लखनऊ. पश्चिमी उत्तरप्रदेश की आठ सीटों पर लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में 18 अप्रैल को मतदान होना है। 2014 में इन 8 सीटों पर भाजपा का कब्जा था। इस बार समीकरण कुछ अलग है। ऐसे में बड़े नेताओं पर अपना गढ़ बचाने की चुनौती रहेगी।
मथुरा को भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है और यहां से पिछले 5 सालों में हेमा मालिनी एक बड़ा नाम बन कर उभरी हैं। एक बार फिर वह भाजपा के टिकट पर मैदान में है। वहीं कांग्रेस नेता प्रदीप माथुर भी मथुरा में अच्छा दबदबा रखते हैं। मथुरा विधानसभा से 4 बार विधायक रहे हैं।
लोकसभा चुनावों में क्या रही स्थिति
| साल |
पार्टी |
| 2004 |
कांग्रेस |
| 2009 |
रालोद |
| 2014 |
भाजपा |
विधानसभा चुनावों में क्या रही स्थिति
| साल |
पार्टी के हिस्से में सीट |
| 2007 |
बसपा-2, रालोद-2, कांग्रेस-1 |
| 2012 |
रालोद-3, बसपा-1, कांग्रेस-1 |
| 2017 |
भाजपा-4, बसपा-1 |
क्या है चुनौती: हेमा के खिलाफ स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा उठाया जा रहा है। साथ ही उन पर सिर्फ चुनावों के समय आमजनों से मिलने की बात कही जा रही है। उनके खिलाफ गठबंधन के खाते से रालोद के टिकट पर कुंवर नरेन्द्र सिंह और कांग्रेस से महेश पाठक को उतारा गया है।
अलीगढ़ लोकसभा सीट
इस सीट को भाजपा के सीनियर लीडर और अब राज्यपाल कल्याण सिंह का गढ़ माना जाता है। कल्याण सिंह लोध वोटर्स के बड़े नेता माने जाते हैं। 2017 में उन्होंने अपने पोते संदीप सिंह को भी विधानसभा पहुंचाया है, जोकि योगी कैबिनेट में राज्यमंत्री भी हैं।
लोकसभा में क्या रही स्थिति
| साल |
पार्टी |
| 2004 |
कांग्रेस |
| 2009 |
बसपा |
| 2014 |
भाजपा |
विधानसभा चुनावों में क्या रही स्थिति
| साल |
पार्टी के हिस्से में सीट |
| 2007 |
भाजपा-2, बसपा-2, रालोद-1, सपा-1 |
| 2012 |
सपा-4, रालोद-3 |
| 2017 |
भाजपा-7 |
क्या है चुनौती: कल्याण सिंह से मनमुटाव के बाद अब वर्तमान सांसद और भाजपा कैंडिडेट सतीश गौतम उन्हें मानाने में कामयाब हो गए हैं। लेकिन इस सीट से चार बार सांसद रही शीला गौतम के बेटे ने यहां से टिकट मांगा था, लेकिन उनकी नहीं चली। ऐसे में गौतम उन्हें मानाने में लगे हैं। एएमयू को लेकर भाजपा सांसद पिछले एक साल से मीडिया की सुर्खियों में छाए रहे हैं। अलीगढ़ सीट बीएसपी के खाते में है जबकि कांग्रेस उम्मीदवार बिजेंद्र सिंह है जोकि 5 बार विधायकी जीत चुके हैं. उनके आने से मामला त्रिकोणीय हो गया है।
फतेहपुर सीकरी लोकसभा
2009 में यह सीट अस्तित्व में आई तो इस पर बसपा के कद्दावर नेता रामवीर उपध्याय का दबदबा बना। 2009 में रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय चुनाव जीतकर संसद पहुंची तो वहीं, सपा से भाजपा में आए राजा अरिदमन सिंह का नाम भी इस सीट पर बड़े नेताओं में शुमार होता है।
लोकसभा चुनावों में क्या रही स्थिति
| साल |
पार्टी |
| 2009 |
बसपा |
| 2014 |
भाजपा |
विधानसभा चुनावों में क्या रही स्थिति
| साल |
पार्टी के हिस्से में सीट |
| 2012 |
बसपा-3, सपा-1 |
| 2017 |
भाजपा-4 |
क्या है चुनौती: इस सीट पर भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद का टिकट काट कर राजकुमार चाहर को खड़ा किया है। 2009 में इस सीट पर हार का सामना कर चुके कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर भाजपा को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। गठबंधन से बसपा के टिकट पर भगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित हैं। हालांकि वह मुकाबले में कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। भाजपा को एंटीइनकमबेंसी की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
आगरा लोकसभा
आगरा भले ही दलितों की राजधानी कहलाती है, लेकन माना इसे भाजपा का गढ़ जाता है। इस समय आगरा में भाजपा के रामशंकर कठेरिया बड़े नेता माने जाते हैं। हालांकि 2014 में आगरा सीट जीतने के बाद भी भाजपा ने इस बार रामशंकर कठेरिया को इटावा से टिकट दिया है। यहां भाजपा से योगी कैबिनेट में मंत्री एसपी बघेल को टिकट दिया गया है। जबकि गठबंधन की तरफ से बसपा से मनोज सोनी को टिकट दिया गया है।
लोकसभा चुनावों में क्या रही स्थिति
| साल |
पार्टी |
| 2004 |
सपा |
| 2009 |
भाजपा |
| 2014 |
भाजपा |
विधानसभा चुनावों में क्या रही स्थिति
| साल |
पार्टी के हिस्से में सीट |
| 2007 |
बसपा-6, भाजपा-2, जनमोर्चा-1 |
| 2012 |
बसपा-3, भाजपा-2 |
| 2017 |
भाजपा-5 |
क्या है चुनौती: भाजपा ने भले ही यहां से अपना प्रत्याशी बदल दिया है, लेकिन एंटी इनकम्बेंसी का फायदा उठाने में विपक्ष लगा हुआ है। कई बड़े वादे पूरे नहीं हुए हैं। जिसके चलते भाजपा प्रत्याशी की राह मुश्किल हो रही है। यहां सीधी लड़ाई भाजपा और बसपा में ही है।
अमरोहा लोकसभा
अमरोहा जिला सपा का गढ़ माना जाता है। सपा से यहां महबूब अली और कमाल अख्तर का बोलबाला है। जबकि कांग्रेस से राशिद अल्वी भी बड़े नेताओं में शुमार होते हैं। भाजपा के चेतन चौहान भी इलाके में अपना दबदबा रखते हैं। चेतन चौहान योगी कैबिनेट में मंत्री भी हैं।
लोकसभा चुनावों में क्या रही स्थिति
| साल |
पार्टी |
| 2004 |
निर्दल |
| 2009 |
रालोद |
| 2014 |
भाजपा |
विधानसभा चुनावों में रही स्थिति
| साल |
पार्टी के हिस्से में सीट |
| 2007 |
सपा-1, भाजपा-1, बसपा-1 |
| 2012 |
सपा-4 |
| 2017 |
सपा-1, भाजपा-3 |
क्या है चुनौती: अमरोहा सीट गठबंधन की तरफ से बसपा के खाते में गयी है। कुंवर दानिश अली बगल के जिले हापुड़ के रहने वाले हैं और राजनैतिक परिवार से आने की वजह से इलाके में पकड़ है। गठबंधन की वजह से सपा के वोट भी मिलने की गुंजाइश है। जबकि भाजपा कैंडिडेट कंवर सिंह तंवर हरियाणा से आते हैं। विरोधी उन पर बाहरी प्रत्याशी होने का माहौल बना रहे हैं। मुस्लिम बाहुल्य इस सीट पर अबकी बार उन्हें बसपा कैंडिडेट से चुनौती मिल सकती है।
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