लोगों की भूख मिटाता एक फरिश्ता
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समाज सेवा:- जिस देश में आधी आबादी भूख से तड़प और बिलख रही हो उस देश की तरक्की नामुमकिन है। यहां बात किसी और देश की नही हमारे भारत की ही हो रही है। हमारे देश के नेताओं का नाकारापन ही है जो आज भी करोड़ों लोगों को भूख की वजह से दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर करता है। ऐसे भयानक माहौल में भी कुछ लोग आज भी मौजूद है जो इन भूखे लोगों के लिए फरिश्ता बन के रहमत ले कर आते हैं। ऐसा ही एक नाम है शमीम अहमद।
पश्चिम बंगाल का एक जाना पहचाना नाम जो समाज सेवा के सेक्टर में किसी भी पहचान का मोहताज नही है। ऐसे माहौल में जहां कोई एक आदमी को फ्री में खाना नही खिलाता वहां शमीम अहमद रोजाना 300-400 लोगों के खाने का बंदोबस्त करते हैं और लोगों की भूख मिटाते हैं।

शमीम अहमद से मुलाकात करने पर पता चलता है के वो ये सब किसी मकसद के लिए नहीं लोगों की सच्चे दिल से सेवा करने के लिए करते हैं। उनका मानना है इस दुनिया में हजारों लोग हैं मगर खुदा उनसे काम नही लेता मगर ये खुदा की रहमत ही है कि उसने इस नेक काम का जरिया उनको बनाया है। इस भूख मिटाने की मुहिम में हज़ारों लोग उनके साथ है और रोजाना सैंकड़ों और लोग साथ आ रहे हैं।
ये जमाना जिसमें लोग खुद तक सीमित होते जा रहे हैं उसमें शमीम अहमद जैसे लोग इस समाज के लिये एक मिसाल और आईना है के आज भी इस समाज में इंसानियत जिंदा है जो भूखों को खाना खिलाना अपना धर्म और कर्तव्य समझती है।
ऐसे मिसाली लोगों को एशिया टाइम्स की तरफ से सलाम
पश्चिम बंगाल का एक जाना पहचाना नाम जो समाज सेवा के सेक्टर में किसी भी पहचान का मोहताज नही है। ऐसे माहौल में जहां कोई एक आदमी को फ्री में खाना नही खिलाता वहां शमीम अहमद रोजाना 300-400 लोगों के खाने का बंदोबस्त करते हैं और लोगों की भूख मिटाते हैं।

शमीम अहमद से मुलाकात करने पर पता चलता है के वो ये सब किसी मकसद के लिए नहीं लोगों की सच्चे दिल से सेवा करने के लिए करते हैं। उनका मानना है इस दुनिया में हजारों लोग हैं मगर खुदा उनसे काम नही लेता मगर ये खुदा की रहमत ही है कि उसने इस नेक काम का जरिया उनको बनाया है। इस भूख मिटाने की मुहिम में हज़ारों लोग उनके साथ है और रोजाना सैंकड़ों और लोग साथ आ रहे हैं।
ये जमाना जिसमें लोग खुद तक सीमित होते जा रहे हैं उसमें शमीम अहमद जैसे लोग इस समाज के लिये एक मिसाल और आईना है के आज भी इस समाज में इंसानियत जिंदा है जो भूखों को खाना खिलाना अपना धर्म और कर्तव्य समझती है।
ऐसे मिसाली लोगों को एशिया टाइम्स की तरफ से सलाम

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