राजनैतिक क़ैदियों के परिजनों ने सुनाई झूठे मुकदमों की पोल खोली
नई दिल्ली | छात्र संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक आर्गेनाईजेशन ऑफ़ इंडिया (एसआईओ) ने शनिवार को CAA विरोधी आंदोलन में सक्रीय रहे उन छात्रों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के परिवार से ऑनलाइन चर्चा ‘सब याद रखा जाएगा’ के शीर्षक से आयोजित किया जो UAPA के तहत पिछले एक वर्ष या उससे अधिक समय से जेलों में क़ैद हैं.
उन सभी राजनीतिक कैदियों के परिजनों के अनुभवों और विचारों को जानने के लिए SIO ने यह ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया था.
न्यूज़ पोर्टल इंडिया टुमारो के अज़हर अंसार की रिपोर्ट के अनुसार इस आयोजन में एसआईओ ऑफ़ इंडिया ने उमर खालिद, आसिफ इकबाल तन्हा, मीरान हैदर, खालिद सैफी ,सिद्दिक कप्पन, शरजील इमाम और अतहर खान के परिजनों को अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित किया था.
दिल्ली में फरवरी 2020 में हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए, हिंसा भड़काने का आरोप लगाकर, UAPA जैसे काले कानूनों का इस्तेमाल करते हुए कई छात्रों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया था. उन सभी युवाओं को जेल में लगभग एक साल बीत गया है. उनकी रिहाई की कोई सूरत नज़र नहीं आ रही है.
उमर खालिद के पिता डॉ. क़ासिम रसूल इलियास ने कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए कहा, “जब इस मुल्क के संविधान को लपेटकर रखने की कोशिश की जा रही थी उस वक्त मेरे बेटे सहित इन सभी नौजवानों ने फासीवाद को बढ़ाने वाली कोशिशों से टक्कर लेने की हिम्मत की. मुझे गर्व है कि मेरा बेटा उमर उन युवाओं में से एक है जो संविधान को बचाने कि लड़ाई लड़ रहे हैं. हमारे घर में कोई मायूसी का शिकार नहीं है. हम समझते हैं कि उमर एक महान काम करते हुए जेल गया है.”
उमर खालिद के पिता डॉ. कासिम रसूल इलियास खुद भी एक सामाजिक-राजनैतिक कार्यकर्ता हैं और वेलफेयर पार्टी ऑफ़ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं. एस.क्यू.आर. इलियास देश भर में एक मुखर मुस्लिम नेता के रूप में भी जाने जाते हैं.
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र नेता आसिफ इकबाल तन्हा की मां ने कहा, “मुझे गर्व है आसिफ पर और उन सभी पर जो इस लड़ाई के चलते जेल गए हैं. आसिफ जब भी फोन करता है हंसते हुए बात करता है और हमें हौसला देता है.” उन्होंने आगे कहा कि, उसके बिना रमज़ान बिताना फीका सा लगता है.
आसिफ के पिता ने कहा, “इन काले कानूनों के खिलाफ कोई तो आवाज़ उठाता ही. जामिया के बच्चों ने इसमें पहल की, मेरा एक बेटा जेल में है लेकिन जो कई लोग मुझे फोन करके तसल्ली देते हैं मैं मानता हूँ वो भी मेरे बेटे जैसे ही हैं.”
UAPA के तहत तिहाड़ जेल में बंद जामिया के पीएचड़ी स्कॉलर मीरान हैदर की बहन शमा परवीन ने कहा, “जिस वक्त मीरान को गिरफ्तार किया गया, वह लाकडाउन से पीड़ित मजदूरों में रिलीफ का काम कर रहे थे. आज भी वो बाहर होते तो कोरॉना से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए जुटे हुए होते.”
जेएनयू छात्र शरजील इमाम के भाई मुजम्मिल इमाम ने कहा, “मेरे भाई को जेल में रहते हुए भी उन लोगों कि फिक्र है जो अपने लिए न्याय की लडाई नहीं लड़ पा रहे हैं, जो पैसों की कमी के कारण अपने वकील हायर नहीं कर पा रहे हैं.”
शरजील के भाई कहते हैं कि UAPA ऐसा चाबुक है जिसके बाद कोई अगला उठ खड़े होने की हिम्मत नहीं कर सके.
यूनाइटेड अगेंस्ट हेट (UAH) एक्टिविस्ट खालिद सैफी की पत्नी नरगिस सैफी ने कहा, “खालिद के हौसले में अभी तक ज़र्रे बराबर भी कमी नहीं आयी है. उन्होंने अपने मुहल्ले में परेशान लोगों की मदद करते हुए सोशल सर्विस का काम शुरू किया था.”
वह बताती हैं कि, “खुरेजी थाने के पुलिस वालों ने मेरे पति को पहले से टारगेट किया हुआ था और पुलिस ने उनपर गिरफ्तारी के दौरान अपना गुस्सा निकाला. उनको इस तरह मारा पीटा गया कि उनके दोनों पैर फ्रैक्चर हो गए थे.”
अपने बच्चों के बारे में बात करते हुए नरगिस कहती हैं कि, “मेरे बच्चे अपने अब्बू को हीरो मानते हैं, वो उनमें एक लाइव भगत सिंह देखते हैं.”
केरल के जर्नलिस्ट सिद्दीक कप्पन की पत्नी रेहाना ने बताया, “सिद्दीक ने कोई जुर्म नहीं किया, वह सिर्फ हाथरस में हुई एक दलित लड़की की हत्या की रिपोर्टिंग करने गए थे लेकिन उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और परिवार को कोई खबर नहीं दी गई.”
सिद्दीक कप्पन की पत्नी ने कहा कि, “मेरे पति हाई लेवल शुगर के मरीज़ है लेकिन जेल में उनको किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जा रही है. उन्हे 6 महीने में सिर्फ 5 दिन की बेल दी गई.”
अतहर खान कि मां नूरजहां ने अपनी बात रखते हुए कहा कि, “मेरा बेटा किसी संगठन से नहीं जुड़ा हुआ है फिर भी वो इन कानूनों का विरोध करने गया क्योंकि ये कानून गलत है.”
अतहर के बारे में बताते हुए नूरजहां कहती हैं कि, “वह स्कूल के बाद से ही सामाजिक कामों में हिस्सा लेता रहा है. उसने 2012 में निर्भया कांड के आरोपियों के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन में भी हिस्सा लिया था.”
उन्होंने कहा, “मेरा बेटा कई महीनों से ऐसी ज़िन्दगी गुज़ार रहा है जिसका वो हकदार नहीं था। ये हमारा पहला रमज़ान है जब वो हमारे साथ नहीं है. दो दिन पहले सातवें रमज़ान को उसका जन्मदिन था. उस दिन उनको उसकी बहुत याद आई। वो जेल में है इस बात का अफसोस तो है लेकिन मुझे कोई शर्मिंदगी नहीं है बल्कि मुझे अपने बेटे पर गर्व है.”
एस.आई.ओ ऑफ़ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुहम्मद सलमान अहमद ने कहा, “जिस तरह एक व्यक्ति के ज़िंदा रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है उसी तरह से पूरे समाज को ज़िंदा रखने के लिए न्याय के स्थापना कि आवश्यकता होती है। आज ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले अगर हीरो हैं तो यह सब न्याय की लड़ाई लड़ने वाले इनसे बड़े हीरो हैं, यह सभी लोग विक्टिम नहीं बल्कि हीरो हैं’.”
गौरतलब है कि UAPA कानून के तहत जेलों में बंद किए गए सभी 18 लोग पिछले साल CAA-NRC विरोधी आंदलनों में सक्रीय थे.
साभार : इंडिया टुमारो

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