समाजी खिदमत का पैमाना क्या होना चाहिए
जनता दरबार:- भारत एक ऐसा देश है जिसकी आर्थिक तरक्की हो या न हो मगर गरीबी भुखमरी बेरोजगारी में तरक्की तो दिन ब दिन होती है। आज भी भारत की एक तिहाई आबादी के पास ही पीने का साफ पानी मुहैया है।
आप लोगो ने अक्सर देखा होगा के सड़क किनारे बड़े बड़े होर्डिंग लगे होते है फलां साहब की तरफ से फलां दिवस की बधाई और उनके नाम के नीचे लिखा होता है प्रसिद्ध समाज सेवक।और होता क्या है साहब का जरा पता कर लेंगे इलाके में की क्या किये हैं साहब अपने क्षेत्र के लिए तो निल बटा सन्नाटा मिलेगा। अब यहाँ सोचने की बात ये है कि समाज सेवा तो वो क्षेत्र रहा है जिसमें ये कहावत मशहूर है कि नेकी कर और दरिया में डाल।
मुद्दा ये है कि हम लोग को समाज सेवा के क्षेत्र को पाक पवित्र रहने देना चाहये वरना लोगों का दिल अगर एक बार बदजन हो गया तो कोई भी इंसान किसी पर भी भरोसा नही करेगा।समाज सेवा करनी है तो साफ दिल से नेक नियती से करनी चाहये ताकि समाज मे सच मे बदलाव आ सके और हमारा देश गरीबी से निजात पा के हकीकत में विश्व अगुआ बन सके। इमरान अंसारी

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