मिशेल ओबामा लड़ सकती हैं चुनाव:डेमोक्रेटिक पार्टी में बाइडेन की मेंटल हेल्थ पर सवालिया निशान; हिलेरी क्लिंटन ने भी बचाव नहीं किया
अमेरिका में इस साल के आखिर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में एक सरप्राइज एंट्री हो सकती है। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक प्रेसिडेंट जो बाइडेन ऐन वक्त पर दावेदारी छोड़ सकते हैं और उनकी जगह पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की पत्नी मिशेल ओबामा डेमोक्रेटिक पार्टी से कैंडिडेट बनाई जा सकती हैं।
दरअसल, हाल ही में स्पेशल काउंसिल रॉबर्ट हुर की एक रिपोर्ट सामने आई थी। इसमें साफ कहा गया है कि बाइडेन मेंटली और फिजिकली स्ट्रगल कर रहे हैं। लिहाजा, उनका इलेक्शन लड़ना सही नहीं होगा।
बाइडेन ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा था- उम्र के साथ कुछ दिक्कतें हो जाती हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि मैं फिट नहीं हूं।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि डेमोक्रेटिक पार्टी बराक ओबामा की पॉपुलैरिटी को भुनाने के लिए मिशेल को प्रेसिडेंशियल कैंडिडेट बना सकती है। (फाइल)
रामास्वामी ने भी मिशेल का नाम लिया
- रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से विवेक रामास्वामी भी प्रेसिडेंशियल कैंडिडेट बनने की रेस में शामिल थे। बाद में उन्होंने डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थन में नाम वापस ले लिया था। 9 फरवरी को विवेक ने डेमोक्रेट कैंडिडेट के बारे में चौंकाने वाला खुलासा किया।
- विवेक ने कहा- डेमोक्रेटिक पार्टी बाइडेन की जगह मिशेल ओबामा को प्रेसिडेंशियल कैंडिडेट बनाने पर विचार कर रही है। यह फैसला स्पेशल काउंसिल रॉबर्ट हुर की रिपोर्ट सामने आने के बाद किया गया है। सबने देखा है कि रिपोर्ट में बाइडेन की मेंटल और फिजिकल हेल्थ को लेकर कितने गंभीर सवालिया निशान लगाए गए हैं। हालांकि हमारी बेस्ट विशेज प्रेसिडेंट के साथ हैं, लेकिन उनकी मेमोरी को लेकर जो कुछ कहा गया है, वो सही है। लिहाजा, कोई भी इस रिपोर्ट को खारिज नहीं कर सकता।
- पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने भी बाइडेन की मेंटल और फिजिकल एबिलिटी को लेकर सवाल उठाए हैं। क्लिंटन ने एक इंटरव्यू में माना कि अगर डेमोक्रेट्स बाइडेन को ही कैंडिडेट बनाते हैं तो इसका सीधा फायदा ट्रम्प को होगा। इसलिए बाइडेन का विकल्प तलाशना जरूरी है।
- रामास्वामी ने कहा- 81 साल के बाइडेन खुद को कितना ही फिट बताने की कोशिश करें, लेकिन यह तो साफ हो चुका है कि सेंसिटिव डॉक्यूमेंट्स उनके घर से बरामद किए गए हैं। अब उनकी जगह अगर मिशेल ओबामा का नाम सामने आ रहा है तो इसमें कुछ गलत नहीं है।

रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से ट्रम्प का कैंडिडेट बनना तय माना जा रहा है। हालांकि उनके भविष्य का फैसला बहुत हद तक फेडरल सुप्रीम कोर्ट के हाथों में है। (फाइल)
कमला हैरिस का क्या होगा
- रिपोर्ट के मुताबिक मिशेल को अगर कैंडिडेट बनाया जाता है तो वाइस प्रेसिडेंट कमला हैरिस का मुद्दा जरूर उठेगा। उन्हें साइड लाइन करना इतना आसान नहीं होगा। उनका दावा बहुत मजबूत है और पार्टी पर उनकी पकड़ बाइडेन से कहीं ज्यादा मजबूत होती जा रही है। इस बारे में पूछे गए सवाल पर रामास्वामी ने कहा- मुझे नहीं लगता कि कमला को प्रेसिडेंशियल कैंडिडेट बनाया जाएगा। कोई चौंकाने वाला नाम सामने आ सकता है।
- रामास्वामी कहते हैं- डेमोक्रेटिक पार्टी के मेरे सूत्र बताते हैं कि बाइडेन अभी भले ही रेस में नजर आ रहे हों, लेकिन वो भी जानते हैं कि आखिरकार वो इलेक्शन नहीं लड़ पाएंगे और ऐन वक्त पर उनकी जगह कोई और लीडर सामने आएगा।

नेवादा में पिछले हफ्ते स्पीच के दौरान बाइडेन ने कई मिनट तक फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रेंकोइस मिटरेंड से बातचीत का जिक्र किया था। फ्रेंकोइस का 1996 में निधन हो चुका है।
पिछड़ रहे हैं बाइडेन
- अमेरिकी राष्ट्रपति की मेंटल फिटनेस पर कई बार सवालिया निशान लगे हैं। फरवरी के पहले हफ्ते में नेवादा में डेमोक्रेटिक पार्टी की रैली के दौरान बाइडेन ने कई मिनट तक फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रेंकोइस मिटरेंड से बातचीत का जिक्र किया था। फ्रेंकोइस का 1996 में निधन हो चुका है।
- इसी दौरान एनबीसी न्यूज का एक नया सर्वे भी सामने आया। इसके मुताबिक प्रेसिडेंशियल कैंडिडेट की पॉपुलैरिटी रेस में बाइडेन पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से दोगुने वोट से पिछड़ रहे हैं। ट्रम्प रिपब्लिकन पार्टी में भी सबसे आगे चल रहे हैं।
- अमेरिकी वेबसाइट ‘द हिल’ की रिपोर्ट के मुताबिक लास वेगास की इस रैली में बाइडेन ने दो गलतियां कीं। पहली- फ्रांस के उस राष्ट्रपति का जिक्र किया, जिनका 30 साल पहले निधन हो चुका है। दूसरी- उस इवेंट के बारे में भी कन्फ्यूज हो गए, जिसका वो जिक्र कर रहे थे। इतना ही नहीं, वो फ्रांस को जर्मनी भी बोल गए।
- प्रेसिडेंट बाइडेन ने कहा- हाल ही में मेरी मुलाकात फ्रेंच प्रेसिडेंट फ्रेंकोइस मिटरेंड से हुई। मैंने उनसे कहा- अमेरिका अब वर्ल्ड स्टेज पर वापसी कर चुका है और जर्मन चांसलर मिटरेंड....माफ कीजिएगा फ्रांस... ने मेरी तरफ देखा और कहा...। रिपोर्ट के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब बाइडेन ने ‘अमेरिका इज बैक’ का जिक्र किया हो। 2020 में इलेक्शन जीतने के बाद से ही बाइडेन इस स्लोगन को दोहराते आए हैं।
- दरअसल, बाइडेन ब्रिटेन में 2021 में हुई जी-20 समिट के बारे में बताना चाहते थे, उस वक्त उन्होंने पद संभाला ही था। इस समिट के दौरान उनकी मुलाकात फ्रेंच प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों से हुई थी और उन्होंने मैक्रों को अमेरिकी ताकत का एहसास कराने के लिए ‘अमेरिका इज बैक’ स्लोगन सुनाया था।

रिपब्लिकन पार्टी के प्रेसिडेंशियल कैंडिडेटट की रेस से खुद को अलग कर चुके विवेक रामास्वामी का दावा है कि डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से चौंकाने वाला नाम सामने आने वाला है।
मैक्रों से चिढ़ गए थे बाइडेन
- बाइडेन जिस बातचीत का जिक्र वोटर्स के सामने कर रहे थे, उसमें मैक्रों की एक बात पर अमेरिकी राष्ट्रपति चिढ़ गए थे। दरअसल, हुआ ये कि जब बाइडेन ने मैक्रों के सामने यह जताना चाहा कि उनके प्रेसिडेंट बनने के साथ ही अमेरिका एक बार फिर वर्ल्ड सुपर पावर बनेगा तो मैक्रों ने इस पर चुटकी ली। मैक्रों ने कहा था- कल्पना कीजिए कि अगर ब्रिटेन की संसद पर हजारों लोग हमला कर दें और दो लोगों को मार डालें तो क्या रिएक्शन होगा? वो प्राइम मिनिस्टर का इलेक्शन प्रोसेस रोक दें तो क्या होगा।
- दरअसल, मैक्रों उस वक्त नए-नए राष्ट्रपति चुने गए बाइडेन को यह इशारा कर रहे थे कि ट्रम्प समर्थकों ने अमेरिकी संसद (कैपिटॉल हिल) पर हमला किया था तो अमेरिका उन्हें रोक नहीं पाया था। जब आप अपनी संसद की हिफाजत नहीं कर सकते तो सुपर पावर होने का दावा क्यों करते हैं।
- बहरहाल, बाइडेन ने जिन फ्रेंकोइस मिटरेंड का जिक्र किया वो 1981 से 1995 के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति रहे। 1996 में उनका निधन हो गया था।

निक्की हेली और ट्रम्प का मुकाबला इसी हफ्ते साउथ कैरोलिना में होगा। इसे निक्की का गढ़ माना जाता है। लिहाजा, यहां कांटे की टक्कर होना तय माना जा रहा है। (फाइल)
ट्रम्प का पलड़ा भारी
- अमेरिकी न्यूज चैनल ‘एनबीसी न्यूज’ के हालिया पोल के मुताबिक प्रेसिडेंट बाइडेन इस वक्त रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से प्रेसिडेंशियल कैंडिडेट बनने की रेस में सबसे आगे चल रहे पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से दोगुने वोटों से पीछे हैं।
- इस सर्वे में अलग-अलग टॉपिक्स पर सवाल पूछे गए थे और खास बात ये है कि बाइडेन हर मुद्दे पर ट्रम्प से पीछे नजर आए। अमेरिका में अवैध आप्रवासन यानी इल्लीगल इमीग्रेशन का मुद्दा छाया हुआ है। खास तौर पर मेक्सिको बॉर्डर से आने वाले लोगों को लेकर अमेरिकी अपनी सरकार से खासे नाराज हैं। उनका आरोप है कि इससे ड्रग स्मगलिंग और दूसरे क्राइम तेजी से बढ़े हैं।
- इस मुद्दे पर बाइडेन को सिर्फ 23% वोट मिले। दूसरी तरफ, ट्रम्प 46% वोट के साथ बहुत आगे थे। इकोनॉमी, फॉरेन पॉलिसी और एजुकेशन के मुद्दे पर भी बाइडेन इस वक्त ट्रम्प से पीछे चल रहे हैं।

0 comments