मुज़फ्फ़रनगर दंगों के अभियुक्तों का बरी होना चिंताजनक /सादतउल्लाह हुसैनी

नई दिल्ली, 21 जुलाई | जमाअत इस्लामी हिन्द के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने 2013 के मुज़फ्फ़रनगर दंगों के अभियुक्तों के बरी होने पर चिंता व्यक्त की है. मीडिया को जारी अपने बयान में जमाअत अध्यक्ष ने कहा कि, “उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फ़रनगर में 2013 अगस्त-सितम्बर में हुए दंगों में 60 से अधिक लोग मारे गए और 50,000 से अधिक विस्थापित हुए. दंगों के दौरान मुसलमानों के विरुद्ध हत्या, सामूहिक बलात्कार, दंगे और आगज़नी की घटनाएं हुईं. इन घटनाओं से जुड़े 40 मुक़दमें चले. उन 40 मामलों में 4 मामले सामूहिक बलात्कार, 10 मामले हत्या और 26 मामले दंगों से सम्बंधित थे. मीडिया द्वारा एक रिपोर्ट से ये पता चलता है कि जनवरी 2017 से फ़रवरी 2019 तक 40 मामलों में सभी आरोपियों (168 लोग) को लोकल कोर्ट द्वारा बरी कर दिया गया है.” जमाअत इस्लामी हिन्द के अध्यक्ष ने आगे कहा, “अभियुक्तों के बरी होने पर न्यायपालिका द्वारा जो कारण बताया गया है वो इस प्रकार है: 5 अभियोजन पक्ष के गवाह कोर्ट में अपने बयान से पलट गए और उन्होंने कहा कि जब उनके रिश्तेदारों की हत्या हुई तब वो वहां नहीं थे.  जबकि एफ़आईआर का उल्लेख नहीं है.
अभियोजन पक्ष के 6 गवाहों को चालाकी से हटा दिया गया ये कहकर कि पुलिस ने बलपूर्वक उनका नाम सादे कागज़ पर हस्ताक्षर कराया था. पांच मामलों में पुलिस हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार कोर्ट के सामने प्रस्तुत नहीं कर सकी.?
सआदतुल्लाह हुसैनी ने आगे कहा, “हम यह जानना चाहते हैं कि अभियोजन पक्ष ने इस मामले में कभी भी पुलिस से कोई जिरह क्यों नहीं किया और सभी 40 मामलों में बरी होने के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार उन्हेंउच्च न्यायालयों में चुनौती देने की योजना क्यों नहीं बना रही है. सरकारी वकील द्वारामुज़फ़्फ़रनगर मामले में बरी किये गए दोषियों को चुनौती देने में असमर्थता जताने का कारण समझ से परे है और सरकार का यह रवैया पीड़ितों और उनके परिवारों को अच्छा सन्देश नहीं देगा. ये सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह अपने सभी नागरिकों को जाति और धर्म के भेद के बिना न्याय दिलाए.हम मांग करते हैं कि उत्तर प्रदेशसरकार को बरी होने वालोंको उच्च न्यायालयों में चुनौती देनी चाहिए और यदि उत्तर प्रदेशसरकार ऐसा नहीं करती हैतो सभी न्यायप्रिय लोगों और संगठनों की येज़िम्मेदारी होगी कि वे उत्तर प्रदेश सरकार को मनाने के लिए सभी कानूनी विकल्पों पर गौर कर  मुज़फ्फरनगर के पीड़ितों के लिएन्यायसुनिश्चित करें.”  

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