चमन में इख़्तिलात ए रंगों बू से बात बनती है

 

 

सिद्धार्थ नगर। (सग़ीर ए ख़ाकसार )  ये देश बहु भाषिक व बहुलतावादी है। विभिन्न जाति ,धर्म, नस्ल के लोग सदियों से रहते हैं। हमें सबकी भावनाओं का सम्मान करना होगा।आपसी भाई चारे और सद्भाव से देश मजबूत होगा।

चमन में इख़्तिलात ए रंगों बू से बात बनती है।
हम ही हम हैं ,तो क्या हम है ,तुम्ही तुम हो तो क्या तुम हो।

यह विचार प्रखर वक्ता व कांग्रेस के पूर्व सांसद डॉ चंद शेखर त्रिपाठी ने एक बात चीत में व्यक्त किया।डॉ त्रिपाठी 1985 में खलीलाबाद से कांग्रेस पार्टी के सांसद रहे है।

उस दौर के राजनेता हैं जब राजनीति विशुद्ध रूप से सेवा का माध्यम थी।सहज सुलभ और सरल स्वभाव के श्री त्रिपाठी कहते हैं राजनीति ही नहीं समाज के विभिन्न क्षेत्रों  में आयी नैतिक गिरावट चिंता का विषय है।

मीडिया जो सरकार को आईना दिखाती थी उसका एक बड़ा तबका अपने मूल उद्देश्यों एवं कर्तव्यों से विमुख हो गया है।मीडिया सरकार का स्थायी विपक्ष होता था।और आमजन के साथ हमेशा खड़ा रहता था।

मीडिया की भूमिका सामाजिक सरोकारों से से जुड़े मुद्दों को उठाने में निहित होती थी ।लेकिन वर्तमान मीडिया के लिए अब आम जन की समस्या कोई खबर नही है उसे दिलचस्पी सिर्फ गैर जरूरी मुद्दों में होती है उसे सिर्फ टीआरपी की चिंता है।

श्री त्रिपाठी  कहते हैं कि बेरोज़गारी युवाओं के लिए एक बड़ी और विकराल समस्या है।रोजगार का सृजन बहुत ज़रूरी है।किसान बदहाल हैं।लोगों में निराशा है।छोटे और मझोले उद्योग बड़े पैमाने पर बंद हो रहे हैं। दलगत भावना और सियासत से ऊपर उठकर समग्र विकास के लिए काम करना होगा।

 

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