‘वोट चोरी’ के आरोपों पर मोदी सरकार को घेरा, चुनाव आयोग के इस्तीफे की मांग
विशेष राजनीतिक रिपोर्ट | 1 नवंबर 2026 | नई दिल्ली
नई दिल्ली: दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को INDIA गठबंधन की ‘चलो दिल्ली’ रैली आयोजित की गई। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, नेशनल कॉन्फ्रेंस और वामपंथी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने एक मंच से केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। रैली का मुख्य मुद्दा कथित वोट चोरी, मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही रहा।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को घेरा
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना विपक्ष की पहली मांग है। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की बात कही।
उन्होंने मतदाता सूची से करोड़ों नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाते हुए इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती बताया। The Indian Express +1
ममता बनर्जी का हमला
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया की आलोचना की। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधते हुए ‘वैनिश कुमार’ जैसी टिप्पणी की। Telegraph India +1
अखिलेश यादव ने बताया लोकतंत्र की हल्दीघाटी
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने रामलीला मैदान को लोकतंत्र की ‘हल्दीघाटी’ बताते हुए मतदाता सूची में नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति और आगामी चुनावों के संदर्भ में विपक्षी एकजुटता पर जोर दिया। Telegraph India +1
खड़गे और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का आह्वान किया। वहीं तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाते हुए अपने भाषण में रामायण और महाभारत का उल्लेख किया। Telegraph India +1
भीड़ को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
रैली में 10 लाख लोगों के जुटने की उम्मीद आयोजकों ने जताई थी, जबकि दिल्ली पुलिस का अनुमान लगभग 50 हजार लोगों का था। रैली के बाद कांग्रेस ने इसे व्यापक जनभागीदारी वाला आयोजन बताया। दूसरी ओर भाजपा ने खाली कुर्सियों और मैदान के कुछ हिस्सों में कम उपस्थिति का हवाला देकर इसे कमजोर आयोजन बताया।
रैली में शामिल लोगों की स्वतंत्र रूप से प्रमाणित अंतिम संख्या उपलब्ध नहीं है। इसलिए दोनों पक्षों के दावों को राजनीतिक बयान के रूप में देखना चाहिए। India Today +2
एशिया टाइम्स का विश्लेषण
रामलीला मैदान की रैली का महत्व केवल भीड़ की संख्या में नहीं, बल्कि विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं के एक मंच पर आने में भी है। विपक्ष ने मतदाता अधिकार, चुनावी पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही को साझा राजनीतिक अभियान का मुद्दा बनाया है।
हालांकि, इस एकजुटता को स्थायी राजनीतिक ताकत में बदलना INDIA गठबंधन के सामने बड़ी चुनौती होगी। रैली की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि विपक्ष अपने आरोपों को कितने ठोस प्रमाणों के साथ आगे बढ़ाता है और मतदाताओं के बीच कितना प्रभावी अभियान चला पाता है।
रामलीला मैदान में विपक्ष ने अपनी आवाज बुलंद की है। अब देखना यह है कि यह आवाज देश के गांवों, कस्बों और मतदान केंद्रों तक कितनी पहुंचती है।
संबंधित समाचार और तस्वीरें
- द टेलीग्राफ – रैली की 10 तस्वीरों का विशेष संग्रह
- द इंडियन एक्सप्रेस – राहुल गांधी का रामलीला मैदान में भाषण
- एनडीटीवी – रैली का पूरा घटनाक्रम और भाजपा की प्रतिक्रिया
- रॉयटर्स – रैली और चुनाव आयोग पर विवाद की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट
- रेडिफ – रैली की तस्वीरें और पीटीआई की रिपोर्ट
नोट : यह रिपोर्ट विभिन्न मीडिया संस्थानों में प्रकाशित ख़बरों के आधार पर तैय्यार की गई है, एशिया टाइम्स ने इसे सिर्फ एडिट किया है
