परिवार के सदस्य के निधन के बाद कैसे बनवाएं ये 3 जरूरी डॉक्यूमेंट?
परिवार में किसी सदस्य का दुनिया से गुजर जाना दुख की घड़ी होती है. लेकिन, यह समय धैर्य रखने का होता है. इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.
परिवार में किसी सदस्य का दुनिया से गुजर जाना दुख की घड़ी होती है. लेकिन, यह समय धैर्य रखने का होता है. इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. खासतौर से तब अगर मृतक व्यक्ति के नाम पर चल और अचल संपत्तियां हैं. उन्हीं में से एक है मृतक व्यक्ति के दस्तावेजों को जुटा लेना. एकोनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दस्तावेज परिवार के सदस्यों को मृतक व्यक्ति के नाम एसेट को क्लेम और ट्रांसफर करने के लिए जरूरी होते हैं. इनमें तीन डॉक्यूमेंट तो बेहद जरूरी हैं. इनमें डेथ सर्टिफिकेट, लीगल हायर सर्टिफिकेट और सक्सेशन सर्टिफिके ..
1. डेथ सर्टिफिकेट : यह सर्टिफिकेट अमूमन 4-7 दिनों में मिल जाता है.
स्टेप 1 : मौत के 21 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार ऑफिस (स्थानीय ऑफिस) में इसे दर्ज करना पड़ता है. इस अवधि के बाद पेनाल्टी लगती है.
स्टेप 2 : स्थानीय निकाय के कार्यालय (एमसीडी/दिल्ली में एनडीएमसी) से फिजिकल फॉर्म हासिल कर सकते हैं या नगर निगम की वेबसाइट से एप्लीकेशन फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं.
स्टेप 3 : फॉर्म भरकर जरूरी दस्तावेजों के साथ इसे रजिस्ट्रार/सब रजिस्ट्रार के पास जमा करना होता है. इस फॉर्म में मृतक का निजी ब्योरा देने की जरूरत होती है.
स्टेप 4 : जमा किए जाने वाले दस्तावेजों में मृतक के जन्म का प्रमाण, मौत की तारीख और समय बताने वाला एफिडेविट, राशन कार्ड की कॉपी, आधार कार्ड और नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट शामिल हैं
स्टेप 5 : डेथ सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई करने वाले व्यक्ति को मृतक के साथ अपने संबंध का प्रूफ देना पड़ता है. साथ ही पते और राष्ट्रीयता का प्रमाण बताना होता है.
स्टेप 6 : दिल्ली जैसे कुछ राज्यों में एप्लीकेशन फाइल करने से लेकर इसे जमा करने तक की प्रक्रिया ऑनलाइन है.
2. लीगल हायर सर्टिफिकेट : यह प्रक्रिया 15-20 दिन या एक महीना भी ले सकती है
स्टेप 1 : केवल कानूनी वारिस तालुक तहसीलदार, डिस्ट्रिक्ट सिविल कोर्ट या नगर निगम कार्यालय में एप्लीकेशन दे सकते हैं. इनमें मृतक का जीवनसाथी, बच्चे और भाई-बहन शामिल हैं.
स्टेप 2 : जमा किए जाने वाले दस्तावेजों में साइन किया हुआ एप्लीकेशन फॉर्म, आवेदक की पहचान और पते का प्रमाण, डेथ सर्टिफिकेट, सभी कानूनी उत्तराधिकारियों की जन्मतिथि का प्रूफ, स्टैंप पेपर पर सेल्फ-अंडरटेकिंग एफिडेवि ..
स्टेप 3 : रेवेन्यू इंस्पेक्टर या प्रशासनिक अधिकारी इंक्वायरी करता है
. स्टेप 4 : इंक्वायरी के बाद अधिकृत अधिकारी सर्टिफिकेट जारी करता है.
3. सक्सेशन सर्टिफिकेट : इस सर्टिफिकेट को पाने में छह महीने से एक साल तक का वक्त लग सकता है.
स्टेप 1 : इसके लिए जिला या उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करनी पड़ती है. यह मृतक के क्षेत्राधिकार वाले कोर्ट में दाखिल करनी पड़ती है. कोर्ट फीस का भी भुगतान करना पड़ता है.
स्टेप 2 : याचिका में मृतक की मौत का समय, निधन के वक्त उसका निवास स्थान, प्रॉपर्टी का ब्योरा, परिवार या रिश्तेदारों का विवरण, मृतक की संपत्तियों पर याचिकाकर्ता का अधिकार इत्यादि शामिल हैं
. स्टेप 3 : वेरिफिकेशन के बाद जज याचिका पर सुनवाई के लिए एक दिन तय करते हैं. इसमें उन सभी को नोटिस भेजी जाती है जिन्हें वे समझते हैं कि सुनवाई में मौजूद होना चाहिए.
स्टेप 4 : सुनवाई के बाद जज सर्टिफिकेट प्रदान करने का फैसला देते हैं. वह निश्चित समयसीमा के अंदर अखबार में नोटिफिकेशन जारी करवाने के लिए कहते हैं. अगर उस अवधि में कोई आपत्ति नहीं दर्ज की जाती है तो सर्टिफिकेट दे दिया जाता है.
स्टेप 5 : आवेदक को सर्टिफिकेट के दुरुपयोग की आशंका के चलते सिक्योरिटी भी जमा कराने के लिए कहा जा सकता है.

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