हैदराबाद नगर के संस्थापक,मुहम्मद कुली कुतुबशाह की याद में जश्न शुरू;उर्दू का पहला कविता संग्रह क़ुली क़ुतुब शाह के नाम दर्ज है
हैदराबाद महानगर के संस्थापक और दकनी भाषा के पहले साहित्यकार मुहम्मद कुली कुतुबशाह की याद में आज से जश्न-ए-हैदराबाद की शुरुआत हो रही है। हैदराबाद ट्रेल्स नामी संस्था ने आगामी 15 अप्रैल तक नगर की साझा संस्कृति को लेकर कई तरह के आयोजन का प्लान बनाया है। सरकारें भले कुछ न करें लेकिनहैदराबादी जनता यहाँ की 'गंगा-जमुनी' समावेश संस्कृति का जतन कर रही है।
मुहम्मद कुली कुतुबशाह के 453 वें जन्मदिन पर 'हेरिटेज वाॅक', 'म्युजिक ट्रेल', 'धरोहर फोटो' इ. के अलावा थिएटर और सूफी रात्री का भी हर रोज आयोजन किया जा रहा है।
तेलंगाना ने जब अपने अलग राज्य के लिए आंदोलन चलाया तो बार-बार क़ुली क़ुतुब शाह को याद किया जाता रहा, लेकिन तेलंगाना के अलग होने के बाद हैदराबाद शहर पर नाज करने वाली तेलंगाना सरकार भी इस शहर के संस्थापक क़ुली क़ुतुब शाह को भूल गयी।अवामी इंसाफ मूवमेंट के ख़ालिद हसन ने शासन के इस रवैये पर अपनी नाराजगी जताई है।शहर हैदराबाद के संस्थापक और दक्कनी संस्कृति पर अपनी अनमोल छाप छोड़ने वाले क़ुली क़ुतुब शाह के जन्म दिन पर कोई भी सरकार ना तो कोई उत्सव मनाती है और न दक्कन के इस महान राजा के नाम पर कोई सरकारी कार्यालय या भवन है और न ही कोई हवाई अड्डा है. हैदराबाद नगर के संस्थापक मोहम्मद क़ुली क़ुतुब शाह का जन्म दिन कल ऐसे गुजर गया कि किसी को कुछ पता भी नहीं चला. इस अवसर पर सरकार तो उन्हें भूल गयी, लेकिन इतिहासकारों और विद्वानों ने उन्हें जरूर याद किया. इतिहासकार अल्लमा ऐजाज़ फ़र्रूख के अनुसार क़ुली क़ुतुब शाह एक मशहूर राजा के साथ-साथ दकनी उर्दू के बहुत अच्छे कवी थे. उन्हें उर्दू और फ़ारसी पर कौशल्य तो था ही, उसके साथ-साथ उन्होंने स्थानीय भाषा तेलुगु न सिर्फ सीखी बल्कि उसमे कई कवितायेँ भी लिखीं. उर्दू का पहला कविता संग्रह क़ुली क़ुतुब शाह के नाम दर्ज है दक्कन हेरिटेज के सय्यद सैफुल्लाह ने मांग की है कि सरकार इस महानगर की नींव रखने वाले क़ुतुब शाह को क्यों भूल रही है, जबकि उस्मानिया विश्वविद्यालय की पूर्व एचओडी प्रोफेसर फातिमा परवीन ने बताया कि शाह क़ुतुब ख़ानदान के पांचवे शासक क़ुली क़ुतुब शाह के साहित्य को जनता कभी भुला नहीं पाएगी. बता दें कि शासक मोहम्मद क़ुली क़ुतुब शाह 4 अप्रैल 1565 में पैदा हुए. वे क़ुतुबशाही राज-वंश के पांचवे राजा थे. अपने पिता इब्राहीम क़ुतुब शाह की मृत्यु के बाद सिर्फ 15 साल की उम्र में गोलकोण्डा राज्य की गद्दी संभाली थी.

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