राष्ट्रवाद के नाम पर उन्माद के समर्थकों ने पहलगाम हमले के बहाने मुसलमानों, शहीद की पत्नी, सेना अधिकारी और विदेश सचिव को बनाया निशाना

नई दिल्ली | पहलगाम हमले के बाद देश में कई और अप्रत्याशित हमले हुए जो देश के लोगों पर देश के ही लोगों के द्वारा किए गए. इनमे से कुछ हमले शारीरिक थे तो कुछ मानसिक तौर पर ऑनलाइन किए गए. यह हमले दक्षिणपंथी समूह ने मुसलमानों, शहीद की पत्नी, भारतीय सेना में अधिकारी कर्नल सोफिया क़ुरैशी और विदेश सचिव को निशाना बनाया गया.

इन हमलों की ज़द में पहले मुसलमान आए जिनपर अब तक लगभग 200 के क़रीब छोटे या बड़े हमले हो चुके हैं जिसपर मानवाधिकार संगठन APCR ने विस्तृत रिपोर्ट जारी की है. फिर पहलगाम हमले के पीड़ितों को निशाना बनाया गया जिनमें मुख्य रूप से शहीद लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी नरवाल शामिल हैं जिन्हें शांति बनाने की अपील करने पर ‘पाकिस्तान समर्थक’ कहा गया.

दक्षिणपंथी समूह यहीं पर ख़ामोश नहीं हुए बल्कि कोई कार्रवाई नहीं होने पर उनके हौसले बुलंद थे और इसके बाद उन्होंने देश के कई आला अधिकारियों पर हमले किए जिनमें मुख्य रूप से भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया क़ुरैशी और विदेश सचिव के रूप में कार्यरत विक्रम मिसरी और उनके परिवार हैं जिन्हें निशाना बनाया गया.

गौरतलब हो कि यह सभी हमले प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक ख़ास विचारधारा के लोगों के द्वारा ही किए गए जिन्हें सत्ता का संरक्षण प्राप्त रहा है. इन ऑनलाइन हमलावरों में केंद्र की सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं सहित पार्टी के नेता, और मंत्री तक शामिल पाए गए हैं.

इस प्रकार के हमलों को लेकर देश भर में आलोचना की गई है और यहां तक कि एक भाजपा मंत्री की अशोभनीय टिप्पणी पर संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने तत्काल FIR दर्ज करने का आदेश दिया है.

कर्नल सोफिया कुरैशी को मध्य प्रदेश के भाजपा मंत्री विजय शाह ने “आतंकवादियों की बहन” कहा:

भारतीय सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर मध्य प्रदेश के भाजपा मंत्री विजय शाह द्वारा की गई विवादित टिप्पणी के बाद देशभर में नाराज़गी देखी गई.

भाजपा नेता और मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार में मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान दिया था जिसपर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को सख्त रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान लिया और 4 घंटे में भाजपा मंत्री विजय शाह के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया.

मंत्री विजय शाह ने कर्नल कुरैशी को “आतंकवादियों की बहन” कहकर संबोधित किया, जिससे लोगों में आक्रोश और नाराज़गी देखी गई. इस बयान की विपक्षी दलों, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी ने कड़ी निंदा की.

तृणमूल कांग्रेस ने इस बयान को “मिसोजिनिस्टिक और सांप्रदायिक” बताते हुए मंत्री को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की. कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री से मंत्री के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की.

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में बीजेपी सरकार के मंत्री विजय शाह की आपत्तिजनक टिप्पणी पर अदालत के आदेश के बाद दर्ज की गई प्राथमिकी को लेकर गुरुवार को पुलिस को फटकार लगाई और कहा कि यह राज्य सरकार की ओर से ‘घोर धोखाधड़ी’ जैसा है.

अदालत ने कहा कि पुलिस को प्राथमिकी में कथित अपराधों के व्यापक विवरण शामिल होने चाहिए और यह उच्च न्यायालय के बुधवार के आदेश के अनुरूप होना चाहिए.

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा कि वह जांच में हस्तक्षेप किए बिना मामले की निगरानी करेगा. अदालत ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए 16 जून की तारीख तय की है. न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन एवं न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने पिछले आदेश के अनुपालन के मद्देनज़र उनके समक्ष रखे गए मामले में कहा कि मौजूदा स्वरूप में प्राथमिकी को चुनौती दिए जाने पर रद्द किया जा सकता है.

कौन हैं सोफिया क़ुरैशी ?

गौरतलब हो कि कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की एक प्रतिष्ठित अधिकारी हैं, जिन्होंने हाल ही में “ऑपरेशन सिंदूर” में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनके पिता भी बांग्लादेश युद्ध के अनुभवी सैनिक हैं, और उनका परिवार लंबे समय से देशसेवा में लगा हुए है.

सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज ने भी भाजपा मंत्री के इस बयान की आलोचना की है और इसे भारतीय सेना और महिलाओं के प्रति अपमानजनक बताया है.

विवाद के बढ़ने पर भाजपा ने डैमेज कंट्रोल की कोशिशें शुरू की और इस क्रम में राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने मंत्री से रिपोर्ट मांगी और उन्हें दिल्ली तलब किया. मंत्री शाह ने अपने बयान पर खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगी और कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया. मंत्री ने 2 बार अलग-अलग समय में सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर माफ़ी मांगी है.

इस बयान को लेकर लोगों की तीखी प्रतिक्रिया के बाद बैकफुट पर आई के नेताओं ने कर्नल कुरैशी के घर जाकर अपना समर्थन व्यक्त किया और पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह सेना और राष्ट्रीय सेवा का सम्मान करती है.

भाजपा के मंत्री का यह विवादित बयान केवल राजनीतिक असहमति को ही नहीं दर्शाता है, बल्कि यह भी उजागर करता है कि कैसे व्यक्तिगत पहचान के आधार पर देश में लोगों पर टिप्पणियाँ की जा रही हैं और इन टिप्पणियों को सामान्य बनाने की कोशिश भी की जा रही है.

शहीद लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी नरवाल को ‘पाकिस्तान समर्थक’ कहा गया:

पहलगाम आतंकवादी हमले में मारे गए 26 लोगों में से लेफ्टिनेंट विनय नरवाल भी शामिल थे. उनकी पत्नी हिमांशी नरवाल को शांति बनाए रखने की अपील करना भारी पड़ा और उन्हें ऑनलाइन ट्रोल का शिकार होना पड़ा और उन्हें “राष्ट्र द्रोही” से लेकर ‘पाकिस्तान समर्थक’ तक कहा गया.

अपनी शादी के चंद दिनों बाद कश्मीर में हनीमून के दौरान अपने पति को खो चुकी हिमांशी ने 22 अप्रैल को हुए हमले के बाद लोगों से मुसलमानों या कश्मीरियों को बदनाम न करने का आग्रह किया था. इस हमले में ज़्यादातर आम नागरिक मारे गए थे. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था, “हम नहीं चाहते कि लोग मुसलमानों और कश्मीरियों के पीछे पड़ें.”

एक मई को विनय नरवाल का 27वां जन्मदिन था. इस मौके पर उनके परिवारवालों ने उनकी याद में ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया था.

इस मौके पर ब्लड डोनेशन करने पहुंची लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी नरवाल ने एएनआई से बात करते हुए कहा, “हम नहीं चाहते कि लोग मुसलमानों या कश्मीरियों के ख़िलाफ़ जाएं. हम शांति चाहते हैं और केवल शांति. बेशक, हम न्याय चाहते हैं, जिन्होंने ग़लत किया है उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए.”

शांति और संयम के उनके आह्वान को सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा, कुछ उपयोगकर्ताओं ने उनकी टिप्पणियों और व्यक्तिगत मान्यताओं को लेकर उन्हें निशाना बनाया.

जल्द ही उनके पोस्ट और वीडियो पर नफरत भरे कमेन्ट, व्यक्तिगत हमले और सांप्रदायिक गालियों से भरी टिप्पणियाँ देखने को मिली. गुमनाम अकाउंट्स ने उन्हें लगातार निशाना बनाना शुरू कर दिया और उन्हें ‘राष्ट्र-विरोधी’ करार दिया, उन पर दुश्मन से सहानुभूति रखने का आरोप लगाया गया, उनकी देशभक्ति और उनके चरित्र पर भी सवाल उठने लगे.

कुछ लोगों ने तो उनके शब्दों और इरादों को तोड़-मरोड़कर पेश किया, कटे हुए स्क्रीनशॉट और संपादित क्लिप शेयर करके लोगों में आक्रोश पैदा किया. उन्हें ‘पाकिस्तान समर्थक’ भी कहा गया.

विदेश सचिव विक्रम मिसरी और उनके परिवार के ख़िलाफ अपमानजनक टिप्पणी:

पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष संबंधी सूचनाएं आधिकारिक रूप से देश के विदेश सचिव के रूप में विक्रम मिसरी लोगों तक पहुंचा रहे थे. मगर भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम की सूचना जारी करने के बाद उन्हें और उनके परिवार को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया गया और उन्हें अपमानजनक टिप्पणी का सामना करना पड़ा.

विदेश सचिव विक्रम मिसरी को आक्रामक, अभद्रता और धमकियों का सामना करना पड़ा. उनकी बेटी की निजी जानकारी को सार्वजनिक कर दिया गया.

सवाल है कि जिन लोगों ने विदेश सचिव और उनके परिवार के खिलाफ आनलाइन दुर्व्यवहार किया उनके विरुद्ध कोई कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की गई. इन्हीं लोगों ने पहलगाम में मारे गए नौसेना अधिकारी की पत्नी के खिलाफ भी अशोभन टिप्पणियां की थी.

इन घटनाओं के जोखिमों को देखते हुए ही कई नेताओं और पूर्व राजनयिकों ने एकजुट होकर विदेश सचिव का समर्थन किया है. राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस पर गहरी चिंता जताई है.

हालांकि अब तक यह रिपोर्ट सामने नहीं आई कि किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई का कोई क़दम उठाया गया हो.

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री और उनके परिवार, खासकर उनकी बेटी को सोशल मीडिया पर निशाना बनाए जाने को लेकर कहा है कि विदेश सचिव और उनकी बेटी की निजी जानकारियां साझा करना बेहद गैर जिम्मेदाराना हरकत है.

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने एक आधिकारिक बयान जारी कर भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर की पुष्टि की थी. उनका यह बयान सामने आते ही लोग उन्हें ट्रोल करने लगें. यहां तक कि लोगों ने विदेश सचिव और उनकी बेटी का निजी नंबर भी सार्वजनिक कर दिया जिसके बाद महिला आयोग ने इस पर संज्ञान लिया है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में NCW ने लिखा, “राष्ट्रीय महिला आयोग भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री के परिवार, खासकर उनकी बेटी के खिलाफ ऑनलाइन किए गए दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा करता है. विदेश सचिव की बेटी के निजी कॉन्टैक्ट डिटेल्स शेयर करना एक बेहद गैर-जिम्मेदाराना कृत्य है. यह निजता का गंभीर उल्लंघन है और उनकी सुरक्षा के लिए भी खतरा है.”

भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) एसोसिएशन ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विक्रम मिस्री के साथ एकजुटता दिखाई है. एसोसिएशन ने कहा, “आईएएस एसोसिएशन विक्रम मिस्री और उनके परिवार के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है. ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करने वाले सिविल सेवकों पर अनुचित व्यक्तिगत हमले बेहद निंदनीय हैं. हम सार्वजनिक सेवा की गरिमा को बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं.”

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी विदेश सचिव विक्रम मिस्री के खिलाफ हो रही ट्रोलिंग की निंदा कर चुके हैं.

इन सुनियोजित हमलों पर सरकार ने संज्ञान क्यों नहीं लिया ?

हैरत की बात यह है कि इन सुनियोजित हमलों पर और महिलाओं और सेना अधिकारियों पर अभद्र टिप्पणियों पर कोर्ट ने तो संज्ञान लिया लेकिन सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की?

लगभग 200 हमले मुसलमानों पर हुए, शहीद की विधवा पर अपमानजनक टिप्पणी की गई, भाजपा मंत्री द्वारा धर्म के आधार पर निशाना बनाते हुए सेना अधिकारी को आतंकवादियों की बहन क़रार दिया गया, और विदेश सचिव विक्रम मिस्री और उनकी बेटी को टारगेट करते हुए उनकी निजी जानकारी सार्वजनिक कर दी गई.

इन सभी हमलों और ऑनलाइन टारगेट पर सरकार ने अरोपियों पर कार्रवाई के लिए कोई भी गंभीर प्रयास नहीं किए और न ही कोई ठोस क़दम उठाया.

क्या इन ऑनलाइन ट्रोलर्स को सरकारी संरक्षण प्राप्त है?

पहलगाम हमले के बाद देश के नागरिकों, शहीद की पत्नियों, सेना अधिकारियों और विदेश सचिव पर हुए हमलों में, उनकी भाषा में, उनके शब्दों के चयन में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि इन सभी को निशाना बनाने वाले समूह एक ही विचारधारा के प्रतीत होंते हैं. सभी का एप्रोच दक्षिणपंथी है और सभी अपने स्वाभाव में राष्ट्रवाद के नाम पर उन्माद के समर्थक नज़र आते हैं.

इन सभी पर कोई कार्रवाई न होना यह ज़ाहिर करता है कि केंद्र की दक्षिणपंथी सरकार अपने उन्मादी कार्यकर्ताओं पर नर्म रुख अपना रही है और उन्हें अगले असाइनमेंट और ऑनलाइन हमलों के लिए प्रेरित कर रही है.

महिला आयोग की कार्रवाई बेमाना:

राष्ट्रीय महिला आयोग वैसे तो अपने कार्य को लेकर स्वतंत्र है लेकिन उसे सत्ताधारी पार्टी ख़ासकर केंद्र की भाजपा सरकार और राज्यों की भाजपा सरकार के समर्थक के रूप में देखा जाता है.

इस पूरे प्रकरण में महिला आयोग ने कार्रवाई के नाम पर संज्ञान लेते हुए ‘निंदा’ और ‘आलोचना’ के अलावा कोई काम नहीं किया है. हिमांशी नरवाल के मामले में NCW ने कहा कि ट्रोलिंग के माध्यम से किसी महिला को उसके निजी जीवन या वैचारिक विचारों के लिए निशाना बनाना “किसी भी रूप में अस्वीकार्य” है.

इसी प्रकार विक्रम मिस्री और उनकी बेटी को निशाना बनाने और उनकी निजी जानकारी सार्वजनिक करने के मामले में NCW ने कहा है कि, “राष्ट्रीय महिला आयोग भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री के परिवार, खासकर उनकी बेटी के खिलाफ ऑनलाइन किए गए दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा करता है.”

महिला आयोग द्वारा कार्रवाई के नाम पर “कड़ी निंदा” और “अस्वीकार्य” जैसे बयान दिए गए. यह बयान एक सामान्य नागरिक भी दे सकता है लेकिन एक राष्ट्रीय स्तर की संस्था जो ठोस कार्रवाई कर सकती है केवल बयान देकर अपनी ज़िम्मेदारी निभा लेती है तो आरोपियों पर ठोस कार्रवाई कैसे होगी और क्या इससे उनके हौसले बुलंद नहीं होंगे?

क्या ये भाजपा का राष्ट्रवाद है या उन्मादी प्रवृति का समर्थन ?

इन हालिया घटनाक्रम को देख कर लगता है कि भाजपा ऑनलाइन उन्मादी प्रवृति के लोगों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन कर रही है. एक तरफ राष्ट्रवाद का नारा बुलंद करती भाजपा के समर्थक शहीद की विधवा को पाकिस्तान का समर्थक और देशद्रोही कहते हैं तो बहीं दूसरी तारक मध्यप्रदेश के भाजपा मंत्री कर्नल सोफिया क़ुरैशी को आतंकवादियों की बहन कह कर अपमान करते हैं.

देश सेवा में लगे सेना अधिकारियों, विदेश सचिव पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले उसी भाजपा के समर्थक या मंत्री हैं जो भाजपा राष्ट्रवाद को राजनीति के पैक में बेचकर सत्ता के शिखर पर पहुंची है. अब यहां सवाल यह उठता है कि क्या भाजपा का राष्ट्रवाद सेना अधिकारियों पर अशोभनीय करने की स्वतंत्रता देता है?

सरकार ने 8 हज़ार से ट्विटर अकाउंट बंद किया, लेकिन ट्रोलर्स के अकाउंट चलते रहे:

पहलगाम हमले के बाद सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए 8 हज़ार से अधिक ट्विटर अकाउंट बंद किया, लेकिन ट्रोलर्स के अकाउंट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. जो सोशल मीडिया अकाउंट बंद करने के आदेश दिए गए उनमें से अधिकतर न्यूज़ पोर्टल, पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं या समान्य नागरिकों के अकाउंट थे.

हैरत की बात है कि सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सरकार ने पत्रकारों के सोशल मीडिया अकाउंट तो बंद करवा दिए लेकिन किसी भी दक्षिणपंथी ट्रोलर्स के अकाउंट बंद नहीं हुए.

सरकार ने बोलने की आज़ादी पर तो अंकुश लगाया लेकिन मुसलमानों, पीड़ितों, सेना अधिकारियों पर अपमानजनक टिप्पणी करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की और उनके अकाउंट अब भी हमलावर और सक्रीय हैं.

कटघरे में सरकार :

देश के आम नागरिकों और सेना अधिकारियों पर अपमानजनक टिप्पणी करने वालों पर कोई कार्रवाई न करने के कारण सरकार कटघरे में है. न तो सरकार ने प्रत्यक्ष रूप से कोई कार्रवाई की और न ही किसी संस्था ने कठोर क़दम उठाया.

सरकार ने स्वतंत्र आवाज़ों को दबाने के लिए 8 हज़ार सोशल मीडिया अकाउंट बंद करवा दिए, लेकिन ट्रोलर्स सेना अधिकारियों पर हमले करते रहे. इसी प्रकार महिला आयोग ने शहीद की विधवा पर अपमानजनक टिप्पणी करने वालों पर चिंता तो जताई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की.

पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा को लेकर सरकार से सवाल करने वालों पर तो FIR हुई लेकिन सेना अधिकारियो पर अपमानजनक टिप्पणी करने वालों पर कोई मुक़दमें दर्ज नहीं किए गए. कोर्ट ने तो स्वतः संज्ञान लिया लेकिन सरकार ने आगे बढ़ कर किसी भी एक “फ्रिंज एलिमेंट” पर कोई कार्रवाई नहीं की.

सरकार को स्पष्ट करना होगा कि वह शहीदों के परिवार के साथ है या शहीदों पर अपमानजनक टिप्पणी करने वालों के साथ है, वह सेना अधिकारियों के साथ है या सेना अधिकारियों को “आतंकवादियों की बहन” कहने वालों के साथ है. सरकार को यह भी स्पष्ट करना होगा कि वह अपने विदेश सचिव के साथ खड़ी है या विदेश सचिव और उनके परिवार और उनकी बेटी पर अभद्र कमेन्ट करने वालों के साथ है.

सरकार को अपनी नैतिकता स्पष्ट करनी होगी, पार्टी (भाजपा) की नैतिकता से तो देश वाकिफ है लेकिन देशहित के लिए एक लोकतांत्रिक देश की सरकार की नैतिकता भी स्पष्ट करना होगा ताकि देशवासियों में सरकार के संवैधानिक होने और ख़ुद के लोकतांत्रिक होने का भ्रम बना रहे.

 

 

courtesy:hindi.indiatomorrow.net

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