बसपा के लिए चुनौती बनती नजर आ रही है चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी

यूपी विधानसभा उप चुनाव का परिणाम अब सबके सामने है। यह पूरी तरह से साफ हो गया है कि भाजपा का विकल्प बनने के लिए विरोधियों को और मेहनत करनी होगी। खासकर बसपा को। पश्चिमी यूपी की एक सीट बुलंदशहर में बसपा को आजाद समाज पार्टी ने बड़ा नुकसान पहुंचाया है।

आजाद समाज पार्टी भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर ने बनाई है। पहली बार विधानसभा उपचुनाव में एक सीट पर उम्मीदवार उतार कर आजाद समाज पार्टी ने सभी को चौंका दिया है। सियासी जानकारों का कहना है कि बसपा ने अगर इसकी काट न निकाली तो यह आगे चलकर मुसीबत भी बन सकती है। वजह, चंद्रशेखर बसपा से नाराज होने वालों को अपने साथ जोड़ रहे हैं।

मायावती के विरोध में चंद्रशेखर
चंद्रशेखर ने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) बनाई है। चंद्रशेखर युवा हैं और दलित समाज के हितों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वह भी विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारियों में लगे हैं। पश्चिमी यूपी में अनुसुचित जाति में जाटव जाति का दबदबा है। मायावती की इस वोट बैंक पर अच्छी पकड़ मानी जाती रही है लेकिन विधानसभा उपचुनाव में आजाद समाज पार्टी ने बुलंदशहर सीट पर उतरे मो. यासीन ने 13530 वोट पाकर चौंकाने वाला काम किया है। यह वोटिंग प्रतिशत भले ही 6.69 हो लेकिन बसपा के माथे पर बल लाने के लिए काफी है।

सीधे तौर पर देखा जाए तो इसे बसपा का ही वोट बैंक कटा हुआ माना जाएगा। बसपा को अगर यह वोट मिलता तो भाजपा से जीत का अंतर 8172 हो जाता या यूं कहें कि आजाद समाज पार्टी का उम्मीदवार न उतरता तो चुनावी परिणाम कुछ और होता। बसपा उम्मीदवार मो. यूसुफ यहां दूसरे स्थान पर रहे।

अगड़ों-मुस्लमानों का नहीं मिला साथ
विधानसभा उपचुनाव परिणाम को देखा जाए तो बसपा को अगड़ों के साथ मुस्लमानों का भी साथ नहीं मिला। बसपा ने दो ब्राह्मण के साथ दो मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। उन्होंने उपचुनाव वाली सीटों पर ब्राह्मण नेता सतीश चंद्र मिश्र और मुस्लिम नेता मुनकाद अली और शमसुद्दीन राइनी को कमान सौंपी, लेकिन अगड़ों और मुस्लिमों का जैसा साथ मिलने की उम्मीद थी, वह नहीं मिला। बसपा विधानसभा चुनाव 2007 के सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर लड़ने की दिशा में काम कर रही थी। उपचुनाव परिणाम के बाद अब उसे इस पर भी गंभीरता से सोचना होगा।

 

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