जमाअत इस्लामी हिंद ने AMU के माइनॉरिटी स्टेटस और विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की

नई दिल्ली | अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि एएमयू में मौजूद इमारतें सिर्फ बिल्डिंग नहीं हैं, इसके साथ शिक्षा का जो इतिहास जुड़ा है वो भारत की अमूल्य धरोहर है. अपने 100 वर्ष के इतिहास में एएमयू ने लाखों जीवन को तराशा है, संवारा है. प्रधानमंत्री के इस संबोधन के बाद जमाअत इस्लामी हिन्द ने भी AMU के योगदान की सराहना करते हुए सरकार से AMU के लिए विशेष आर्थिक पैकेज और माइनॉरिटी स्टेटस की मांग की है.

जमाअत इस्लामी हिन्द के अध्यक्ष ने कहा है कि, AMU अपने विस्तार के लिए और अपने शोध कार्य को बेहतर बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों से विशेष पैकेज का हकदार है.

उन्होंने कहा कि, “एएमयू के माइनॉरिटी स्टेटस और मुस्लिम संस्कृति के केंद्र के रूप में इसकी स्थिति को सुरक्षित और संरक्षित रखने की आवश्यकता है.”  

जमाअत इस्लामी के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने AMU शताब्दी समारोह के अवसर पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिख कर छात्रों, शिक्षकों और एएमयू के पूर्व छात्रों को बधाई देते हुए भविष्य में विश्वविद्यालय के प्रगति की कामना की है.

उन्होंने इस बात की उम्मीद जताई है की कि एएमयू दुनिया के शीर्ष दस विश्वविद्यालयों में शुमार होगा.

जमाअत इस्लामी हिन्द भारत का एक प्रमुख मुस्लिम धार्मिक सामाजिक संगठन है जो पिछले कई दशकों से  शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से समाज में शांति और सौहार्द स्थापित करने के लिए प्रयासरत है.

जमाअत इस्लामी हिंद (JIH) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा है कि, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने शिक्षा और शोध में दुनियाभर में अपना एक अलग मकाम हासिल किया है.

उन्होंने कहा कि, “एएमयू ने शिक्षा और अनुसंधान में 100 साल के बहुमूल्य योगदान की गौरवपूर्ण यात्रा संपन्न की है. मैं AMU प्रशासन, छात्रों, पूर्व छात्रों के साथ-साथ सभी देशवासियों को मुबारकबाद पेश करता हूं.”

साथ ही हुसैनी ने AMU की अकादमिक यात्रा को भविष्य में और अधिक प्रभावशाली व पथ-प्रदर्शक होने की उम्मीद जताई है.

शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की सेवाओं को स्वीकार करते हुए, हुसैनी ने कहा, “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध की दिशा में AMU का योगदान दुनियाभर में स्वीकार किया गया है.  सीखने की ललक ने कई बुद्धिजीवियों और विद्वानों को यहां जन्म दिया है, जो दुनिया भर में मानवता की सेवा कर रहे हैं और जो विश्वविद्यालय की समावेशी संस्था होने की पहचान है.”

जमाअत इस्लामी प्रमुख ने कहा कि, “निश्चित रूप से AMU बहुलवादी संस्कृति का एक प्रतीक है. विश्वविद्यालय ने हमेशा मुस्लिम अल्पसंख्यक के शैक्षिक विकास और अपने सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने और अपने अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.”

अपनी असाधारण क्षमताओं के माध्यम से देश के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए युनिवर्सिटी के योगदान को याद करते हुए, जमाअत इस्लामी हिन्द के अध्यक्ष ने भारत सरकार को अल्पसंख्यकों की शैक्षिक उन्नति के लिए उनकी जिम्मेदारी पर ध्यान आकर्षित कराया है.

उन्होंने कहा, “अल्पसंख्यकों की शैक्षिक उन्नति और सांस्कृतिक अधिकारों की संवैधानिक गारंटी के लिए सरकार को उन संस्थानों पर ध्यान देना चाहिए, जिनमें अल्पसंख्यक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. सरकार को समय-समय पर एएमयू के अल्पसंख्यक चरित्र को खत्म करने की कोशिश से बचना चाहिए.”

उन्होंने सरकार से देश भर के विभिन्न शहरों में विश्वविद्यालय के अधिक परिसरों की स्थापना करने की मांग की।

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