भारत से गरीबी और भुखमरी मिटाने के उपाय

By: Inni Chauhan

“अगर आपके पास ज़रूरत से ज़्यादा है, तो उसे उनसे शेयर कीजिए जिन्हें इसकी सबसे अधिक ज़रूरत है।” यह बात मोटिवेशनल स्पीकर संदीप महेश्वरी ने कही है।

मैं आपको किसी प्रकार की किताबी परिभाषा नहीं देना चाहती हूं, क्योंकि हर कोई जानता है कि गरीबी और भुखमरी क्या है। ये ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें हम अपने जीवन में हर दिन देखते हैं। गरीबी केवल आय में कमी या संसाधनों की अनुमति से बहुत अधिक है।


इसमें शिक्षा, सामाजिक भेदभाव और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेने की अक्षमता आदि शामिल हैं। हर जगह से गरीबी को समाप्त करना 2030 सतत विकास एजेंडा का पहला लक्ष्य है। मैं इस लेख मैं चुनौती या मुद्दे के बारे में बात नहीं करूंगी, बल्कि इस बात पर ध्यान दूंगी कि दोनों मुद्दों को कैसे दूर किया जाए?


महत्वपूर्ण कदम

  • शिक्षा, दुनियाभर में गरीबी उन्मूलन का सबसे महत्वपूर्ण कारक है। एक व्यक्ति को भी शिक्षित करना यानि कि उसके पूरे परिवार को शिक्षित करना।
  • दूसरों के लिए दया और सहानुभूति रखते हुए उन्हें महसूस करना।
  • अक्सर भारतीय शादियों में हम देखते हैं कि शादी के बाद बहुत सारा भोजन बर्बाद हो जाता है, जिन्हें बस फेंक दिया जाता है। ऐसे में पहले से ही किसी संगठन के साथ टाईअप करना बेहतर कदम हो सकता है, क्योंकि इस आयोजन के बाद वे सभी बचे हुए भोजन को वंचितों को खिला सकते हैं।
  • ज़रूरतमंदों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि या अन्नपूर्णा योजना या मध्याह्न भोजन योजना जैसी कई सरकार की योजनाएं हैं लेकिन समस्या यह है कि लोग उनके बारे में जागरूक नहीं हैं। यदि हमें मूलभूत सुविधाओं को प्राप्त करने का पर्याप्त अधिकार प्राप्त है, तो यह हमारा नैतिक कर्तव्य है कि हम उन लोगों को जागरूक करें जो शिक्षित नहीं हैं।
  • स्थानीय ब्रांड्स का समर्थन करें, क्योंकि यह हमारी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा और बेरोज़गारों के लिए अधिक नौकरियां पैदा करेगा।
  • सरकार को अपनी आपूर्ति श्रृंखला के भीतर खाद्य पदार्थों को बर्बाद करने वाली कंपनियों को दंडित करना चाहिए और खाद्य वस्तुओं के रिसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • निजी क्षेत्र भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य कि दुर्घटना और अपव्यय के संकट को उजागर करना निजी कंपनियों के लिए 700 बिलियन डॉलर का अवसर है।
  • सोशल इक्विटी और जेंडर इन्क्लूशन को सुनिश्चित करने और कृषि व्यवसाय को अधिक लिंग-अनुकूल बनाना बहुत महत्वपूर्ण है।
  • कृषि बाज़ारों के साथ शामिल की गई कोल्ड चेन की प्रणाली को फसल के बाद के नुकसान को कम करने के लिए विस्तारित किया जाना चाहिए।
  • जनसंख्या नियंत्रण हर दूसरी समस्या का मूल कारण है। चाहे वह गरीबी हो या भूखमरी आदि, क्योंकि भारत में संसाधन सीमित और चाहतें असीमित हैं।

इसलिए, बदलाव लाने के लिए किसी का इंतजार ना करें। आप जहां हैं, वहीं से शुरू करें। अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी पूरी करें दिखावा करने के लिए नहीं, बल्कि अपनी संतुष्टि के लिए।

आप क्यों? क्योंकि आपसे बेहतर कोई नहीं है। अब क्यों? क्योंकि कल बहुत जल्दी नहीं है।


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