किसान आंदोलन: कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट ने समिति का किया गठन, यूजर्स बोले- फर्जी खबरों की कमेटी के लिए अर्नब गोस्वामी, सुधीर चौधरी, रजत शर्मा, रोहित सरदाना और मालेगांव ब्लास्ट केस की जांच के लिए समिति में प्रज्ञा ठाकुर को किया जाए शामिल

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (12 जनवरी) को केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए तीनों नए कृषि कानूनों के लागू किए जाने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन का हल निकालने के लिए एक समिति का भी गठन किया है। इस कमेटी में कुल चार लोग शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर सोशल मीडिया यूजर्स भी जमकर अपना प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं।

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि, फर्जी खबरों की जांच के लिए भी एक कमेटी बनाया जाए जिसमें अर्नब गोस्वामी, सुधीर चौधरी, रजत शर्मा, रोहित सरदाना जैसे पत्रकारों को शामिल किए जाएं। वहीं, कुछ अन्य यूजर्स ने कहा कि मालेगांव ब्लास्ट केस की जांच के लिए भी एक समिति बनाया जाएं जिसमें आतंकवादी-अभियुक्त भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को शामिल किया जाएं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन पर किसानों के साथ बातचीत करने के लिए चार सदस्यीय समिति की घोषणा के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी।

बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई कमेटी में भारतीय किसान यूनियन के भूपिंदर सिंह मान, शेतकारी संगठन के किसान नेता अनिल घनवंत, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी और अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के प्रमोद के. जोशी शामिल हैं। ये कमेटी अपनी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को ही सौंपेगी, जब तक कमेटी की रिपोर्ट नहीं आती है तब तक कृषि कानूनों के अमल पर रोक जारी रहेगी।

वहीं, दूसरी तरफ कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों ने साफ कर दिया कि वे सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित समिति के समक्ष पेश नहीं होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह ‘सरकार समर्थक’ समिति है। किसान संगठनों ने कहा कि उन्हें तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। समिति में शामिल सभी चार सदस्यों को भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कट्टर समर्थक माना जा रहा हैं।

गौरतलब है कि, पंजाब, हरियाणा और देश के कुछ अन्य हिस्सों से आए हजारों किसान कड़ाके की ठंड के बावजूद एक महीने से अधिक समय से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दी जाए।


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