सभ्य समाज में एकतरफा बयान के आधार पर किसी को गिरफ्तार नही किया जा सकता - SC
SC/ST एक्ट मामले में तुरंत गिरफ्तारी रोकने के खिलाफ केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में टिपण्णी करते हुए कहा कि ये कैसा सभ्य समाज जहाँ किसी के एक तरफ़ा बयान पर लोगों पर कभी भी गिरफ़्तारी की तलवार लटकती रहे।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस गोयल ने कहा कि संसद भी ऐसा कानून नहीं बना सकती जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार का उल्लंघन करता हो।
SC/ST एक्ट मामले में तुरंत गिरफ्तारी रोकने के खिलाफ केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गिरफ़्तारी से पहले शिकायत की जाँच करने का आदेश अनुच्छेद 21 मे व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार पर आधारित है।
केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि जीने के अधिकार का दायरा विस्तृत है और सभी अधिकारों को सरकार लागू नहीं कर सकती। SC/ST एक्ट मामले में तुरंत गिरफ्तारी रोक के अपने 20 मार्च के फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से इंकार कर दिया। अब इस मामले में अगली सुनवाई जुलाई में होगी।
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