ई-फार्मेसी को जल्द मिल सकता है कानूनी कवच

दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के नियमन के लिए सरकार कानूनी ढांचा तैयार करने की कवायद में लगी है। शनिवार को सरकार ने मसौदा नियम जारी किया, जिसमें ई फॉर्मेसी के वन प्वाइंट रजिस्ट्रेशन और बिक्री की प्रक्रिया तय की गई है। मसौदे में मरीजों के आंकड़ों के संरक्षण का प्रावधान है, साथ ही सरकारी प्राधिकारियों के अतिरिक्त किसी के साथ भी मरीजों का ब्योरा साझा करने पर रोक लगाई गई है।  भारत में दवाओंं की बिक्री का नियमन ड्रग्स ऐंड कॉस्मेटिक्स ऐक्ट 1940 से होता है। दवाएं सिर्फ लाइसेंस वाली दुकानों से ही बेची जा सकती हैं। इस समय अधिनियम में ई-फॉर्मेसीज शामिल नहीं हैं और सरकार ने नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिलने के बाद एक उपसमिति के गठन का फैसला किया है। इसके लिए उपसमिति की सिफारिशों के मुताबिक मसौदा जारी किया जा चुका है।
भारत के घरेलू दवा बाजार का आकार करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये का है, जिसमें ई-फार्मेसी की हिस्सेदारी बहुत कम है। इसकी कुल बिक्री करीब 200 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।  प्रस्तावित नियमों के मुताबिक व्यक्ति या कंपनियों को ई-फॉर्मेसी चलाने के लिए केंद्रीय लाइसेंस प्राधिकरण के साथ पंजीकरण कराना होगा। राज्यवार पंजीकरण की जरूरत नहीं पड़ेगी। नियमों के तहत ई-फार्मेसी पंजीकरण धारक को केंद्रीय लाइसेंस प्राधिकरण को फर्म के संविधान में संशोधन के सिलसिले में सूचित करना होगा। अगर कोई बदलाव किया जाता है तो नए सिरे से पंजीकरण कराना होगा और मौजूद पंजीकरण सिर्फ 3 महीने के लिए वैध होगा।
ई-फार्मेसी को अपनी वेबसाइट पर उसके संविधान, निदेशकों, साझेदारों का ब्योरा, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता का नाम, वितरित की गई दवाओं की वापसी के नियम के बारे में जानकारी देनी होगी। सूत्रों ने कहा कि दवा की परंपरागत दुकानों को भी संविधान में बदलाव करने की स्थिति में लाइसेंस प्राधिकारी को सूचित करना होता है, लेकिन उन्हें दुकान में निदेशकों के नाम और शेयरधारिता का ब्योरा नहीं देना होता है।  ई-फार्मेसी को सूचना तकनीक अधिनियम के प्रावधानों का पालन भी करना होगा।
ई-फार्मेसी के माध्यम से बिक्री के नियम स्पष्ट किए गए हैं। इनमें कहा गया है कि पंजीकृत फार्मासिस्ट (ई-फार्मेसी द्वारा नियुक्त) दवाओं, मरीज का ब्योरा, रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर के बारे में जांच करेगा और दवा की आपूर्ति का प्रबंध करेगा। किसी भी लाइसेंसधारक खुदरा विक्रेता या थोक विक्रेता के पास से दवाएं भेजी जाएंगी और मरीज के ब्योरे सहित भेजी गई दवाओं का ब्योरा ई-फार्मेसी के पोर्टल पर दिया जाएगा।  जिस परिसर से ई-फार्मेसी का कारोबार चल रहा होगा, उसकी जांच हर दो साल पर केंद्रीय लाइसेंस प्राधिकारी द्वारा नियुक्त अधिकारियों का दल करेगा।
नार्कोटिक्स और साइकोथेरेपिक श्रेणी में सूचीबद्ध दवाओं की बिक्री को लेकर सीमाएं होंगी। ई-फार्मेसी को किसी दवा के विज्ञापन की अनुमति नहीं होगी।  फार्माईजी डॉट इन के सह संस्थापक धवल शाह ने कहा, 'मेरा मानना है कि हेल्थकेयर क्षेत्र को समर्थन देने की दिशा में यह अहम कदम है। यह मरीजों के लिए भी अच्छा होगा क्योंकि ई फॉर्मेसीज को ग्राहकों का ब्योरा रखने और शिकायत निवारण तंत्र बनाने की जरूरत होगी। बहरहाल हमें लगता है कि सरकार को यह साफ करना चाहिए कि दवाओं को भेजने और मरीज का ब्योरा हमें कितनी अवधि तक रखना होगा।'  नेटमेड्स के सीईओ प्रदीप डाढ़ा ने कहा, 'अमेरिका में मेल से दवाओं के ऑर्डर की कुल कारोबार में हिस्सेदारी 15 प्रतिशत है। ई-फॉर्मेसी के लिए नया नियम आने से भारत में  तेजी से कारोबार बढ़ सकता है। इससे पहुंच बढ़ेगी और दवाएं सस्ती मिल सकेंगी।'
 साभार : hindi.business-standard.com

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