ड्रैगन से निपटने की तैयारी:यूक्रेनी सैनिकों के साथ रूस से जंग लड़ रहे ताइवानी, कहा- चीन की वजह से वॉर प्रैक्टिस जरूरी
फरवरी में रूसी सेना के हमले के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमिर जेलेंस्की ने विदेशी वालंटियर्स से मदद की अपील की थी। इस अपील के बाद दुनिया अन्य देशों की तरह ताइवान से भी कई लोग रूसी सेना का मुकाबला करने यूक्रेन पहुंच गए।
दरअसल, यूक्रेन जिस तरह अपने पड़ोसी के हमले का सामना कर रहा है, इसी तरह का खतरा ताइवान पर भी मंडरा रहा है। आए दिन चीन की एयरफोर्स अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर क्रास कर ताइवान की सीमा में घुस जाती है। इस वजह पूर्वी यूरोप की तरह ही दक्षिण-पूर्वी एशिया में भी युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं।
खुद को बचाने की उम्मीद दूसरों नहीं
ताइवानी सैनिकों का मकसद है कि यूक्रेन युद्ध के जरिए वो उन सभी वॉर लेसन को हासिल कर सके, जो चीन से युद्ध के हालत में काम आए। ताइवान के सिपाही चुआंग यू-वेई का कहना है कि मैं चाहता हूं कि दुनिया देखे कि हम वो लोग नहीं हैं जो खुद को बचाने की उम्मीद दूसरों से कर रहे हैं। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी मदद करें, तो पहले आपको उनकी मदद करनी होगी।
वॉशिंगटन पोस्ट को दिए इंटरव्यू में एक ताइवानी सोल्जर ने कहा कि कम से कम 10 हमवतन इस युद्ध में शामिल हुए हैं। हम चीन से संभावित युद्ध को देखते हुए वॉर प्रैक्टिस कर रहे हैं।
वहीं, 26 साल के सिंचु पान ने कहा कि ताइवान में, हमारे इलेक्ट्रॉनिक वॉर इक्विपमेंट्स कन्वेंशनल आर्मी के लिए नाकाफी है। पान का कहना है कि जब वह वापस जाएंगे तो बूट कैंप खोलेंगे और ताइवान के नागरिकों को खुद का बचाव करने का तरीका सिखाएंगे।
ताइवान की रणनीति 1991 के खाड़ी युद्ध बराबर
इंडो-पैसिफिक के एक्सपर्ट लिन यिंग-यू का कहना है कि सरकार ने कुछ ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए हैं। अलर्ट भी बढ़ा दिया गया है, हालांकि ये सब चीन जैसे दुश्मन से निपटने के लिए नाकाफी है।
लिन यिंग-यू का कहना है कि सबसे बड़े सवाल हैं: हम किस तरह का युद्ध लड़ने जा रहे हैं? क्या हमारे इक्विपमेंट, आर्मी यूनिट्स और ट्रेनिंग उस तरह के युद्ध से मेल खा सकते हैं जो हमें लड़ना होगा? सिखाई जाने वाली रणनीति 1991 के खाड़ी युद्ध या वियतनाम युद्ध के दौरान इस्तेमाल की गई रणनीति के बराबर है।
चीन से 100 मील दूर स्थित ताइवान को लेकर क्यों है विवाद?
चीन ताइवान को अपना ही एक प्रांत मानता है। चीन का मानना है कि एक दिन ताइवान फिर से चीन का हिस्सा बन जाएगा। ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश मानता है, जिसका अपना संविधान है और वहां लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार का शासन है।
ताइवान पश्चिमोत्तर प्रशांत महासागर में पूर्वी और दक्षिण चीन सागर के जंक्शन पर स्थित एक आइलैंड है, जिसे पहले फोरमोसा के नाम से जाना जाता था। ये दक्षिण पूर्व चीन के तट से लगभग 100 मील की दूरी पर है। ताइवान हांगकांग के उत्तर-पूर्व में, फिलीपींस के उत्तर में और साउथ कोरिया के दक्षिण में और जापान के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण ही ताइवान और उसके आसपास कुछ भी होने पर वह पूरे पूर्वी एशिया को प्रभावित कर सकता है।
- फोन से लेकर लैपटॉप और घड़ियों से लेकर मोबाइल गेम तक, रोजमर्रा की जरूरत के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में लगने वाली सेमीकंडक्टर चिप का ताइवान सबसे बड़ा मार्केट है।
- अकेले ताइवान की एक ही कंपनी- ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी या TSMC ही दुनिया भर की कुल सेमीकंडक्टर चिप का आधे से ज्यादा का प्रोडक्शन करती है।
- ताइवान पर कब्जा होने पर चीन वहां मौजूद दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण इंडस्ट्रीज पर आधिपत्य जमा सकता है। यानी उसके ताइवान पर हमले की योजना की एक वजह ये भी है।

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