गरीब और मज़बूर बच्चों की खुशियों कर भागीदार बने
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समाज सेवा: बच्चे इस दुनिया का सबसे कीमती खज़ाना है जिसकी अहमियत को बताने के लिए लफ्ज़ ही नही बने है। बच्चे हमारे भविष्य की सबसे सबसे बड़ी उम्मीद की किरण है जिनके नाजुक कंधो पर ही देश व दुनिया की बागडोर का जिम्मा आने वाला है।
इन भविष्य के निर्माताओं को तराशने का काम इनके उस्ताद स्कूलों में बखूबी के साथ निभाते हैं।
मगर जाने अनजाने किस्मत की मार पड़ने से बहुत सारे बच्चे स्कूलों से अपना नाता तोड़ लेते हैं। पता नहीं वक़्त की वो कौन सी मजबूरियां होती है कि ये मासूम इतना बड़ा फैसला लेने को मजबूर हो जाते है।
ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन अपने पहले ही दिन से इन बच्चों की फिक्र को अपनी फिक्र बनाते हुये इन भविष्य निर्माताओं को दुबारा स्कूल में दाखिल करवाने की मुहिम में लगा हुआ है।
लेखक: इमरान अंसारी
(जनसंपर्क अधिकारी, ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन)
ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन जो 2006 में कम्युनिटी के दर्दमंद लोगों द्वारा शुरू किया था वो बच्चों के इस दर्द से बखूबी वाकिफ़ हैं।
ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन अपने पहले ही दिन से इन बच्चों की फिक्र को अपनी फिक्र बनाते हुये इन भविष्य निर्माताओं को दुबारा स्कूल में दाखिल करवाने की मुहिम में लगा हुआ है।
विज़न 2026 के तहत चलने वाले स्कूल बैग प्रोजेक्ट के अंतर्गत इन बच्चों को स्कूल बैग दिया जाता है जिसमे एक साल की किताबें और पढ़ाई के लिए हर जरूरी सामान मुहैया करवाया जाता है ताकि इन बच्चों को और इनके मां बाप को प्रेरित किया जाए के वो अपनी अहमियत को पहचाने और देश की तरक्की में भागीदार बन सके।इस देश के हर दर्दमंद शहरी से यही उम्मीद की जाती है के वो तन्हा अगर इन बच्चों की मदद नहीं कर सकता तो ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन (VISION 2026) की इस मुहिम "स्कूल बैग प्रोजेक्ट 2018-19" का हिस्सा बने और अपनी दुआओं के साथ इन बच्चों की खुशियों के भागीदार बने।
लेखक: इमरान अंसारी
(जनसंपर्क अधिकारी, ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन)

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