उत्तर प्रदेश का बढ़ता सियासी तापमान

माजिद अली खां

उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव निकट आ रहे हैं वैसे वैसे राज्य का राजनीतिक तापमान भी बढ़ने लगा है। कुछ दिनों पहले तक यह लगता था कि आगामी विधानसभा चुनाव में सिर्फ भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच कांटे का मुकाबला होगा लेकिन अब देखा जा रहा है कि प्रियंका गांधी और जयंत चौधरी की सक्रियता ने मुकाबले में दिलचस्पी पैदा कर दी है।  लखीमपुर खीरी में किसानों को मारे जाने की घटना में जिस प्रकार प्रियंका गांधी को सक्रिय देखा गया और फिर उसके बाद बनारस में उनकी एक विशाल रैली हुई जिसमें बहुत भारी भीड़ देखी गई उससे अनुमान लगाना आसान हो जाता है की अब सिर्फ मुकाबला दो ध्रुवीय नहीं बल्कि बहु ध्रुवीय होगा।

प्रियंका गांधी की बनारस में हुई रैली वास्तव में बहुत दिनों बाद कांग्रेस की कोई ऐसी रैली देखने को मिली जिसमें भारी भीड़ नजर आ रही थी। प्रियंका गांधी की सक्रियता ने जहां एक और भारतीय जनता पार्टी को कड़ा मुकाबला करने की चुनौती दी है वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव को भी सक्रिय कर दिया है क्योंकि वह बहुत दिनों से उदासीन राजनीति कर रहे थे।


उन्हें लगता था की भारतीय जनता पार्टी से नाराज वोटर सिर्फ समाजवादी पार्टी को ही वोट देगा और उन्हें उत्तर प्रदेश सत्ता आराम से मिल जाएगी जिस प्रकार पिछली बार मुलायम सिंह यादव के नाम पर पार्टी की जीत हुई थी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बनाया गया इस बार भी ऐसा ही कुछ हो जाएगा। एक ओर जहां प्रियंका और अखिलेश अपनी चुनावी तैयारियां पूरी कर रहे हैं दूसरी ओर जयंत चौधरी अपनी राजनीति को जिस प्रकार धार दे रहे हैं  वह भी अचंभित करने वाला है।

जयंत चौधरी जनआशीर्वाद रैलियों के जरिए पश्चिम उत्तर प्रदेश में अपार जनसमर्थन हासिल कर रहे हैं जिससे यह लगने लगा है की उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला सिर्फ समाजवादी पार्टी या कांग्रेस से नहीं बल्कि राष्ट्रीय लोकदल से भी होगा। इस तरह विपक्ष की तीन बड़ी पार्टियों के नेताओं द्वारा आक्रामक रूप में चुनाव प्रचार में उतरने से उत्तर प्रदेश का विधान सभा चुनाव बड़ा रोमांचकारी हो जाएगा। इसके साथ ही ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस इत्तिहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी राजनीतिक तड़का लगाने के लिए कभी-कभी उत्तर प्रदेश का दौरा कर रहे हैं।

असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य में सिर्फ 100 विधानसभाओं पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है लेकिन वह उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर जिस प्रकार अपनी बात रख रहे हैं और अपने परंपरागत तरीके से आक्रामक रूप में भारतीय जनता पार्टी ही नहीं दूसरी अन्य धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को भी निशाने पर ले रहे हैं उससे कम से कम यह अंदाजा हो रहा है के ओवैसी चुनावी तापमान को और अधिक बढ़ाने में अच्छी भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि मुस्लिम समाज के आधार पर ओवैसी मैदान में उतर रहे हैं लेकिन अभी तक असदुद्दीन ओवैसी को मुसलमानों की तरफ से कोई बड़ा समर्थन नहीं मिल पा रहा है।  हां इतना तो है कि मुस्लिम युवा वर्ग ओवैसी की ओर आकर्षित हो रहा है। मुस्लिम समाज का संजीदा तबका ओवैसी साहब से बहुत ज्यादा संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है और उनकी इस नीति का भी विरोध कर रहा है कि वह भाजपा के साथ साथ उन सिकुलर दलों को भी निशाना बना रहे हैं जिनके साथ ओवैसी साहब खुद सत्ता का मजा चख चुके हैं।

अगर हम उत्तर प्रदेश में दलितों की पार्टी कहीं जाने वाली बहुजन समाज पार्टी की बात करें तो अब की बार बसपा बहुत ज्यादा दमखम के साथ चुनाव मैदान में नजर नहीं आ रही है। बसपा सुप्रीमो मायावती खुद भी अब तक चुनावी माहौल में नजर नहीं आई है और कभी कभार ट्वीट के जरिए या अपने किसी बयान के जरिए वह राजनीतिक बयानबाजी तो कर रही हैं लेकिन अपने चिर परिचित अंदाज में  सामने नहीं आ रही हैं। लोग दबी जुबान में यही कह रहे हैं कि मायावती हो ना हो भारतीय जनता पार्टी के दबाव में हैं जिसकी वजह से वह खुलकर अपना प्रचार नहीं कर पा रही हैं। खुद दलित समुदाय में बसपा और मायावती को लेकर बेचैनी है और दलितों का बड़ा वर्ग कांग्रेस के साथ साथ चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण की आजाद समाज पार्टी और बहुजन मुक्ति मोर्चा की और भी आकर्षित हो रहा है।

  फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि दलितों का ज्यादातर वोट किसके खाते में जाएगा।‌ दावा तो बहुजन समाज पार्टी का ही है कि वह दलितों की एकमात्र सबसे बड़ी पार्टी है लेकिन चुनाव परिणाम ही इस बात का फैसला कर सकते हैं कि दलित बसपा के साथ जुड़े रहेंगे या किसी अपनी नई राह पर चलने पर मजबूर होंगे। दलितों के युवाओं में अपनी पहचान बना चुके आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण भी घूम घूम खुद को एक स्थापित नेता के रूप में साबित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस बहुध्रुवीय चुनावी दंगल में अभी क्या क्या होना है इसका इंतजार सभी को है लेकिन ये तय है कि चुनावी कुश्ती में मज़ा बहुत आने वाला है।

Note: लेख में दिए गए विचार माजिद अली ख़ाँ के निजी हैं।



3 comments

  • Asgar Raja

    आपने अपनी विचारों से वर्तमान में उत्तर प्रदेश के राजनीतिक भूचाल का आईना दिखाया है.

  • Arun Chandra Roy

    बहुत सटीक विश्लेषण। .

  • Arun Chandra Roy

    बहुत उम्दा विश्लेषण.

Leave a Reply