हाथरस केस: नफरत और गलत सूचना फैला रहे समाचार चैनल के खिलाफ MEITY पहुंचा CJP

 

 

‘बेस्ट हिंदी न्यूज’ चैनल ने अपमानजनक और भड़काऊ वीडियो साझा किया था, जिसने सामाजिक मीडिया प्लेटफार्मों पर जाति वर्चस्व और पीड़ित-विरोधी मान्यता को बढ़ावा दिया था।

सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) ने ‘बेस्ट हिंदी न्यूज’ के खिलाफ एक शिकायत इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEITY) के पास भेजी है। आरोप है कि उक्त समाचार चैनल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का उपयोग भड़काऊ वीडियो शेयर करने के लिए किया है जो न केवल गलत सूचना फैलाता है बल्कि पीड़ित और उसके परिवार के खिलाफ नफरत व जातीय वर्चस्व को भी बढ़ावा देना।

14 अक्टूबर, 2020 को CJP ने उक्त शिकायत MEITY के ध्यानार्थ भेजी है कि बेस्ट हिंदी न्यूज ने हाथरस की घटना के बारे में गलत सूचना फैलाने के लिए फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब सहित कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। उनका फेसबुक पेज पीड़ित विरोधी बयान शेयर कर रहा है जिससे कई चीजें प्रभावित हो सकती हैं। 
 
शिकायत में कहा गया है कि बेस्ट हिंदी न्यूज ने दीपक शर्मा का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था, जो राष्ट्रीय स्वाभिमान दल (आरएसडी) के संस्थापक होने का दावा करता है, जो एक संगठन है जिसका उद्देश्य हिंदू धर्म और राष्ट्र के हितों की रक्षा करना है। हम, CJP में पहले ही दीपक पर 4 मिनट का एक वीडियो संकलित कर चुके हैं, जो सोशल मीडिया पर उसकी हिस्टेरिकल अपमानजनक सामग्री का चित्रण करता है, जहां वह गैर-विश्वासियों की निंदा करने की मांग करता है और गोधरा की एक और घटना का समर्थन करता है। CJP ने अतीत में दीपक शर्मा के नफरत भरे भाषणों के लिए ज़िम्मेदार ठहराने के प्रयास किए हैं और राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) को उसके कार्यों पर संज्ञान लेने और फ़र्ज़ी तरीके से नफरत फैलाने के लिए फेसबुक से स्थायी रूप से प्रतिबंध लगाने की शिकायत की है।

MEITY की शिकायत में कहा गया है कि बेस्ट हिंदी न्यूज दीपक शर्मा को एक "समाज सेवी" (सामाजिक कार्यकर्ता) के रूप में प्रस्तुत करता है और अपने वीडियो के माध्यम से दलित विरोधी आख्यानों का प्रचार करता रहा है। वीडियो में उसे मृतका की मां और भाई पर उसकी हत्या का आरोप लगाते हुए दिखाया गया है। वह दावा करता है कि पीड़िता द्वारा नामित चार लोगों को गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया है। फेसबुक पर बेस्ट हिंदी न्यूज भी युवा दलित लड़की के जबरन दाह संस्कार को सही ठहराने की कोशिश कर रहा है, यह दावा करते हुए कि इसे उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया जाना था। 6 अक्टूबर, 2020 को बेस्ट हिंदी न्यूज द्वारा शेयर किए गए एक लेख में, वे परिवार की सहमति के बिना पीड़ित के शरीर का दाह संस्कार करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के निर्णय के साथ खड़े थे और कहा कि यदि दाह संस्कार आधी रात में नहीं किया जाता तो, राजनीतिक गिद्धों ने गंदी राजनीति खेली होती।

 

0 comments

Leave a Reply