क्या समलैंगिकता शरियत का मामला नही है?

विचार विमर्श:- सुप्रीम कोर्ट समलैंगिकता पर पुनर्विचार के लिये तैयार है, क्या ये शरीयत का मामला नहीं? क्या समलैंगिकता के हित में क़ानून शरीयत हित में है? जो आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और मुस्लिम संगठन मौन धारण किये बैठी है? क्या दीन और शरियत का दायरा सीमित है जो सिर्फ़ नमाज़ रोज़ा हज ज़कात और निकाह तलाक़ से बहस करता है जो AIMPLB को इन्हीं मामलों में जोश आता है??? क्या समलैंगिकता के हित में क़ानून से शरई क़ानून पर कोई आँच नहीं आती?
अगर इस तरह से सवाल उठा सकते हों तो आप भी उठाएं,... ये बोदी मज़हबी सियासत नहीं चलेगी, अगर इस्लाम और शरीयत की बात करनी है तो जामे तरीक़े से की जाए, ये दीन किसी मज़हबी चोचलेबाज़ी का नाम नहीं, ये पूरा का पूरा मोकम्मल निज़ाम ए हयात है। https://youtu.be/j5xBOEti8x0 अगर हालात में तब्दीली चाहते हैं तो साहबए मसनद से सवाल लाज़िम है... वर्ना भक्त बने रहिए.... भक्ति चालू रखये (ये लेखक के निजी विचार हैं) Tarique Jamal

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