भारतीय उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय प्रगति : अध्ययन

हाल ही में प्रकाशित एक शोध लेख “Assessing Gender Trends in Accessibility and Enrolment in Higher Educational Institutions in India” में भारत की उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। यह लेख जर्नल ऑफ गवर्नेंस एंड पब्लिक पॉलिसी (वॉल्यूम 15, अंक 2, जुलाई–दिसंबर 2025) में प्रकाशित हुआ है।

इस अध्ययन के लेखक डॉ. अबरार अहमद (इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली), डॉ. परवीन क़मर (मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद) और डॉ. अब्सार अहमद (बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची) हैं। इस शोध में भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं के नामांकन के रुझानों का विश्लेषण किया गया है।

अध्ययन में ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) के 2010–11 से 2021–22 तक के आंकड़ों का उपयोग किया गया है। इस अवधि में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में तेज़ी से विस्तार हुआ और महिलाओं की भागीदारी में लगातार वृद्धि देखी गई।

अध्ययन के अनुसार, इस अवधि में कुल नामांकन 2.75 करोड़ से बढ़कर 4.33 करोड़ छात्रों तक पहुंच गया। महिलाओं का नामांकन 1.2 करोड़ से बढ़कर 2.07 करोड़ हो गया, जो लगभग 72 प्रतिशत की वृद्धि है, जबकि पुरुष छात्रों के नामांकन में 46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2021–22 तक कुल नामांकन में महिलाओं की हिस्सेदारी 47.82 प्रतिशत हो गई।

अध्ययन में लैंगिक संतुलन की दिशा में उत्साहजनक प्रगति भी दर्ज की गई है। जेंडर पैरिटी इंडेक्स (Gender Parity Index) 2010–11 में 0.78 से बढ़कर 2021–22 में 0.92 हो गया। इसी तरह 18–23 वर्ष आयु वर्ग में महिलाओं का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) 17.9 से बढ़कर 28.5 हो गया, जो हाल के वर्षों में पुरुषों के GER से थोड़ा अधिक है। कुल मिलाकर GER 28.4 तक पहुंच गया, जो उच्च शिक्षा के अवसरों के विस्तार को दर्शाता है।

अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि महिलाओं के नामांकन की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर 5.1 प्रतिशत रही, जबकि पुरुष छात्रों के लिए यह 3.5 प्रतिशत थी। इस अवधि में कुल नामांकन में महिलाओं की हिस्सेदारी 43.76 प्रतिशत से बढ़कर 47.82 प्रतिशत हो गई। राज्यों में केरल और तेलंगाना महिलाओं की भागीदारी के मामले में उल्लेखनीय प्रदर्शन कर रहे हैं। देश में स्थापित 17 महिला विश्वविद्यालयों की उपस्थिति ने भी शिक्षा तक पहुंच और अवसरों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इन सकारात्मक रुझानों को बढ़ावा देने में कई राष्ट्रीय पहलों का योगदान रहा है, जिनमें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA), सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप, सक्षम स्कॉलरशिप योजना और नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा किए गए संस्थागत प्रयासों ने भी समावेशी शिक्षा को मजबूत किया है और महिलाओं की निरंतर भागीदारी को प्रोत्साहित किया है।

शोध में इस बात पर जोर दिया गया है कि उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सामाजिक प्रगति, आर्थिक विकास और कार्यबल में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। उच्च शिक्षा तक बेहतर पहुंच से जीवन स्तर में सुधार और नेतृत्व तथा निर्णय-निर्माण की भूमिकाओं में महिलाओं की अधिक भागीदारी भी संभव होती है। यह विकास सतत विकास लक्ष्य (SDG-4) के उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य सभी के लिए समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है।

लेखकों का कहना है कि नीतिगत समर्थन, संस्थागत विकास और शैक्षिक पहलों की निरंतरता भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में महिलाओं की भागीदारी को और मजबूत करेगी तथा संतुलित विकास को बढ़ावा देगी।


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https://www.researchgate.net/publication/400780570

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