पंजाब में हाइब्रिड धान बीजों की बिक्री पर प्रतिबंध: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कृषि विभाग की कानूनी शक्ति पर उठाए सवाल
एक अहम घटनाक्रम में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार द्वारा राज्य में हाइब्रिड धान बीजों की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध के पीछे की वैधानिक शक्ति पर सवाल उठाए।
जस्टिस कुलदीप तिवारी ने पंजाब सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि 7 अप्रैल को पारित किए गए उक्त आदेश के पीछे कौन-सी कानूनी शक्ति है, जिसके आधार पर राज्य में हाइब्रिड धान बीजों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया।
इसके साथ ही कोर्ट ने कृषि और किसान कल्याण विभाग के निदेशक को यह हलफनामा दायर करने को कहा,
यदि इसका उत्तर नकारात्मक है तो यह भी स्पष्ट किया जाए कि ऐसी स्थिति में जब खरीफ 2025 की बुवाई की तिथि को 1 जून कर दिया गया और उसकी नर्सरी 1 मई से तैयार की जानी है तब इस प्रकार का आदेश क्यों पारित किया गया?
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो निदेशक को अगली सुनवाई की तारीख 2 मई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।
कृषि क्षेत्र से जुड़े कई व्यापारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कृषि विभाग द्वारा पारित उस आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसमें हाइब्रिड धान बीजों की बिक्री पर रोक लगाई गई है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत व्यापार करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
“धान की रोपाई से पहले बीजों की नर्सरी तैयार की जाती है, जिसमें एक महीना लगता है। यदि रोपाई की तिथि 1 जून तय की गई है तो नर्सरी की बुवाई 1 मई से करनी होगी।”
उन्होंने कहा कि रोपाई की तिथि पहले करने से याचिकाकर्ताओं को भारी नुकसान हो रहा है, क्योंकि किसानों द्वारा हाइब्रिड बीज नहीं खरीदे जाएंगे और पहले से बीज कंपनियों को दिए गए अग्रिम ऑर्डर व्यर्थ हो जाएंगे, जिससे डीलरों को आर्थिक क्षति होगी।
अंत में कोर्ट ने स्पष्ट किया,
“अगली सुनवाई पर किसी भी पक्ष द्वारा स्थगन की कोई मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।"
मामले की अगली सुनवाई 2 मई को निर्धारित की गई है।
टाइटल: एम/एस न्यू किसान एग्रो एजेंसी एवं अन्य बनाम राज्य पंजाब

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