भारत के बाद जर्मनी में किसान आंदोलन:किसानों ने सड़कों पर खाद फैलाई; टैक्स में दी जाने वाली छूट खत्म करने के फैसला से नाराज

दिसंबर 2023 की बात है। जर्मनी की सरकार ने बचत करने के लिए किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी घटाने की बात कही। इसके तहत सरकार ने कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले डीजल पर दिया जाने वाला पार्शियल (आंशिक) टैक्स रीफंड और कृषि के लिए इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों-ट्रैक्टर, ट्रक पर टैक्स में दी जाने वाली छूट खत्म करने का फैसला किया।

यह बात किसानों को पसंद नहीं आई और वो इसका विरोध करने लगे। किसान संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर उन्हें मिलने वाली सब्सिडी वापस ली गई, तो वे देशभर में प्रदर्शन करेंगे। इसी के साथ 18 दिसंबर 2023 से शुरू हुआ किसानों का आंदोलन, जो अभी भी जारी है। ताजा अपडेट के मुताबिक किसानों ने जर्मनी के म्यूनिख, बर्लिन समेत कई शहरों में हाईवे और सड़कें जाम कर दी। सड़कों पर खाद भी फैला दी।

तस्वीरें में देखें किसानों का विरोध प्रदर्शन...

बर्लिन में ब्रैंडेनबर्ग गेट के पास हजारों किसान सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
बर्लिन में ब्रैंडेनबर्ग गेट के पास हजारों किसान सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
बर्लिन के एतिहासिक ब्रांडेनबर्ग गेट के बाहर ट्रैक्टरों की कतार है।
बर्लिन के एतिहासिक ब्रांडेनबर्ग गेट के बाहर ट्रैक्टरों की कतार है।
बर्लिन में एक ट्रैक्टर के सामने फंदा लगा हुआ है। यह किसानों ने सरकार के विरोध में लगाया है। उनका कहना है कि सरकार का फैसला से किसानों की जान ले सकता है।
बर्लिन में एक ट्रैक्टर के सामने फंदा लगा हुआ है। यह किसानों ने सरकार के विरोध में लगाया है। उनका कहना है कि सरकार का फैसला से किसानों की जान ले सकता है।
वेहलेफेन्ज शहर में किसान ठंड में भी प्रदर्शन कर रहे हैं। वो खुद को गर्म रखने के लिए लड़कियां जला रहे हैं।
वेहलेफेन्ज शहर में किसान ठंड में भी प्रदर्शन कर रहे हैं। वो खुद को गर्म रखने के लिए लड़कियां जला रहे हैं।
किसान बड़ी संख्या में बर्लिन की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
किसान बड़ी संख्या में बर्लिन की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
म्यूनिख के पास तौफकिर्चेन इलाके में किसानों के ट्रैक्टरों की लंबी लाइन देखी गई।
म्यूनिख के पास तौफकिर्चेन इलाके में किसानों के ट्रैक्टरों की लंबी लाइन देखी गई।
जर्मनी के दक्षिणी राज्य बाडेन-वुर्टेमबर्ग में ट्रैक्टरों के खड़े होने से सड़क पर जाम लग गया।
जर्मनी के दक्षिणी राज्य बाडेन-वुर्टेमबर्ग में ट्रैक्टरों के खड़े होने से सड़क पर जाम लग गया।

जर्मन चांसलर ओलाफ शॉल्ज ने सब्सिडी में कटौती की घोषणा की थी
13 दिसंबर को जर्मनी की गठबंधन सरकार ने 2024 के बजट की घोषणा की। लंबी बातचीत के बाद गठबंधन सरकार के तीनों दलों- जर्मन सोशल डेमोक्रैट (SPD), ग्रीन पार्टी और फ्री डेमोक्रैट (FDP) में बजट पर सहमति बनी। चांसलर ओलाफ शॉल्ज ने एलान किया- सरकार अपने लक्ष्यों को जरूर हासिल करेगी, लेकिन उसके लिए हमें कटौती और बचत करनी होगी।

सब्सिडी में कटौती से सरकार को कितना फायदा...
कटौती के तहत सरकार किसानों को मिलने वाली सब्सिडी में सालाना करीब 90 करोड़ यूरो यानी करीब 8 हजार करोड़ रुपए की बचत करना चाहती है।

म्यूनिख में किसानों ने कृषि सब्सिडी में कटौती के सरकार के फैसले का विरोध करते हुए सड़क पर खाद फैला दी।
म्यूनिख में किसानों ने कृषि सब्सिडी में कटौती के सरकार के फैसले का विरोध करते हुए सड़क पर खाद फैला दी।

सरकार के फैसले से किसानों का रोजगार प्रभावित होगा
किसानों का कहना है कि सब्सिडी में कटौती किए जाने से उनका रोजगार प्रभावित होगा। रॉयटर्स के मुताबिक जर्मन फार्मर्स असोसिएशन के अध्यक्ष जोआषिम रुकवीड ने कहा- सरकार के फैसले से ना केवल किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, बल्कि जर्मनी के कृषि क्षेत्र के कॉम्पिटिशन पर भी असर होगा।

इसके अलावा खाने-पीने की चीजों में महंगाई बढ़ेगी। एक किसान ने कहा- इसके कारण सालाना करीब 20,000 यूरो यानी करीब 18 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ सकता है।

बर्लिन में किसान सड़कें जान करने के लिए यहां पर ट्रैक्टर पार्क कर रहे हैं।
बर्लिन में किसान सड़कें जान करने के लिए यहां पर ट्रैक्टर पार्क कर रहे हैं।

बजट मसौदे को अंतिम रूप नहीं मिला
किसानों के बढ़ते आंदोलन को देखते हुए और कोर्ट की दखल के बाद बजट मसौदे को अंतिम रूप नहीं मिल सका। कोर्ट ने सरकार को सब्सिडी में कटौती की योजना को संशोधित करने का आदेश दिया।

इसके बाद 4 जनवरी 2024 को सरकार ने कहा डीजल पर दिया जाने वाला पार्शियल (आंशिक) टैक्स रीफंड और कृषि के लिए इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों-ट्रैक्टर, ट्रक पर टैक्स में दी जाने वाली छूट एकदम से खत्म नहीं होगी। इस साल सब्सिडी 40% कम की जाएगी, 2025 में 30% कम कर दी जाएगी और 2026 से पूरी तरह खत्म की जाएगी। किसान सरकार के इस फैसले से भी नाराज है, लिहाजा किसान आंदोलन जारी है।

भारत में सितंबर 2020 में शुरू हुआ था किसान आंदोलन
सितंबर 2020 में तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। यह आंदोलन बढ़ता गया। केंद्र सरकार के इन तीनों कृषि कानून को वापस लेने के बाद 11 दिसंबर 2021 को किसान आंदोलन खत्म हुआ था।

 

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