खाप पंचायत द्वारा दो वयस्कों की शादी को रोकना गैरकानूनी - SC
सुप्रीम कोर्ट ने ऑनर किलिंग और खाप पंचायत से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए आज बड़ा फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खाप पंचायत या किसी समूह द्वारा दो व्यस्कों की शादी को रोकना पूरी तरह गैरकानूनी है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों की रोकथाम और सजा के लिए गाइडलाइन जारी की हैं। कोर्ट ने कहा कि ये गाइडलाइन तब तक जारी रहेंगी जब तक कानून नहीं आता है।
ऑनर किलिंग मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ऑनर किलिंग IPC में हत्या के अपराध के तहत कवर होती है। ऑनर किलिंग को लेकर लॉ कमिशन की सिफारिशों पर विचार हो रहा है। इस संबंध में 23 राज्यों के विचार प्राप्त हो चुके हैं। 6 राज्यों के विचार आने बाकी है।
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र ने कहा कि कोर्ट सभी राज्यों को हर जिले में ऑनर किलिंग को रोकने के लिए स्पेशल सेल बनाने के निर्देश जारी करे। अगर कोई युगल शादी करना चाहता है और उसे जान का खतरा है, तो राज्य उनके बयान दर्ज कर कार्रवाई करे। केंद्र ने कहा कि वो खाप पंचायत शब्द का इस्तेमाल नहीं करेगा।
सुप्रीम कोर्ट में एक एनजीओ ने ऑनर किलिंग की घटनाओं को रोकने, खाप पंचायतों द्वारा मानवाधिकारों का उल्लंघन और शादी करने के इच्छुक वयस्कों के सम्मान की रक्षा करने के लिए एक अर्ज़ी लगाई थी।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से कानून बनाए जाने तक गाइडलाइन जारी की है। गाइडलाइन में कहा गया है कि सभी राज्य सरकारें पिछले पांच साल के दौरान जिन गांवों और जिलों में ऑनर किलिंग हुई है उनकी पहचान करें। सभी प्रभावित राज्यों के गृह सचिव इस बारे में संबंधित जिलों के SP को निर्देश दें कि वो उन पुलिस थानों की पहचान कर विशेष ध्यान दें। जहाँ अंतरजातीय विवाह हो रहे हैं। कहीं भी खाप पंचायत होने की सूचना मिलते ही बड़े अधिकारियों के साथ ही SP और DSP को भी सूचित किया जाए। सूचना मिलने के फौरन बाद DCP खाप पंचायत के लोगों से संपर्क करें और अगर शादी (अंतरजातीय) को लेकर पंचायत हो रही है तो उन्हें समझाया जाए। अधिकारी बताएं कि इस विषय पर इस तरह की मीटिंग करने की अनुमति नहीं है. उनको रोकने के लिए पंचायत वाली जगह पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात की जाए।
गाइडलाइन में कहा गया कि अगर मना करने के बाद भी कोई मीटिंग होती है, तो कानून के तहत कार्रवाई की जाए और अफसर पूरी पंचायत की वीडियो रिकॉर्डिंग करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर DSP को भरोसा हो जाए कि समझाने के बाद वो नहीं मानेंगे, तो SDM, SP को सूचित करें ताकि समय रहते हुए धारा 144 लगाई जा सके और धारा 151 के तहत गिरफ्तारी की जा सके। पुलिस को ये भरोसा हो जाए कि शादी करने वाले जोड़े और परिवार वालों को खतरा हो सकता है, तो तुरंत DM, SDM को सूचित करें ताकि एहतियात के तौर पर कुछ उपाय किया जा सकें।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन में पुलिस के सुरक्षा उपायों के लागू करने के बाद भी खाप पंचायत होती है और पंचायत आदेश जारी करती है, तो पुलिस तुरंत धारा 141, 143, 503 और 506 के तहत FIR दर्ज करे। FIR दर्ज होते ही इसकी सूचना SP, DSP को दी जाए। जोड़े और उनके परिवार वालों को तुरंत सुरक्षा मुहैया कराई जाए. सुरक्षित घर जिले में दिए जाएं। हर जिले में सुरक्षित घर बनाए जा सकते हैं. इन सुरक्षित घरों में वो कपल रहेंगे जिनके शादी के खिलाफ परिवार वाले, पंचायत या दूसरे लोग हैं. ये सुरक्षित घर SP और DM के निगरानी में चलेंगे।

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