जमीयत उलमा ए हिन्द ने SC में बहु विवाह और निकाह हलाला के मुद्दे पर सुनवाई का किया विरोध

जमीयत उलमा ए हिन्द ने SC मे अर्जी दे मुसलमानों मे प्रचलित निकाह हलाला और बहु विवाह के मामले मे पक्षकार बनाने और उनका भी पक्ष सुनने का किया अनुरोध ,  जमीयत ने अर्जी मे SC के बहु विवाह और निकाह हलाला के मुद्दे पर सुनवाई का किया विरोध, जमीयत ने अर्जी मे कहा मुस्लिम पर्सनल ला क़ुरान और हदीस पर आधारित है, ऐसे मे उसे संविधान के अनुच्छेद 13 के तहत लागू कानून नही कहा जा सकता पर्सनल ला को मौलिक अधिकारों के हनन के आधार पर चुनौती नही दी जा सकतीजमीयत ने अर्जी मे कहा है कि संविधान का अनुच्छेद 44 सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता की बात करता है लेकिन ये अनुच्छेद सिर्फ राज्य के नीति निदेशक तत्व का हिस्सा है ये ज़रूर लागू नही कराया जा सकता जमीयत ने अर्जी मे कहा है कि अनुच्छेद 44 इसके साथ ही सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू होने तक विभिन्न धर्मों के पर्सनल ला के लागू रहने की इजाज़त देता है जमीयत ने हलाला और बहुविवाह पर कोर्ट की सुनवाई का विरोध करते हुए कहा है कि संविधान निर्माता सभी के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने की दिक़्क़तों से वाक़िफ़ थे इसलिए उन्होंने जानबूझकर पर्सनल ला को नहीं छेड़ा और कामन सिविल कोड को नीतिनिदेशक भाग मे रखा जमीयत ने कोर्ट के पूर्व फ़ैसलों का हवाला देते हुए मुसलमानों मे प्रचलित निकाह हलाला और बहु विवाह पर विचार न करने का कोर्ट से अनुरोध किया है जमीयत ने ये अर्जी नफ़ीसा खान की याचिका मे पक्षकार बनाए जाने के लिए दाखिल की है। कहा है कि उनका संगठन इस्लाम की संस्क्रति और परंपरा के संरक्षण के लिए काम करता है इसलिए मामले मे उन्हें भी पक्ष रखने का मौक़ा दिया जाए नफ़ीसा खान और तीन अन्य ने सुप्रीम कोर्ट मे मुसलमानों मे प्रचलित निकाह हलाला और बहुविवाह के प्रचलन को चुनौती दी है। कोर्ट ने 26 मार्च को याचिका पर केन्द्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामला पाँच जजो की संविधान पीठ को सुनवाई के लिए भेज दिया था।  

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