कल तक भिखारी था आज दूकानदार बन गया
नई दिल्ली : (एशिया टाइम्स ) मस्जिद और मंदिर के साम नेखड़े भिकरियों के हाथ में भीक के चाँद सिक्के नहीं काम दें .समाज सेवा सिर्फ लोगों को आर्थिक मदद ही नही होती है बल्कि उनकी सोच को सही दिशा देना और उसे आगे बढ़ाना भी होता है| हम लोग हर साल कम्बल राशन बांटने में करोड़ों खर्च कर देते हैं .और एक आदमी जो कल गरीब था आज भी हमें वहीं मिलता है , मस्जिद व मंदिर की सीढ़ियों पर खड़े बूढ़े को आप आज 10 रूए देकर अपनी राह लेते हैं क्या कभी आप ने सोचा कल आप की जगह आप का बेटा होगा और उस बूढ़े फकीत की जगह उसका बेटा खड़ा मिलेगा . समाज को मजबूत देखना है तो कुछ प्लानिंग से कम कीजये कहीं दूर जाने की ज़रुरत नहीं अपने पड़ोस में ज़रुरत मंद तलाश कीजिये और उनको मज़बूत कीजये उनको गरीबी के दलदल से निकालिए यही आप की ज़िम्मेदारी है
सबसे बड़ा समाज कल्याण तो ये है की एक गरीब को इतना होंसला दिया जाए कि वो इंसान खुद अपनी तक़दीर को बदलने के लिए कोशिश करे और अपनी नई किस्मत लिखे
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