कर्ज हासिल करने का नया पैंतरा:3355 चीनी नागरिकों की हिफाजत के लिए पाकिस्तान ने 11 हजार 225 सुरक्षाकर्मी तैनात किए- इनमें ज्यादातर फौजी

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान 3 फरवरी को चीन यात्रा पर जा रहे हैं। यात्रा के दो मकसद हैं। पहला- चीन से 3 अरब डॉलर का कर्ज हासिल करना। दूसरा- चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC पर काम फिर शुरू करने का भरोसा दिलाना। इस पर करीब दो साल से काम बंद है और चीन इससे काफी नाराज है, क्योंकि वो इस प्रोजेक्ट पर करीब 16 अरब डॉलर खर्च कर चुका है।

पिछले साल दासू डैम प्रोजेक्ट पर काम करने वाले 9 चीनी इंजीनियर्स की भी आतंकियों ने हत्या कर दी थी। लिहाजा, चीन जाने से पहले पाकिस्तान सरकार ने CPEC पर काम करने वाले 3355 चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए 11 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात करने का फैसला किया है।

पंजाब प्रांत की सरकार का फैसला
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, चीनी नागरिकों को सुरक्षा दिलाने के लिए इमरान खान सरकार ने पंजाब प्रांत की सरकार को हुक्म दिया है। पंजाब प्रांत में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI की ही सरकार है और उस्मान बुजदार यहां के मुख्यमंत्री हैं।

जानकारी के मुताबिक, चीनियों की सुरक्षा के लिए एक स्पेशल यूनिट बनाई गई है। इसमें सबसे ज्यादा फौज के लोग होंगे। इसके अलावा रेंजर्स और स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट के कर्मचारियों को भी यहां तैनात किया जा रहा है। इसके अलावा इंटेलिजेंस यूनिट को भी इन चीनियों की हिफाजत का जिम्मा सौंपा गया है।

पिछले साल दासू डैम प्रोजेक्ट पर काम कर रहे चीनी इंजीनियर्स की एक बस को आतंकियों ने बम से उड़ा दिया था। 9 चीनी इंजीनियर मारे गए थे। (फाइल)
पिछले साल दासू डैम प्रोजेक्ट पर काम कर रहे चीनी इंजीनियर्स की एक बस को आतंकियों ने बम से उड़ा दिया था। 9 चीनी इंजीनियर मारे गए थे। (फाइल)

CPEC के अलावा भी जिम्मेदारियां
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार सिर्फ सीपैक को लेकर ही चीन की नाराजगी दूर करने की कोशिश नहीं कर रही, बल्कि वो कुछ और बातें भी कर रही है। दरअसल, पाकिस्तान अब चीन को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है कि पाकिस्तान आने वाले हर चीनी नागरिक को सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। इसकी वजह यह है कि सीपैक के अलावा भी चीन की कई कंपनियां ऐसी हैं जो पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रही हैं और इनमें चीनी नागरिक ही अफसर हैं।

बाजवा से मिले चीनी राजदूत
इस मामले में एक खास बात है। पिछले दिनों पाकिस्तान में चीन के राजदूत नोंग रोंग ने आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा से लंबी मुलाकात की थी। इस मीटिंग में इन दोनों के अलावा कोई और अफसर मौजूद नहीं था। यह मुलाकात इसलिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि इमरान खान को इसमें शामिल नहीं किया गया।
दरअसल, चीन इस बात को अच्छी तरह समझता है कि पाकिस्तान में सरकार की मर्जी नहीं चलती। यहां फौज का सिक्का चलता है और वो जो चाहती है किसी भी सरकार को वही फैसले करने पड़ते हैं। हालांकि, घोषणाएं सरकार के प्रवक्ताओं या मंत्रियों से कराई जाती हैं।

 

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