राजस्थान: शहरी रोज़गार गारंटी में काम की मांग को लेकर मज़दूरों का प्रदर्शन, विधायक को दिया ज्ञापन
जयपुर | राजस्थान के नगरपालिका भीम जिला राजसमन्द में राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन से जुड़े मजदूर एवं अन्य लोगों ने अपनी मांगों को लेकर विशाल रैली निकाली और प्रदर्शन किया.
ज्ञात हो कि मजदूर एवं शहर के निवासी भी शहरी रोज़गार गारंटी योजना में रोज़गार के लिए चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उन्हें रोज़गार नहीं मिल रहा है. इससे पहले ये ग्राम पंचायत थी तो आसानी से महात्मा गाँधी नरेगा (मनरेगा) में काम मिल जाता था लेकिन अब लम्बे समय से काम नहीं मिल रहा है.
भीम ग्राम पंचायत को नगरपालिका का दर्जा मिलने पर लोगों को मनरेगा का रोजगार छिनने का डर था, क्योंकि मनरेगा ग्रामीण क्षेत्रों में ही लागू है, लेकिन राजस्थान में शहरों में भी इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना संचालित होने से लोगों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद थी.
मनरेगा की तरह इस योजना में भी न्यूनतम 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है.
इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को गारंटीकृत रोजगार प्रदान करना है. इससे राजस्थान में न केवल ग्रामीण इलाकों के नागरिक मनरेगा योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं बल्कि शहरी क्षेत्रों के नागरिकों को भी इस योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा.
भीम के बाज़ारों में काम की मांग को लेकर मजदूरों ने निकाली विशाल रैली
रोज़गार देने की मांग को लेकर सभी मजदूर पाटिया का चौड़ा में इकठ्ठा हुए और वहां से भीम के बाज़ारों में से रैली निकाली जो डाक बंगला, ट्रक चौराहा, सूजाजी का चौक होती हुई उपखंड अधिकारी कार्यालय के सामने पहुंची जहाँ पर विभिन्न वक्ताओं और मजदूरों ने अपनी बात रखी.
राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन से जुडी हेमलता, रेखा, डाली और सोनू और अन्य साथियो ने कहा कि रोजगार के लिए हम कब तक चक्कर लगाएं ये हमें भी समझ में नहीं आ रहा है. कितने ही चक्कर लगाने के बाद भी हमारे जॉब कार्ड नहीं बनाये जा रहे हैं और काम नहीं दिया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि जब देवगढ और ब्यावर में काम चल रहा है तो भीम में क्यों नहीं चल रहा है ये हमारे समझ में नहीं आ रहा है.
राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष शंकर सिंह ने रैली को सम्बोधित करते हुए कहा कि हम कार्यवाहक अधिशाषी अधिकारी एवं विकास अधिकारी से कई बार मिलकर मौखिक रूप से और 3 बार लिखित में रोज़गार उपलब्ध कराये जाने की मांग कर चुके हैं लेकिन आज तक ना तो जॉब कार्ड बनाये गए और ना ही रोज़गार उपलब्ध कराया गया.
उन्होंने कहा कि अधिकारी इसकी जिम्मेदारी एक दूसरे पर डाल रहे हैं जिसका खामियाजा मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है.
राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन के सचिव बालूलाल ने कहा कि यदि मजदूरों को 125 दिन का रोज़गार नहीं मिलता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा ये सरकार को तय करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि जब तक मजदूरों के हाथों को काम (रोज़गार) नहीं मिलता है तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा.
क्षेत्रीय विधायक एवं उपखंड अधिकारी को दिया ज्ञापन
महिलाओं और यूनियन के पदाधिकारियों ने मिलकर स्थानीय विधायक हरिसिंह रावत को काम की मांग और जॉब कार्ड बनाये जाने को लेकर ज्ञापन दिया, जिस पर उन्होंने त्वरित कार्यवाही करते हुए उच्च अधिकारीयों को फ़ोन किया.
इस मौके पर उपखंड अधिकारी पूनम को भी ज्ञापन दिया गया. आज की वार्ता के आशाराम पर मज़दूरों ने निर्णय लिया की अगले सात दिनों मे यदि उपयुक्त करवाई नहीं हो पाई तो 23 जनवरी, 2024 से अनिश्चित कालीन धरना दिया जायेगा, पंचायत समिति, भीम के सामने.
इस मौके पर मजदूर किसान शक्ति संगठन के साथी रूप सिंह, विनीत, लक्ष्मी चौहान, श्रिया सिंह, रुकमा देवी तथा राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन से निर्मला, वनिता, पिंकी, सोनू तथा भीम नगरपालिका के मजदूर उपस्थित हुए.
मजदूर किसान शक्ति संगठन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश निर्वासित ने बताया कि तत्कालीन गहलोत सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने दिनांक 10.07.2023 को भीम को नगरपालिका बना दिया था. उसके बाद से यहाँ पर महात्मा गाँधी नरेगा के तहत रोज़गार मिलना बंद हो गया है.
राज्य में शहरी क्षेत्र में रोज़गार हेतु इंदिरा गाँधी शहरी रोज़गार योजना चालू है जिसे राज्य विधानसभा द्वारा कानूनी रूप भी दिया जा चुका है.
नगरपालिका भीम के कार्यवाहक अधिशाषी अधिकारी एवं विकास अधिकारी भीम को जॉब कार्ड बनाये जाने एवं रोज़गार उपलब्ध कराये जाने का आग्रह कई बार मौखिक रूप से करने बाद दिनांक 18.12.2023, 08.01.2024 एवं 11.01.2024 को लिखित में अवगत करा चुके हैं.

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