मॉबलॉन्चिंग पर कानून बनाए संसद - सुप्रीम कोर्ट

गोरक्षकों द्वारा हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग पर फैसला सुनाते हुए कहा कि देश में कोई नागरिक अपने हाथ में कानून नहीं ले सकता। कोई भी अपने आप में कानून नहीं हो सकता है। देश में मॉबोक्रेसी की इजाजत नहीं दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून व्यस्था बनाये रखना राज्य सरकारों का फर्ज है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संसद इसके लिए कानून बनाए, जिसके भीड़ द्वारा हत्या के लिए सजा का प्रावधान हो। फैसला पढ़ते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मॉबोक्रेसी को  बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और इसे नया नियम नहीं बनने दिया जा सकता है। इससे सख्ती से निपटना होगा। सुप्रीम कोर्ट में एक गाइडलाइंस जारी करते हुए सभी राज्यों को इसको चार हफ्ते में लागू करने को कहा।इस मामले की अगली सुनवाई अगस्त में होगी। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस की मुख्य बातें 
  • हर जिले में एसपी स्तर के अधिकारी को नोडल अफसर नियुक्त किया जाए, जो स्पेशल टास्क फोर्स बनाए
  • DSP स्तर का अफसर मॉब हिंसा और लिंचिंग को रोकने में सहयोग करेगा
  • एक स्पेशल टास्क फोर्स होगी जो इंटेलिजेंस सूचना इक्‍ट्ठा करेगी
  • हिंसक भीड़ को बिखेरे पुलिस अगर ऐसा करने में विफल हो तो उक्त अधिकारी के खिलाफ केस दर्ज हो
  • सरकार मॉब द्वारा हिंसा के खिलाफ रेडियो/टीवी आदि से जागरूकता फैलाये
  • फेक न्यूज, भड़काऊ मैसेज/वीडियो फैलाने पर रोकथाम के लिए ज़रूरी कदम उठाएं
  • ऐसे मामलों में 153 A या अन्य धाराओं में FIR हो, 6 महीने में मुकदमे का निपटारा किया जाए
  • वक्त पर चार्जशीट दाखिल हो, नोडल अफसर निगरानी करें
  • नोडल ऑफिसर लोकल इंटेलिजेंस के साथ मीटिंग करें। डीजीपी और होम सेक्रेटरी नोडल अफसर से मीटिंग करें
  • केंद्र और राज्य आपस मे समन्वय रखें
  • राज्य सरकार भीड़ हिंसा पीड़ित मुआवजा योजना बनाएं और चोट के मुताबिक मुआवजा राशि तय करें
  • पीड़ित के वकील का खर्च सरकार वहन करे
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को इन दिशानिर्देशों  को चार हफ्ते के भीतर लागू करने का आदेश दिया।  

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