बहुत मुश्किल में है अमेरिका में रह रहे भारतीय प्रोफेशनल्स, 6 में 1 को US से निकाले जाने का खतरा
H-1B वीजा पर अमेरिका में कार्यरत भारतीय पेशेवरों के लिए स्थिति दिनों-दिन गंभीर होती जा रही है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, हर छह में से एक भारतीय पेशेवर (या उनके परिचित) को नौकरी छूटने के 60 दिन की तय ग्रेस पीरियड के भीतर ही निर्वासन नोटिस (NTA) मिल चुका है। यह जानकारी Blind ऐप पर हुए एक सर्वेक्षण में सामने आई है, जो वेरिफाइड प्रोफेशनल्स के लिए एक गुमनाम मंच है।
H-1B वीजा नियमों के तहत, नौकरी छूटने के बाद वीजाधारक को या तो नई नौकरी ढूंढनी होती है, या वीजा स्टेटस बदलना होता है, या फिर अमेरिका छोड़ना होता है—और इसके लिए उन्हें 60 दिन का समय दिया जाता है। लेकिन 2025 के मध्य से रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं कि कई मामलों में सिर्फ दो हफ्तों में ही NTA जारी कर दिए जा रहे हैं, जिससे व्यक्ति “आउट ऑफ स्टेटस” करार दिए जा रहे हैं।
एक मेटा कर्मचारी ने Blind ऐप पर लिखा, “कई मामलों में सिर्फ 2 हफ्ते में ही NTA भेजा गया। इमीग्रेशन वकील अब सलाह दे रहे हैं कि नौकरी खत्म होते ही जल्द से जल्द अमेरिका छोड़ दें, वरना स्थायी प्रतिबंध लग सकता है।” एक अन्य सर्वे में 45% भारतीय H-1B पेशेवरों ने कहा कि यदि मजबूरी में अमेरिका छोड़ना पड़ा, तो वे भारत लौट जाएंगे।
- 26% ने कहा वे किसी दूसरे देश में चले जाएंगे
- 29% लोग निर्णय नहीं ले पाए
वापसी में रुकावटों के प्रमुख कारणों में शामिल हैं:
- सैलरी में भारी कटौती (25%)
- जीवन स्तर में गिरावट (24%)
- सांस्कृतिक व पारिवारिक समायोजन की कठिनाई (13%)
- कम नौकरियों के अवसर (10%)
जब पूछा गया कि क्या वे दोबारा H-1B वीजा चुनेंगे, तो सिर्फ 35% ने ‘हां’ कहा, बाकी या तो अनिश्चित थे या नकारात्मक।
- FY 2026 के लिए केवल 1.2 लाख H-1B रजिस्ट्रेशन चयनित हुए—यह 2021 के बाद सबसे कम है।
- FY 2024 में 2.07 लाख और FY 2023 में 1.91 लाख भारतीयों को H-1B मिला था।
- बावजूद इसके, 10 लाख से अधिक भारतीय अभी भी ग्रीन कार्ड बैकलॉग में फंसे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिकी कंपनियों से “भारत में हायरिंग बंद करने” की अपील पर मिला-जुला रिएक्शन आया:
- अमेरिका में काम कर रहे 63% पेशेवरों ने कहा इससे उनकी कंपनियों को फायदा होगा
- वहीं भारत में रह रहे 69% लोगों ने इसे नुकसानदायक बताया
H-1B वीजा अब पहले जितना आकर्षक विकल्प नहीं रह गया है। बढ़ते अनिश्चितता, कड़े नियम और जल्दबाज़ी में भेजे जा रहे निर्वासन नोटिसों ने भारतीय पेशेवरों को गंभीर दुविधा में डाल दिया है। कई लोग मजबूर होकर भारत वापसी या दूसरे देशों की ओर रुख कर रहे हैं।
- रजिस्ट्रेशन में गिरावट: FY 2026 में रजिस्ट्रेशन 26.9% गिरा—फीस बढ़ोतरी ($10 से $215), और फर्जी आवेदनों पर सख्ती कारण बने।
- वेतन आधारित चयन प्रणाली: अब लॉटरी की जगह हाई सैलरी वालों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
- इंटरव्यू अनिवार्य: 2 सितंबर 2025 से H-1B नवीकरण के लिए इन-पर्सन इंटरव्यू जरूरी होगा, जिससे खर्च और समय बढ़ेगा।
- CSPA नियम बदले: 21 वर्ष के करीब पहुंचे बच्चों की ग्रीन कार्ड पात्रता पर असर, जिससे भारतीय परिवारों की चिंता बढ़ी है।
courtesy:hindi.business-standard.com

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