हाथरस कांड कवर करने जा रहे पत्रकार सिद्दिकी कप्पन को कब मिलेगी बेल? 41 दिन से हैं जेल में बंद

नई दिल्ली। रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी को सात दिन के अंदर ही सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने के बाद पत्रकारों की स्वतंत्रता व उनपर लगाए आरोपों पर बहस शुरू हो गई है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पत्रकार का मामला सामने आया जिसमें उनके केस की पंद्रह महीने बाद पहली सुनवाई हुई। अब एक और ऐसे ही पत्रकार का नाम सामने आया है जो 41 दिन से जेल में बंद हैं। इनका नाम है सिद्दिकी कप्पन। 

सिद्दिकी कप्पन मलयालम न्यूज वेबसाइट Azhimukham में कार्यरत हैं और पांच अक्टूबर, 2020 को उन्हें यूपी के मथुरा में अरेस्ट कर लिया गया था। वह उस दौरान हाथरस जा रहे थे, जहां 19 साल की एक दलित युवती की कथित रूप से गैंगरेप हुआ था। बाद में उस लड़की की दिल्ली के अस्पताल में मौत हो गई थी। छह अक्टूबर को केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ) की ओर से मामले में एक याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर सोमवार को सुनवाई है।

41 दिन बाद भी पत्रकार को न्याय न मिलने के मामले पर पीड़ित परिवार ने कहा, “यह दर्दनाक इंतजार है।” कप्पन दिल्ली में रहकर काम करते थे, पर फिलहाल यूपी की मथुरा की जेल में हैं। उनका परिवार केरल के मल्लापुरम में रहता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पत्नी रेहाना (37) ने बताया, “यह सुनने के बाद कि अर्णब को बेल मिल गई है, मैं यह सोचने पर मजबूर हो गई कि मेरे पति को न्याय नहीं दिया गया। गिरफ्तारी के बाद कोर्ट और जेल प्रशासन ने हमें उनसे (पति) से मिलने तक नहीं दिया है। हमें उनके बारे में कुछ नहीं पता है। एक शब्द तक सुनने को नहीं मिला, ये कितना भयावह है। हम न्यायपालिका और विभिन्न स्तर पर सरकार के पास गए, पर हमें न्याय मिलना अभी बाकी है। क्या हम इस देश के नागरिक नहीं हैं?”

रेहाना के मुताबिक, सिद्दीकी की 90 साल की मां खदीजा को उनकी गिरफ्तारी के बारे में नहीं मालूम है। हमने उन्हें बताया है कि सिद्दीकी दिल्ली में हैं और वह घर जल्द आएंगे। हम खुशकिस्मत हैं कि उनमें Alzheimer (भूलने की बीमारी) के लक्षण हैं। जब भी वह उनके बारे में पूछती हैं, तो हम उनसे कह देते हैं कि कल जब आप सो रही थीं, तब हमने उनसे (सिद्दीकी) बात की थी।नई दिल्ली। रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी को सात दिन के अंदर ही सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने के बाद पत्रकारों की स्वतंत्रता व उनपर लगाए आरोपों पर बहस शुरू हो गई है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पत्रकार का मामला सामने आया जिसमें उनके केस की पंद्रह महीने बाद पहली सुनवाई हुई। अब एक और ऐसे ही पत्रकार का नाम सामने आया है जो 41 दिन से जेल में बंद हैं। इनका नाम है सिद्की कप्पन। 

सिद्दकी कप्पन मलयालम न्यूज वेबसाइट Azhimukham में कार्यरत हैं और पांच अक्टूबर, 2020 को उन्हें यूपी के मथुरा में अरेस्ट कर लिया गया था। वह उस दौरान हाथरस जा रहे थे, जहां 19 साल की एक दलित युवती की कथित रूप से गैंगरेप हुआ था। बाद में उस लड़की की दिल्ली के अस्पताल में मौत हो गई थी। छह अक्टूबर को केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ) की ओर से मामले में एक याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर सोमवार को सुनवाई है।

41 दिन बाद भी पत्रकार को न्याय न मिलने के मामले पर पीड़ित परिवार ने कहा, “यह दर्दनाक इंतजार है।” कप्पन दिल्ली में रहकर काम करते थे, पर फिलहाल यूपी की मथुरा की जेल में हैं। उनका परिवार केरल के मल्लापुरम में रहता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पत्नी रेहाना (37) ने बताया, “यह सुनने के बाद कि अर्णब को बेल मिल गई है, मैं यह सोचने पर मजबूर हो गई कि मेरे पति को न्याय नहीं दिया गया। गिरफ्तारी के बाद कोर्ट और जेल प्रशासन ने हमें उनसे (पति) से मिलने तक नहीं दिया है। हमें उनके बारे में कुछ नहीं पता है। एक शब्द तक सुनने को नहीं मिला, ये कितना भयावह है। हम न्यायपालिका और विभिन्न स्तर पर सरकार के पास गए, पर हमें न्याय मिलना अभी बाकी है। क्या हम इस देश के नागरिक नहीं हैं?”

रेहाना के मुताबिक, सिद्दीकी की 90 साल की मां खदीजा को उनकी गिरफ्तारी के बारे में नहीं मालूम है। हमने उन्हें बताया है कि सिद्दीकी दिल्ली में हैं और वह घर जल्द आएंगे। हम खुशकिस्मत हैं कि उनमें Alzheimer (भूलने की बीमारी) के लक्षण हैं। जब भी वह उनके बारे में पूछती हैं, तो हम उनसे कह देते हैं कि कल जब आप सो रही थीं, तब हमने उनसे (सिद्दीकी) बात की थी।

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