महाशय धर्मपाल गुलाटी जब अपने परिवार के साथ भारत आए थे तो उनके पास महज 1,500 रुपये थे

नहीं रहे धर्मपाल गुलाटी- एमडीएच मसालों के व्यापारी कोरोना से ठीक हुवे और हार्ट अटैक से निधन हुआ

 

नई द‍िल्ली: दिग्गज मसाला कंपनी महाशिया दी हट्टी (एमडीएच) के मालिक महाशय धर्मपाल जी का निधन हो गया है। धर्मपाल गुलाटी ने 98 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है।

पिछले दिनों उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी लेकिन वह कोरोना से ठीक हो गए थे। खबर म‍िली है कि महाशय धर्मपाल गुलाटी को गुरुवार सुबह हार्ट अटैक आया, जिसके बाद उनका निधन हो गया।

पिछले साल उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उनके निधन पर देश में शोक की लहर है। बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आए थे महाशय धर्मपाल सालों से महाशय धर्मपाल गुलाटी एमडीएच मसालों के विज्ञापन में आ रहे थे। धर्मपाल गुलाटी के पिता ने पाकिस्तान के सियालकोट में साल 1922 में एक छोटी सी दुकान से इस सफर की शुरुआत की थी। देश के बंटवारे के बाद उनका परिवार दिल्ली आ गया। वहीं साल 1919 में पाकिस्तान के सियालकोट में जन्मे धर्मपाल गुलाटी 1947 के बंटवारे के बाद भारत आ गए थे। उनके पिता एमडीएच के संस्थापक महाशय चुन्नी लाल गुलाटी थे। परिवार ने कुछ समय अमृतसर में एक शरणार्थी शिविर में बिताया था, फिर काम की तलाश में दिल्ली आ गए थे।

कहा जाता है कि महाशय धर्मपाल गुलाटी जब अपने परिवार के साथ भारत आए थे तो उनके पास महज 1,500 रुपये थे। सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले सीईओ भी घोषित किए गए थे घोषित महाशय धर्मपाल का जन्म 27 मार्च, 1923 को सियालकोट ( जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था। साल 1933 में, उन्होंने 5वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने से पहले ही स्कूल छोड़ दी थी। 1959 तक महाशय धर्मपाल ने दिल्ली में चांदनी चौक और करोल बाग में दो से तीन दुकाने मशाले की खोली थीं। उसके बाद 1959 में, गुलाटी ने महाशियां दी हट्टी की निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए कीर्ति नगर में जमीन खरीदी थी।

यहां से इनका बिजनेस बढ़ने लगा था। धीरे धीरे धर्मपाल गुलाटी के मसाले लोगों को इतने पसंद आने लगे कि इनका निर्यात दुनियाभर में होने लगा। साल 2017 में उन्हें इंडिया में किसी भी एफएमसीजी कंपनी का सबसे ज्यादा वेतन पाने वाला सीईओ भी घोषित किया गया था। धर्मपाल गुलाटी ने सिर्फ कक्षा पांचवीं तक पढ़ाई की थी। लेकिन बिजनेस में वो मंझे हुए खिलाड़ी थे। कारोबार में बड़े-बड़े दिग्गजों ने भी उनका लोहा माना है। 

 दिल्ली में तांगा चलाते थे धर्मपाल दिल्ली पहुंचने के बाद परिवार के पालन पोषण के लिए महाशय धर्मपाल गुलाटी ने एक टांगा खरीदा था। जिसको वह दिल्ली के कनॉट प्लेस और करोल बाग के बीच चलाते थे। फिर उन्होंने तांगा बेचकर 1953 में चांदनी चौक में एक दुकान किराए पर लिया था। इस दुकान का नाम उन्होंने महाशिया दी हट्टी (एमडीएच) रखा था। यहीं से इनके मसालों के व्यापार की शरुआत हुई थी। उन्होंने चांदनी चौक के साथ-साथ दिल्ली के करोल बाग स्थित अजमल खां रोड पर भी एक मसाले की एक दुकान खोली थी। 90 फीसदी वेतन का धर्मपाल गुलाटी करते थे दान गुलाटी की कंपनी ब्रिटेन, यूरोप, यूएई, कनाडा आदि सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भारतीय मसालों का निर्यात करती है। 2019 में भारत सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया था। एमडीएच मसाला के अनुसार, धर्मपाल गुलाटी अपने वेतन की लगभग 90 प्रतिशत राशि दान करते थे।

पद्म भूषण महाशय धर्मपाल गुलाटी : जानिए कितनी संपत्ति छोड़ कर गए, हैरान रह जाएंगेनयी दिल्ली। मशहूर मसाला मसाला ब्रांड एमडीएच (Mahashian Di Hatti) के मालिक और सीईओ 'महाशय' धर्मपाल गुलाटी का गुरुवार को 98 वर्ष की आयु में निधन हो गया। मसाला किंग के नाम से मशहूर धर्मपाल गुलाटी का पिछले तीन हफ्तों से दिल्ली के माता चानन देवी अस्पताल में इलाज चल रहा था। बुधवार रात उनकी हालत बिगड़ गई और गुरुवार की सुबह कार्डियक अरेस्ट की वजह से उनका निधन हो गया। एक समय वे दिल्ली की सड़कों पर तांगा चलाया करते थे, मगर मसालों के कारोबार से उनकी किस्मत ऐसी चमकी कि यही मसाले उनके लिए सोना बन गए। अपने मसालों के कारोबार को जमाने के लिए घर्मपाल गुलाटी ने कड़ी मेहनत की थी।

वे करोड़ों की संपत्ति छोड़ कर गए हैं। 1500 रु से करोड़ों रु तक का सफर धर्मपाल गुलाटी की शुरुआत 1500 रु से हुई थी, जो उन्हें अपने पिता से मिले थे। इसमें से 650 रु में उन्होंने एक तांगा खरीदा था ताकि परिवार चला सकें। पर आने वाले जीवन में उन्होंने खूब दौलत कमाई। वे अपने पीछे 940 करोड़ रु की संपत्ति छोड़ कर गए हैं। उन्हें पांचवी कक्षा से ही स्कूल छोड़ना पड़ा था। पाकिस्तान में हुआ था जन्म 'महाशय' के नाम से मशहूर गुलाटी का जन्म 1919 में सियालकोट में हुआ था। ये शहर आज पाकिस्तान के हिस्से वाली पंजाब में है।

वहाँ उनके पिता ने एक छोटी सी दुकान शुरू की थी। मगर 1947 में बंटवारे के बाद उनका परिवार भारत आ गया। उनके परिवार ने दिल्ली का रुख किया। हालांकि दिल्ली आने से पहले वे कुछ समय अमृतसर के रिफ्यूजी कैंप में भी रहे थे। गुलाटी यहां तांगा चलाया करते थे। मगर उनकी किस्मत में कुछ और ही लिखा था। उन्होंने 1953 में दिल्ली के मशहूर इलाके चांदनी चौक में एक दुकान किराए पर ली, जिसका नाम महाशियां दी हट्टी (एमडीएच) रखा। इस दुकान से उन्होंने मसाले बेचने शुरू किए। कहां से की कंपनी की शुरुआत करोल बाग में एक छोटी सी दुकान से 'महाशय' धर्मपाल गुलाटी ने एमडीएच को भारत के प्रमुख मसालों को ब्रांड का रूप दिया। उन्होंने 1959 में आधिकारिक तौर पर अपनी कंपनी की स्थापना की।

फिर एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए उन्होंने कीर्ति नगर में जमीन खरीदी। वर्तमान में एमडीएच, जो लगभग 50 विभिन्न प्रकार के मसाले बनाती है, की देश भर में 15 फैक्ट्रियां हैं और ये दुनिया भर में अपने उत्पाद बेचती हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की 2017 की एक रिपोर्ट के अनुसार धर्मपाल गुलाटी एफएमसीजी क्षेत्र में सबसे अधिक वेतन पाने वाले सीईओ थे। पिछले साल मिला था पद्म भूषण का सम्मान 2019 में भारत सरकार ने गुलाटी को भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से सम्मानित किया था। उनका मसालों का कारोबार भारत में खूब जमा और फिर उन्होंने दूसरे कई देशों में निर्यात भी शुरू किया। वर्तमान में एचडीएच मसाले यूके, यूरोप, यूएई, कनाडा सहित दुनिया के विभिन्न भागों में निर्यात किए जाते हैं। किन चीजों के थे शौकीन गुलाटी ने महाशय चुन्नी लाल चैरिटेबल ट्रस्ट को अपने वेतन का लगभग 90 फीसदी दान में दिया। ये ट्रस्ट दिल्ली में 250 बेड के अस्पताल के साथ-साथ झुग्गियों में रहने वालों के लिए चार स्कूलों और एक मोबाइल अस्पताल संचालित करता है। घर्मपाल गुलाटी को तीन चीजों का खास शौक था। वे कबूतरबाजी, पहलवानी और पतंग उड़ाना पसंद था। वे पंजाबी खानों के शौकीन थे।

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