यहाँ अब मेरे राज़दान और भी है
सितारों से आगे जहाँ और भी हैं
अभी इश्क़ के इम्तेहाँ और भी हैं।।
ताही ज़िंदगी से नहीं यह फिज़ाएँ
यहाँ सैंकड़ों कारवाँ और भी हैं।।
अगर खो गया एक नशेमन तो किया गम
मक़ामात-ऐ-आह-ओ-फ़िगन और भी हैं।।
तू शाहीन है , परवाज़ है काम तेरा
तेरे सामने आसमान और भी हैं।।
इसे रोज़-ओ-शब में उलझ कर न रह जा
कह तेरे ज़मान-ओ-मकाँ और भी हैं।।
(अल्लामा इक़बाल)

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