रोसड़ा जलता रहा और सुशासन बाबू सोते रहे!

नक़्शा ले कर हाथ में बच्चा है हैरान
कैसे दीमक खा गई उस का हिन्दोस्तान
(निदा फ़ाज़ली)
जनता दरबार: आगामी चुनाव की तैयारी में साम्प्रदायिक दंगे शुरू हो चुके हैं! सत्ता के भूखे भेड़ियों ने इंसानियत का कत्ल करना शुरू कर दिया है! विकास का ढोंग रचा कर विनाश की राजनीति का आरंभ हो चुका है! अब फिर इस बार के चुनाव में लगता है शोषितों, पिछड़ों, दलितों तथा अल्पसंख्यकों का बलि दिया जाएगा और राजनीति का घिनौना खेल खेला जाएगा!
क्षेत्रीय,धार्मिक, सांस्कृतिक एवं भाषाओं के विविधताओं से भरी हमारी सोने की चिड़िया जैसी धरती पे अब खूँखार शिकारियों ने हर प्रकार से अपना बर्चस्व बना लिया है और धीरे-धीरे सोने की हर चिड़िया का एक-एक कर शिकार करते जा रहे है!
इसी कड़ी में दरिन्दे शिकारियों ने दिनांक 27 मार्च 2018 को बेगूसराय और समस्तीपुर के बीच स्थित रोसड़ा को निशाना बनाया है! किसी ने उनपर चप्पल फेंका है ऐसा बहाना बनाकर दंगाईयों ने धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया है!
मुझ जैसा इक आदमी मेरा ही हमनाम
उल्टा सीधा वो चले मुझे करे बद-नाम (निदा फ़ाज़ली)
एक जगह तो धार्मिक स्थल के दीवार से सटा दीवार थाना का है ! लोग इतने उग्र थे कि पुलिस भी कुछ नहीं कर पाई, कुछ लोग तो यहाँ तक कह रहे हैं कि पुलिस पे कुछ नहीं करने का दवाब था उन्हें पटना से फोन आया था!
धर्म के नाम पर इसी तरह के दंगे की खबर बिहार के अन्य ज़िलों से भी आ रही है! अगर धर्म के नाम पर इसी तरह का हुड़दंग होता रहे तो समाज टुकड़ों में विखंडित हो जायेगा! अगर इसे सामान्य नागरिक के दृष्टिकोण से देखा जाय तो इसके पीछे की राजनीति स्पस्ट दिखाई देती है!
जब इसके पीछे राजनीति है तो तमाम राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को चाहिए कि एक साथ आकर समाज को विखण्डित होने से बचाएं! अगर आज हमने अपनी आंख और ज़ुबान बन्द कर ली तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ़ नहीं करेगी!
जो लोग अपनी राजनीतिक रोटी पुलिस तथा सुसंगठित भीड़ को सामने रख कर सेंक रहें हैं उन्हें याद रखना चाहिए कि वो देश की एकता और अखंडता तो धूमिल कर रहे हैं! इसी सब को ध्यान में रख कर आज से 90 वर्ष पूर्व जून 1928 में ही भगत सिंह ने कहा था कि वर्तमान में, भारत एक दु: खद स्थिति में है।
(कुछ) एक धर्म के अनुयायी दूसरे धर्म के अनुयायियों को अपना कट्टर शत्रु मानते हैं!(अतः) हमारी साँझी विरासत और रास्ट्रीय एकता को नष्ट करने के उद्देश्य से संकीर्ण विचारधारा और सांप्रदायिकता को फैलाने वालों का बहिष्कार करें!
हम सब यह भलीभांति जानते हैं कि धर्म के नाम पे दंगा भड़काने का काम हमेशा से हुआ है कभी सत्ता के लिए, तो कभी धर्म की रक्षा की आड़ में! सत्ता के दम पे समाज का विभाजन करने के पीछे शोषितों और वंचितों को उनके अधिकार और असल सवाल से दूर रखने का षडयंत्र हैं!
असल में नाकाम और निकम्मी सरकारों ने अपनी असफलता छुपाने के लिए हमेशा से ही समाज को दूसरे मुद्दों के दल-दल में धकेला है! उन्हें याद रखना चाहिए कि तमाम षड्यंत्रों के बावज़ूद आज भी हमारे देश की एकता और अखंडता बरकरार है, और प्रलय के दिन तक रहेगा!
अन्त में हम यह कामना करते हैं कि पूरे भारत और पूरे बिहार के लोग आपसी रंजिशों और लेफ्ट, राइट, तथा सेन्टर के डिबेट से ऊपर उठकर समाज बचाने के लिए सामने आएंगे! अगर क्षमता हो तो ज़ुल्म को हाथ से रोकिए, अगर ये ना हो पाए तो ज़ुबान से ज़ालिमों की मुख़ालिफत कीजिए, अगर इतना भी ना हो सके तो कम से दिल में ही ज़ालिमों को ज़ालिम मानिए और उससे अपने आप को अलग कर लीजिए!
शाहनवाज़ भारतीय
बेगूसराय, बिहार

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