इश्क़ में इंग्लिश होना !

रवीश कुमार  हमको अंग्रेज़ी नहीं आई तो क्या हुआ, अंग्रेज़ी में हम आ गए! कवि अखिल कत्याल का शुक्रिया। उनके अनुवाद श्रम के कारण संभव हुआ है। राजकमल प्रकाशन के निदेशक व संपादक सत्यानंद और सुदीप्ति का भी शुक्रिया। प्रात: पुष्प संकलन करने वाले प्रकृति प्रेमी सत्यानंद की कल्पना थी। कल्पना करना आलस्य का काम है। फ़ेसबुक पर लघु प्रेम कथा के सैंकड़ों पोस्ट में से छपने लायक साधारण रचनाओं का संग्रह तो सुदीप्ति ने किया। इस तरह से संग्रह संपादक सुदीप्ति हुईं और व्याकरण संपादक सत्यानंद। हम चाहते थे कि सभी रचनाएँ साधारण रहें ताकि आलोचकों का ध्यान गंभीर रचनाओं से कभी न हटे। वैसे प्रेम की आलोचना नहीं हो सकती है। प्रेम कथा की हो सकती है।
विक्रम नायक इस रचना के नायक रहे हैं। मैं इस पुस्तक को उनकी चित्रकारी निहारने के लिए पसंद करता हूँ। विक्रम ने हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों की किताबों के कवर को अमर कर दिया। यह किताब जिनके कारण जिन अनुभवों से बनी है उनका ज़िक्र यहाँ नहीं है। वो हिज्र की रातों में होता है, वस्ल की दोपहरी में होता है! उनका भी शुक्रिया।
स्पीकिंग टाइगर के संपादक रवि सिंह का शुक्रिया हिन्दी के किन शब्दों में करूँ समझ नहीं आ रहा है! रवि सिंह के कारण The Free Voice आई। इस बात के लिए भी कि रवि सिंह ने मुझे लोकार्पण और अति प्रचार के लिए कभी बाध्य नहीं किया। सत्यानंद ने भी नहीं किया। आप इन पुस्तकों के बारे में मेरे फ़ेसबुक पोस्ट से भी सत्यापित कर सकते हैं। मुझे हमेशा दूसरे की किताबों के बारे में दाम, प्रकाशन और ख़रीद की जगह के साथ पोस्ट करना अच्छा लगता है। इश्क़ में शहर होना और A city Happens in Love आमेज़न पर उपलब्ध है। speaking tiger का अपना फ़ेसबुक पेज भी है। लप्रेक का भी फ़ेसबुक पेज है। रवीश के वाल से 

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