कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में यूरोपीय देश, कोरोना महामारी के चलते जर्मनी में अब तक का सबसे सख्त लॉकडाउन

कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में यूरोपीय देश, कोरोना महामारी के चलते जर्मनी में अब तक का सबसे सख्त लॉकडाउन

जर्मनी में तो कोरोना की दूसरी लहर मार्च और अप्रैल के मुकाबले कहीं ज्यादा खतरनाक दिख रही है. यहां की हालत ये हो गई है कि 90 से 95 फीसदी ICU फूल हैं. ऐसे में जर्मनी सरकार अब तक का सबसे सख्त लॉकडाउन लागू करने वाली है.

कोरोना दुनियाभर में अभी भी काल बनकर लोगों की जान ले रहा है. इस महामारी के चलते अब तक करीब सात करोड़ सत्ताइस लाख से ज्यादा संक्रमित हो चुके हैं जबकि दुनियाभर में सोलह लाख बीस हजार से ज्यादा ने जान गंवाई है. कोरोना की दूसरी लहर इस वक्त यूरोपीय देशों में चल रही है. ऐसे में वहां के देशों की तरफ से इसकी रोकथाम को लेकर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं. जर्मनी में कोरोना की दूसरी लहर के चलते लॉकडाउन में सख्ती के चलते यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर एक और मंदी का खतरा गहरा गया है. चांसलर एजेंला मर्केल और राज्य के नेताओं की तरफ से रविवार को इस बार पर सहमति बनी है कि बुधवार से लेकर ज्यादातर स्टोर्स कम से कम 10 जनवरी तक बंद रहेंगे ताकि कोरोना से बचा जा सके.

जर्मनी में तो कोरोना की दूसरी लहर मार्च और अप्रैल के मुकाबले कही ज्यादा खतरनाक दिख रही है. यहां की हालत ये हो गई है कि नब्बे से पच्चानवें फीसदी आईसीयू फूल है. ऐसे में जर्मनी सरकार अब तक का सबसे सख्त लॉकडाउन लागू करने वाली है. जर्मनी की चांसलर एजेंला मर्केल और जर्मनी के सोलह राज्यों के गवर्नर रविवार को इस बात पर तैयार हो गए कि कोरोना की रोकथाम के लिए दस जनवरी तक कड़ा लॉकडाउन लागू किया जाए.

यहां की सरकार ने दो दिन पहले ही यहां के लोगों से कहा है कि वे आवश्यक वस्तुओं की खरीददारी कर ले. एंजेला मर्केल ने अपील किया है कि जो लोग अपने परिवार के साथ क्रिसमस मनाना चाहते हैं, उन्हें एक हफ्ते पहले से खुद को अलग कर लेना चाहिए. जर्मनी में अब तक कोरोना से 1,338,483 लोग संक्रमित हो चुके हैं और 22,406 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.

मार्च-अप्रैल में लगाई गई पाबंदियों के दौरान जर्मनी में रात का कर्फ्यू नहीं लगाया गया था, लेकिन इस बार रात में कर्फ्यू लगाने की चर्चा भी हो रही है. जर्मनी में लॉकडाउन के दौरान सभी दुकानें, स्कूल आदि बंद रहेंगे और दो गज की दूरी के नियम का बेहद कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा.

अर्थव्यवस्था पर बुरा असर (holiday shopping season)

इस लॉकडाउन का जर्मनी की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा. क्योंकि क्रिसमस का त्योहार और न्यू ईयर जैसा बड़ा इवेंट लॉकडाउन में ही गुजरेगा. क्रिसमस (Christmas) और न्यू ईयर (New Year) यूरोप को बड़े आयोजन होते हैं. इनके लिए महीनों पहले तैयारियां शुरू हो जाती हैं और लोग जमकर खरीदारी करते हैं.

जर्मनी के वित्त मंत्रालय के मुताबिक, लॉकडाउन से प्रभावित होने वाले सेल्फ एंप्लॉएड लोगों, फ्रीलांसर और कंपनियों को वित्तीय मदद दी जाएगी.

बता दें कि जर्मनी में कोरोना वायरस की दूसरी लहर चल रही है. इस बार मार्च-अप्रैल के मुकाबले स्थिति कहीं ज्यादा गंभीर है. बीते शुक्रवार को जर्मनी रिकॉर्ड 29,875 मामले सामने आए. यह जर्मनी के लिए 24 घंटे में संक्रमित होने वाले लोगं की सबसे बड़ी संख्या है. जर्मनी के कई शहरों में अस्पतालों की आईसीयू क्षमता 90 से 95 फीसदी भर चुकी है.

नए नियमों से क्या हासिल करने की कोशिश है?

रविवार को जर्मन चांसलर ने कहा, "जो नए कदम हमने दो नवंबर से लागू किए थे, वे काफी नहीं हैं."

उन्होंने आगे कहा, "स्वास्थ्य सेवाएं बहुत भारी दबाव में हैं और हमेशा हमारा लक्ष्य रहा है कि हेल्थ केयर सिस्टम को ओवरलोडिंग से बचाया जाए.

नई पाबंदियों के जरिए सबसे पहले संक्रमण की रफ्तार को धीमा किया जाएगा. ऐसा करने पर ही कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग मुमकिन हो सकेगी. सरकारें चाहती हैं कि प्रति एक लाख लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले 50 से ज्यादा ना हों. इस बात से इनकार नहीं किया जा रहा है कि अगर कोरोना काबू में नहीं आया तो नई पाबंदियां 10 जनवरी के बाद भी जारी रह सकती हैं.

 

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