न्यायालय ने कहा; व्यभिचार अब अपराध नहीं, महिला पति की संपत्ति नहीं

पहले क्या था : 158 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता की धारा 497 कहती थी- किसी की पत्नी के साथ अगर उसके पति की सहमति के बिना यौन संबंध बनाए जाते हैं तो इसे व्यभिचार माना जाएगा। इसमें सीआरपीसी की धारा 198 के तहत मुकदमा चलाया जाता था और इसमें अधिकतम पांच साल की सजा का प्रावधान था। पति की शिकायत पर मुकदमे दर्ज होते थे। धारा की व्याख्या ऐसे की जाती थी जैसे महिला अपने पति की संपत्ति हो। विरोध क्यों था : याचिका में दलील दी गई कि आईपीसी की धारा 497 और सीआरपीसी की धारा 198 के तहत व्यभिचार के मामले में सिर्फ पुरुष को ही सजा होती है। यह पुरुषों के साथ भेदभाव है और संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन है। जब शारीरिक संबंध आपसी सहमति से बना हो तो एक पक्ष को जिम्मेदारी से मुक्त रखना इंसाफ के नजरिए से ठीक नहीं है। अब क्या होगा : अब कोर्ट ने आईपीसी की धारा 497 और सीआरपीसी की धारा 198 को खत्म कर दिया है। इसलिए व्यभिचार के मामलों में महिला और पुरुष, दोनों को ही सजा नहीं होगी। हालांकि, कोर्ट ने कहा है कि संबंधित महिला के पति या परिवार की शिकायत के आधार पर इसे तलाक का आधार माना जा सकता है।  

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