नजरिया : जो कश्ती बिना मल्लाह के सफर करती है उसका अंजाम भारतीय मुसलमानों जैसा होता है

इमामुद्दीन अलीग देखो भाई, भक्ति हमसे किसी की नहीं होगी, कांग्रेस हो या बीजेपी, आंबेडकर हों या जिनाह, राहुल हों या मोदी, माया हों या अखिलेश, ओवैसी हों या अय्यूब। मैं नज़रिये के आधार पर बात करता हूँ भक्ति के आधार पर नहीं। भारतीय लोकतंत्र के परिपेक्ष्य में मेरा नज़रिया जो कल था वही आज भी है यानि हर कम्युनिटी का अपना राजनीतिक नेतृत्व हो... कोई भी दूसरों के रहमो-करम पर निर्भर न हो. क्योंकि जो कश्ती बिना मल्लाह के सफर करती है उसका अंजाम भारतीय मुसलमानों जैसा होता है। लेकिन कम्बख्तों को आज भी "बीजेपी हराओ देश बचाओ" के सेवा कुछ सुझाई नहीं देता। प्रैक्टिकली हिन्दू राष्ट्र बन चुके हिंदुस्तान के मुसलमान आज भी हिन्दू राष्ट्र के नाम से खौफ खाते हैं.  अरे नासमझो, अगर भारत आधिकारिक रूप से भी हिन्दू राष्ट्र घोषित कर दिया जाता है तो इससे मुसलमानों को ही फायदा होगा. क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के अनुसार किसी भी धार्मिक राज्य में धार्मिक अल्पसंख्यकों की आबादी के अनुपात में उनका कोटा तय करना अनिवार्य होता है... जो नुमाइन्दगी अबतक लोकतंत्र का बहाना बनाकर मारी गई वो हिन्दू राष्ट्र बनने के बाद इन्हें हर हाल में देनी पड़ेगी. यकीन न हो तो पाकिस्तान को देख लीजिये जहाँ अल्पसंख्यकों का कोटा फिक्स है.  इमामुद्दीन अलीग के फेस बुक पेज से साभार  ,लेखक  राजनैतिक चिंतक एवं प्रसिद्ध  पत्रकार हैं 

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