हजारों लोगों की भूख की कीमत पर महाशक्ति का सपना नहीं चाहिए।

जनता दरबार: 20 मिलियन लोगों की भूख को साथ ले कर अगर हम महाशक्ति बनने का ख्वाब संजोए बैठे है तो किसी काम का नही ये ख्वाब जो अपने ही लोगों की भूख की कीमत पर हासिल किया जाए। भारत को दुनिया के सबसे emotional देशों में गिना जाता था मगर इस वक़्त हमारी संवेदना पाताल में गुम हो चुकी है जिसे अपने ही देश के लोगों की भूख और तड़प दिखाई नही देती।
जिस देश की पहचान किरदार होती थी वो देश अब किस तरफ जा रहा है इसका अंदाजा आप इस बात से ही लगाएं की एक बच्ची झारखंड में भूख से मर जाती है और लोग सारा दोष सरकार के सर मढ़ खुद दोषमुक्त हो जाते है।
कैसे समाज में जी रहे है हम जहां अपने पड़ोसी और गरीबों की फिक्र करना तौहीन समझा जाता है अपने घर में रोज खाना कूड़े में फेंक देना फक्र।
हज़रत उमर अपने वक़्त के बहुत बड़े बादशाह गुजरे है उन्होंने कहा था के मेरे राज में अगर दूर दराज में एक कुत्ता भी भूख से मर जाए तो उसका जिम्मेदार भी ये उमर होगा। क्या इस वक़्त ऐसी उम्मीद हम अपने शासकों से कर सकतें हैं?
छोटी सी उम्र है न जाने कब कहाँ किस मोड़ पर खत्म हो जायेगी। उस वक़्त से पहले कुछ ऐसा कर लिया जाए जो हमे हमारे इंसान होने पर फक्र करवाये न कि जानवरों से भी गिरा होने का एहसास। फैसला हमारे हाथ में है। लेखक:- अनसर इमरान

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