बिहार: गुलनाज़ की हत्या के मामले में फैक्ट फाइंडिंग टीम ने की मुआवज़े की मांग

पटना | बिहार के वैशाली जिले के रसूलपुर गांव की एक मुस्लिम युवती को पिछले माह छेड़खानी का विरोध करने पर जलाकर मार दिए जाने का मामला सामने आया था जिसमें दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है. इस मामले में आल इंडिया मुस्लिम मजलिस मुशावरत, बिहार चैप्टर की एक फैक्ट फाइंडिंग टीम ने पीड़िता के गाँव से लौटकर एक रिपोर्ट जारी किया है जिसमें पीड़ित परिवार के लिए मुआवज़े की मांग की गई है.

रिपोर्ट में आरोपियों को कठोर सज़ा देने की मांग की गई है. पीड़ित परिवार को न्याय देने की मांग के साथ-साथ उन्हें मुआवज़ा और सुरक्षा प्रदान करने की बात भी रिपोर्ट कही गई है.

न्यूज़ पोर्टल इंडिया टुमारो  के अनुसार  रिपोर्ट में कहा गया है कि आरोपियों ने पीड़िता पर तेल डालकर उसे जलाया जिसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई हालंकि, घटना में कोई सांप्रदायिक रंग नहीं है.

फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्य और आल इंडिया मुस्लिम मजलिस मुशावरत, बिहार चैप्टर के जनरल सेक्रेटरी अनवारुल हुदा ने इंडिया टुमारो को बताया कि, “पीड़िता के गाँव जाने पर यह बात सामने आई की यह एक आपराधिक घटना थी और इस घटना में कोई साम्प्रदायिक एंगल नहीं है.”

उन्होंने कहा कि, “इस मामले में शुरू में पुलिस की भूमिका सही नहीं थी और मामला दर्ज नहीं किया गया था हालांकि बाद में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की गई.”

ज्ञात हो कि बिहार के वैशाली में एक 20 वर्षीय मुस्लिम युवती गुलनाज़ को छेड़खानी का विरोध करने पर दबंगों द्वारा जला दिया गया था. पीड़िता की इलाज के दौरान पटना मेडिकल कालेज में 15 नवंबर को मौत हो गई थी.

पीड़िता 75 प्रतिशत तक जल चुकी थी. जल्द ही उसकी सगाई हुई थी और चार महीने बाद उसकी शादी होने वाली थी.

आरोपियों ने कहा है कि पीड़िता ने स्वयं को लगाई आग: 

ज़मानत के लिए दिए प्रार्थना पत्र में आरोपियों द्वारा पीड़िता पर स्वयं को आग लगाने का आरोप लगाया गया है. अभिक्युक्तों के वकील रविशंकर कुमार ने ज़मानत के लिए किए गए आवेदन में लिखा है कि अभियुक्त सतीश कुमार निर्दोष है और घटना के दिन वह गाँव में मौजूद नहीं था.

आवेदन में कहा गया है कि पीड़िता ने पारिवारिक रंजिश में ख़ुद को आग लगा ली जिसके कारण पीड़िता गुलनाज़ की मौत हो गई.

हालांकि पीड़ित पक्ष के वकील ने ज़मानत का विरोध किया है और अब तक आरोपियों के प्रयास के बाद भी उन्हें ज़मानत नहीं मिल सकी है.

गाँव में सभी लोग पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं: रिपोर्ट

फैक्ट फाइंडिंग टीम के अन्य सदस्यों ने इंडिया टुमारो को बताया कि गाँव में मुस्लिम आबादी कम है मगर अन्य समुदाय के लोग भी पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं और उनका हर प्रकार से सहयोग कर रहे हैं.

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस घटना में कोई भी सांप्रदायिक रंग नहीं है.

हालांकि, पीड़िता के परिवार ने आरोपियों पर धमकी देने का इल्ज़ाम लगाया था. इस मामले में 18 नवंबर को पहली गिरफ्तारी हुई. घटना के 18 दिन बाद पुलिस द्वारा 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.

घटना में राजनीतिक दबाव का था आरोप, रिपोर्ट ने किया इंकार:

यह घटना 30 अक्टूबर की है जबकि प्राथमिकी 2 नवंबर को दर्ज की गई. प्रशासन पर ये आरोप भी लगा था कि चुनाव को देखते हुए मामला प्रकाश में नहीं लाया गया.

हालांकि, फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्य और एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट्स (APCR) बिहार के कोआर्डिनेटर नौशाद अंसारी ने इस मामले में किसी राजनीतिक दखल से इंकार किया है.

उन्होंने कहा कि पीड़िता को अस्पताल ले जाने वाले गाँव के लोग ही थे. इलाज में भी उनका सहयोग रहा.

इस मामले में घटना के 15 दिन बाद तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी.

फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में कहा गया है कि, “मृतका वैशाली के देसरी थाना क्षेत्र के रसूलपुर गांव की रहने वाली थी. पीड़िता के पिता की बहुत पहले मौत हो चुकी है और माँ सिलाई का काम कर के घर का ख़र्च चलाती है.”

पीड़िता ने इलाज के दौरान लिया था आरोपियों का नाम:

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, “पीड़िता ने इलाज के दौरान बयान दर्ज कराया था जिसमें उसने सतीश और उसके दो साथियों का नाम लिया था. बयान में पीड़िता ने तीन युवकों- सतीश राय, विजय राय और चंदन राय का नाम लिया था जिन्होंने घटना को अंजाम दिया.”

पीड़िता की मौत के बाद परिजनों ने शव को रोड पर रखकर प्रदर्शन कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की थी जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ था.

इस मामले में तेजस्वी यादव, राहुल गाँधी और असदुद्दीन ओवैसी ने पीड़िता का वीडियो ट्विट कर नितीश सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया था जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और गिरफ़्तारी की गई.

घर वालों का आरोप है कि दबंगों द्वारा पहले भी छेड़खानी की गई थी. जब उन्होंने आरोपी के घरवालों से इसकी शिकायत की तो आरोपियों ने धमकी दी. अगले दिन आरोपी ने अपने दो साथियों के साथ लड़की को घर के पास पकड़ा और छेड़खानी का विरोध करने पर केरोसिन तेल डालकर आग लगा दी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि, “पीड़िता, 30 अक्टूबर की शाम घर से कचरा फेंकने बाहर गई थी जहां उसे तीन युवकों- सतीश राय, विजय राय और चंदन राय ने घटना को अंजाम दिया.”

फैक्ट फाइंडिंग टीम में आल इंडिया मुस्लिम मजलिस मुशावरत, बिहार चैप्टर के जनरल सेक्रेटरी अनवारुल हुदा, एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट्स (APCR) बिहार के कोआर्डिनेटर नौशाद अंसारी, जमाअत इस्लामी हिन्द से ज़ियाउल कमर और ज़ाहिद करीम, मोहम्मद नौशाद एडवोकेट, शाहज़ाद रशीद- एडवोकेट पटना हाईकोर्ट और अज़ीमुद्दीन अंसारी शामिल थे.

फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में की गई मांग:

रिपोर्ट में पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने की मांग के साथ निम्नलिखित मांगे की गई हैं:

  1. आरोपियों को जल्द कठोर सज़ा दी जाए.
  2. स्थानीय पुलिस पर भेदभाव का आरोप है इसलिए मामले की जांच CBCID से कराई जाए.
  3. पीड़िता की माँ को तत्काल 50 लाख का मुआवज़ा दिया जाए.
  4. पीड़ित परिवार ने एक कमाने वाले सदस्य को खोया है इसलिए परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी डी जाए.
  5. पीड़ित परिवार को आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जाए.

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