समुदाय की ओर से ऑल मणिपुर यूनाइटेड क्लब्स ऑर्गेनाइजेशन (AMUCO) और फेडरेशन ऑफ सिविल सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशन (FOCS) के 6 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जबकि कुकी समुदाय की ओर से 9 प्रतिनिधि शामिल हुए। इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर ए.के. मिश्रा केंद्र सरकार के वार्ताकार के तौर पर मौजूद रहे।

गृह मंत्री अमित शाह ने 3 अप्रैल को लोकसभा में कहा था कि मंत्रालय मैतेई और कुकी संगठनों के साथ पहले भी बातचीत कर चुका है और जल्द ही संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता मणिपुर में शांति बहाल करना है।

मई 2023 में मैतेई समुदाय को ST दर्जा देने के खिलाफ हुए आदिवासी एकजुटता मार्च के बाद हिंसा भड़क उठी थी। अब तक लगभग 250 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। 50 हजार से ज्यादा विस्थापित हैं।

राज्य में 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। विधानसभा को निलंबित किया गया था। पूर्व गृह सचिव रह चुके मणिपुर के नए राज्यपाल अजय कुमार भल्ला लोगों से मिलकर शांति बहाली के प्रयास कर रहे हैं।

जस्टिस बी.आर. गवई जज प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहें थे। मणिपुर में अस्थायी चिकित्सा सुविधाओं का वर्चुअल उद्घाटन भी किया था।
जस्टिस बी.आर. गवई जज प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहें थे। मणिपुर में अस्थायी चिकित्सा सुविधाओं का वर्चुअल उद्घाटन भी किया था।

राहत शिविरों की स्थिति दयनीय, बिना दवा-इलाज मरीज मर रहे

21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के 6 जजों की टीम ने मणिपुर का दौरा किया था। राहत शिविरों का दौरा किया था। टीम में जस्टिस कोटेश्वर सिंह, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस केवी विश्वनाथन शामिल थे।

उम्मीद जताई गई थी कि जजों के दौरे के बाद राहत शिविरों में रह रहे विस्थापितों की जिंदगी में आसानी आएगी, लेकिन दौरे के 15 दिन बीतने के बाद राहत शिविरों की हालत में बदलाव नहीं हुआ।

पहाड़ी जिले चुराचांदपुर के सद्भावना मंडप राहत शिविर में जजों से मिल चुके केनेडी हाओकिप ने भास्कर को बताया कि उस दौरे के बाद क्या योजना बनीं, हमें जिलाधिकारी की तरफ से कुछ नहीं बताया जा रहा। न्यायाधीशों को मैंने बताया था कि हम किस तरह की जिंदगी जी रहे हैं।

चुराचांदपुर के करीब 50 राहत शिविरों में 8 हजार लोग हैं, जिनमें कई बीमार हैं। मरीजों को देख रहे एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर भास्कर को बताया कि हमारे सरकारी अस्पताल में दवाएं खत्म हो चुकी हैं। यही हाल इंफाल का है।

जजों के दौरे के समय चुराचांदपुर में राहत शिविर में मौजूद लोगों का इलाज करती महिला डॉक्टर।
जजों के दौरे के समय चुराचांदपुर में राहत शिविर में मौजूद लोगों का इलाज करती महिला डॉक्टर।

मणिपुर के कुकी संगठन दिल्ली में बातचीत से नाराज

दौरे के समय सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई ने संवैधानिक तरीकों से सभी समस्याओं का समाधान करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था जब संवाद होता है तो समाधान आसानी से मिल जाता है।

इसके बाद बड़े बदलाव की उम्मीद की गई। अब मैतेई और कुकी समुदाय के बीच शांति का रास्ता निकालने की एक पहल हुई है। मैतेइयों के प्रमुख संगठन कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (कोकोमी) के एक नेता ने बताया कि शांति के लिए दोनों पक्षों को बातचीत करनी होगी।

थादोऊ कुकी जनजाति के कुछ लोगों ने बातचीत की पेशकश की है। कोकोमी के लोग अब अगले हफ्ते में हर मैतेई के घर जाकर इस संबंध में बात करेंगे। सभी लोगों की जो राय होगी, वही अंतिम निर्णय होगा। हालांकि, कुकी नेताओं का कहना है कि थादोऊ जनजाति के लोग दिल्ली में बैठकर मैतेइयों से बातचीत की पेशकश कर रहे हैं, उन्हें मणिपुर के कुकी संगठनों का समर्थन नहीं मिलेगा।

थदोऊ मणिपुर की मूल जनजातियों में से एक है जिसे भारत सरकार के 1956 के राष्ट्रपति आदेश के तहत स्वतंत्र अनुसूचित जनजातियों के रूप में मान्यता दी थी। जनसंख्या के हिसाब से थदोऊ मणिपुर में दूसरी सबसे बड़ी जनजाति हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार मणिपुर में थदोऊ की जनसंख्या 2 लाख 15 हजार है।

शाह बोले- मणिपुर में 4 महीने से शांति

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 3 अप्रैल को लोकसभा और राज्यसभा में मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे दोनों सदन से मंजूरी मिल गई। लोकसभा में शाह ने कहा- दिसंबर से मार्च तक बीते चार महीनों से मणिपुर में कोई हिंसा नहीं हुई है। राहत कैंपों में खाने-पीने, दवाइयों और मेडिकल सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।

दरअसल, मई 2023 से मणिपुर में हिंसा शुरू हुई थी। 9 फरवरी को तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन के इस्तीफा के बाद मणिपुर में 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लगाया गया। नियम के तहत 2 महीने के भीतर सरकार को दोनों सदनों से राष्ट्रपति शासन को लेकर परमिशन लेनी पड़ती है।

फ्री मूवमेंट का ऐलान के बाद बीते महीने मार्च में भड़की हिंसा

गृह मंत्री अमित शाह ने 1 मार्च को मणिपुर के हालात पर गृह मंत्रालय में समीक्षा बैठक की थी। गृह मंत्री ने 8 मार्च से मणिपुर में सभी सड़कों पर बेरोकटोक आवाजाही सुनिश्चित करने को कहा था। साथ ही सड़कें ब्लॉक करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

आदेश के बाद मणिपुर में कुकी और मैतेई बहुल इलाकों में हिंसा भड़क उठी थी। इंफाल, चुराचांदपुर, कांगपोकपी, विष्णुपुर और सेनापति को जोड़ने वाली सड़कों पर शनिवार को जैसे ही बसें चलनी शुरू हुईं, कुकी समुदाय के लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया।

सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में एक पुरुष प्रदर्शनकारी की मौत हो गई, जबकि 25 अन्य घायल हो गए। मृतक की पहचान लालगौथांग सिंगसिट (30 साल) के रूप में हुई है।

प्रदर्शनकारियों ने बसों को रोका, इसके बाद हिंसा भड़क गई।
प्रदर्शनकारियों ने बसों को रोका, इसके बाद हिंसा भड़क गई।

 

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